CBSE के चेयरमैन और सचिव के तबादले पर अरविंद केजरीवाल का बड़ा बयान, कहा – ‘मोदी सरकार ने लाखों बच्चों के घावों पर नमक छिड़का’
अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता के तबादले को लेकर मोदी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दरअसल यह कार्रवाई सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में सामने आई कथित अनियमितताओं के बाद हुई है। वहीं केजरीवाल ने इस कदम को लाखों बच्चों
अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता के तबादले को लेकर मोदी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दरअसल यह कार्रवाई सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में सामने आई कथित अनियमितताओं के बाद हुई है। वहीं केजरीवाल ने इस कदम को लाखों बच्चों और उनके अभिभावकों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा बताया है।
दरअसल केंद्र सरकार ने मंगलवार, 02 जून को सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का बोर्ड से तबादला कर दिया था। यह फैसला 12वीं बोर्ड परीक्षा में अपनाई गई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में कथित गड़बड़ियों के मामले सामने आने के बाद लिया गया। इन अनियमितताओं को लेकर छात्रों और अभिभावकों में भारी असंतोष था, जिसके बाद यह प्रशासनिक फेरबदल किया गया।
अरविंद केजरीवाल ने PM मोदी पर साधा निशाना
वहीं आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस घटनाक्रम पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा “CBSE के चेयरमैन और सचिव को ट्रांसफर करके मोदी सरकार ने लाखों बच्चों और उनके पैरेंट्स के घावों पर नमक छिड़कने का काम किया है। PM मोदी ने चुनौती दी है- शिक्षा मंत्री नहीं बदला जाएगा, जो करना है कर लो।” केजरीवाल के इन शब्दों से स्पष्ट है कि वे इस तबादले को अपर्याप्त और सरकार की ओर से जिम्मेदारी से बचने का प्रयास मान रहे हैं।
पहले भी उठाये थे सवाल
इससे पहले भी अरविंद केजरीवाल ने एक अन्य पोस्ट में सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था, “क्या? सीबीएसई के अध्यक्ष और सचिव का तबादला? बस? क्या इतने बड़े घोटाले पर सरकार की यही प्रतिक्रिया है? क्या यह सजा है या बचाव?” इन सवालों के माध्यम से केजरीवाल ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या यह कार्रवाई दोषियों को दंडित करने के लिए है या उन्हें बचाने के लिए एक तरीका है।
आतिशी ने भी साधा निशाना
दरअसल दिल्ली की पूर्व शिक्षा मंत्री आतिशी ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, “तो क्या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को कोई सजा नहीं मिली, जबकि कुछ नौकरशाहों का तबादला कर दिया गया? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिक्षा मंत्री को कब बर्खास्त करेंगे?” आतिशी ने सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही पर प्रश्नचिन्ह लगाया और मांग की कि उन्हें पद से हटाया जाए।
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी इस मामले में केंद्र सरकार पर सवाल दागे हैं। उन्होंने कहा, “क्या शिक्षा मंत्री की कोई ज़िम्मेदारी जवाबदेही नहीं बनती? प्रधानमंत्री की कोई जवाबदेही नहीं बनती? 22 लाख बच्चों के भविष्य को बेचने का घोटाला हुआ है।” सिसोदिया ने आरोप लगाया कि यह सिर्फ प्रशासनिक खामी नहीं, बल्कि एक बड़ा घोटाला है जिसमें 22 लाख बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है। उन्होंने आगे कहा कि एक खास कंपनी को मूल्यांकन का ठेका देने के लिए तीन बार ठेके के नियम अफसरों ने अपनी मर्जी से बदले या शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री की इसमें मंजूरी थी? इसकी जांच नहीं होगी? सिसोदिया ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।