MP विधानसभा मानसून सत्र: UCC के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन, उमंग सिंघार बोले “असली मुद्दों से ध्यान भटका रही सरकार”
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर कांग्रेस का विरोध जारी है। मंगलवार को कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा परिसर में सांकेतिक प्रदर्शन कर आरोप लगाया कि राज्य सरकार यूसीसी के जरिए आरएसएस का एजेंडा आगे बढ़ा रही है और शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, किसानों तथा खाद संकट जैसे
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर कांग्रेस का विरोध जारी है। मंगलवार को कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा परिसर में सांकेतिक प्रदर्शन कर आरोप लगाया कि राज्य सरकार यूसीसी के जरिए आरएसएस का एजेंडा आगे बढ़ा रही है और शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, किसानों तथा खाद संकट जैसे जनहित के मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार प्रदेश के वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने से बच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बेरोज़गारी, किसानों की समस्याएं, शिक्षा व्यवस्था और खाद की उपलब्धता जैसे विषयों पर जवाब देने के बजाय UCC को प्राथमिकता दे रही है।
उमंग सिंघार ने सरकार पर लगाए आरोप
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस समान नागरिक संहिता को राजनीतिक एजेंडा बनाकर आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को समान नागरिक संहिता लाने से पहले प्रदेश के युवाओं को रोजगार, किसानों को राहत और शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार पर ध्यान देना चाहिए।
ओबीसी आरक्षण की मांग दोहराई
कांग्रेस ने प्रदर्शन के दौरान 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उमंग सिंघार ने कहा कि यदि सरकार समानता की बात करती है तो उसे पहले पिछड़ा वर्ग को उसका संवैधानिक अधिकार दिलाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की बड़ी ओबीसी आबादी लंबे समय से आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन का इंतजार कर रही है, लेकिन सरकार इस विषय पर ठोस कदम नहीं उठा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दिए बिना नए कानून लाना जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास है। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार पहले ओबीसी आरक्षण, शिक्षा, रोजगार और किसानों से जुड़े मुद्दों का समाधान करे। बता दें कि मध्यप्रदेश सरकार ने हाल ही में यूसीसी का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है और मानसून सत्र के पहले दिन ये विधेयक सदन में पेश किया गया। लेकिन कांग्रेस लगातार इसका विरोध कर रही है और इसे बीजेपी का राजनीतिक एजेंडा करार दे रही है।