सीएम ममता बनर्जी ने पेट्रोल-डीजल एक्साइज ड्यूटी कटौती को बताया साड़ी की दुकान में मोलभाव जैसा, केंद्र सरकार पर साधा निशाना
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई है, जिस पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले को ‘साड़ी की दुकान में खरीदारी’ से जोड़ते हुए केंद्र पर हमला बोला है। उनकी साफ बात थी कि यह वैसा ही है जैसे पहले
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई है, जिस पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले को ‘साड़ी की दुकान में खरीदारी’ से जोड़ते हुए केंद्र पर हमला बोला है। उनकी साफ बात थी कि यह वैसा ही है जैसे पहले दाम बढ़ाओ, फिर थोड़ी रियायत देकर वाहवाही लूटो।
ममता बनर्जी ने अपनी बात को समझाने के लिए एक आम उदाहरण दिया। उन्होंने कहा,
“यह वैसा ही है, जैसे साड़ी की दुकान में खरीदारी करना। अगर आप साड़ी की कीमतें पूछें तो दुकानदार आपको 1000 रुपए बताएगा, लेकिन मोलभाव करने के बाद वह 400 रुपए पर ही मान जाएगा।”
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पहले गैस के दाम भी इसी तरह बढ़ाए गए थे और अब एक्साइज ड्यूटी घटाने की बात हो रही है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर कीमतें कहां जाकर स्थिर होंगी। यह बात सीधे तौर पर केंद्र सरकार की मूल्य निर्धारण नीति पर सवाल खड़े करती है, जिसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ता है। ममता बनर्जी ने जनता की समस्याओं पर भी अपनी चिंता जताई। उन्होंने साफ कहा कि उनकी प्राथमिकता है कि लोगों को किसी भी तरह की असुविधा न हो।
ममता बनर्जी ने रखी ये मांगें
ईंधन की कीमतों के साथ ही ममता बनर्जी ने कुछ और अहम मांगें रखी हैं। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि पुलिस अधिकारियों से लेकर बीडीओ तक, पूरे तंत्र में बदलाव आना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने हल्दिया से गैस सिलेंडर राज्य के बाहर न भेजे जाने की भी मांग की, ताकि स्थानीय लोगों की जरूरतें पूरी हो सकें। यह मांग राज्य के संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकार को दर्शाती है।
सिर्फ ममता बनर्जी ही नहीं, कांग्रेस के नेताओं ने भी सरकार के इस फैसले पर कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश और पवन खेड़ा ने एक्साइज ड्यूटी घटाने के इस निर्णय की आलोचना की है। जयराम रमेश ने तो इसे सीधे तौर पर ‘चुनावी फैसला’ बताया है। उन्होंने सरकार के इस कदम को आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़ते हुए तीखी आलोचना की है। विपक्ष का तर्क है कि यह फैसला जनता को राहत देने से ज्यादा राजनीतिक लाभ उठाने के लिए किया गया है।
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव
दरअसल, साल 2026 में देश के पांच राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम और पुदुचेरी शामिल हैं। चुनाव आयोग ने इन चुनावों की तारीखें पहले ही जारी कर दी हैं। इन राज्यों में अब चुनाव परिणामों के आने तक आदर्श आचार संहिता लागू है। सभी राजनीतिक दल इन चुनावों के प्रचार प्रसार में पूरी तरह जुट गए हैं।
विपक्षी दलों का मानना है कि केंद्र सरकार ने चुनावी राज्यों में मतदाताओं को लुभाने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम की है। उनका तर्क है कि अगर सरकार को वाकई जनता की फिक्र होती तो यह कदम बहुत पहले ही उठाया जा सकता था। चुनाव से ठीक पहले इस तरह के फैसले अक्सर राजनीतिक गलियारों में बहस का मुद्दा बनते हैं। अब देखना होगा कि जनता इस कदम को राहत मानती है या चुनावी दांवपेंच।