MP विधानसभा मानसून सत्र: UCC विधेयक पर उमंग सिंघार का हमला, पूछा “ओबीसी और पिछड़ों की बात करने से क्यों कतरा रही है बीजेपी”
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़ा विधेयक सदन में प्रस्तुत किए जाने के बाद इस मुद्दे पर सियासी बहस तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में साफ फर्क है। उनका
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़ा विधेयक सदन में प्रस्तुत किए जाने के बाद इस मुद्दे पर सियासी बहस तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में साफ फर्क है। उनका आरोप है कि सरकार को यूसीसी लाने की बजाय 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए विधेयक लाना चाहिए था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा सरकार सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए यूसीसी लागू करने की जल्दबाज़ी में है लेकिन जब ओबीसी समाज और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की बात आती है तो भाजपा खामोश हो जाती है। उन्होंने कहा कि यूसीसी समान नागरिकता और समान अधिकारों का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आरएसएस और भाजपा का राजनीतिक एवं चुनावी एजेंडा है।
विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश हुआ
मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया। सत्र के पहले दिन सरकार ने समान नागरिक संहिता विधेयक प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इसे महत्वपूर्ण विधायी एजेंडा बनाया है। कैबिनेट ने रविवार को ही इस ड्राफ्ट को मंजूरी दी थी। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। सरकार इसे सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है।
हालांकि, विपक्ष इस कदम का विरोध कर रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार जनता से जुड़े मुद्दों, विशेषकर ओबीसी आरक्षण, किसानों, युवाओं और रोजगार जैसे विषयों को प्राथमिकता देने के बजाय राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ा रही है।
उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
इस विधेयक पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि भाजपा की कथनी और करनी में साफ फर्क है। उन्होंने कहा कि “भाजपा को UCC की बजाय 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का बिल लाना चाहिए था। भाजपा सरकार सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए यूसीसी लागू करने की जल्दबाजी में है। लेकिन जब बात ओबीसी समाज और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की आती है, तो भाजपा खामोश क्यों हो जाती है?”। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया है कि यूसीसी बीजेपी का राजनीतिक और चुनावी एजेंडा है। उन्होंने कहा कि ये विधेयक समान नागरिकता समान अधिकारों की बात नहीं करता है।