MP Teacher Recruitment Explainer: हजारों शिक्षक पद खाली, फिर भी सभी पर भर्ती क्यों नहीं? 5 सवालों में समझिए पूरा मामला
भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती और नियुक्ति की मांग को लेकर सैकड़ों अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं। सरकार के सामने बार-बार एक सवाल रखा जा रहा है—जब स्कूल शिक्षा विभाग में हजारों शिक्षक पद खाली हैं तो नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही? अभ्यर्थी केवल सवाल ही नहीं उठा रहे, बल्कि खाली पदों की […]
भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती और नियुक्ति की मांग को लेकर सैकड़ों अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं। सरकार के सामने बार-बार एक सवाल रखा जा रहा है—जब स्कूल शिक्षा विभाग में हजारों शिक्षक पद खाली हैं तो नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही? अभ्यर्थी केवल सवाल ही नहीं उठा रहे, बल्कि खाली पदों की संख्या भी सामने रख रहे हैं। सवाल वाजिब है, क्योंकि शिक्षक पदों की रिक्तियां सरकारी रिकॉर्ड में भी दर्ज हैं। फिर आखिर ऐसा क्या है कि पद खाली होने और लगातार मांग, आवेदन व आंदोलन के बावजूद नियुक्ति का रास्ता नहीं खुल पा रहा?
इन सवालों का जवाब ढूंढने से पहले कई और सवाल हैं, जिनके जवाब हमारे सामने स्पष्ट होना जरूरी है। क्योंकि जैसा कहा जाता है कि पानी की गहराई नापनी हो तो पानी में उतरना पड़ता है, ठीक वैसे ही किसी सवाल की तह तक पहुंचने के लिए उससे जुड़े दूसरे सवालों के जवाब भी तलाशने होते हैं। आखिर खाली पद क्यों नहीं भरे जा रहे? सरकार जब हरसंभव संवेदनशील निर्णय लेने के लिए तत्पर और प्रयासरत होने की बात कह रही है, तो फिर ऐसी कौन-सी समस्या है जो शिक्षक भर्ती और नियुक्ति के रास्ते में रोड़ा बन रही है? इन सवालों के जवाब सामने आएं तो काफी हद तक पूरी स्थिति भी स्पष्ट हो सकती है। तो आखिर वे सवाल क्या हैं, जिनके जवाब शिक्षक भर्ती के इस पूरे मामले को समझने के लिए जरूरी हैं?
सवाल 1: क्या हर खाली शिक्षक पद सीधी भर्ती के लिए है?
सबसे पहला सवाल यही है। क्योंकि आम तौर पर जब हम सुनते हैं कि स्कूल शिक्षा विभाग में हजारों पद खाली हैं तो सीधी सी बात दिमाग में आती है—पद खाली हैं तो भर्ती करके इन्हें भर दिया जाए। लेकिन क्या वास्तव में हर खाली पद नई भर्ती के लिए ही है?
जवाब है—नहीं।
स्कूल शिक्षा विभाग में खाली पद अलग-अलग तरह के हैं। कुछ पद सीधी भर्ती के हैं तो बड़ी संख्या में ऐसे पद भी हैं, जिन्हें पहले से नौकरी कर रहे शिक्षकों की पदोन्नति से भरा जाना है। इसके अलावा कुछ पद आरक्षित वर्ग के बैकलॉग में हैं।
यानी पोर्टल या सरकारी रिकॉर्ड में कोई पद खाली दिखाई दे रहा है तो सिर्फ इससे यह तय नहीं हो जाता कि उस पद पर बाहर से किसी नए अभ्यर्थी को नियुक्त किया जा सकता है।
अब यहां स्वाभाविक रूप से दूसरा सवाल आता है—अगर सभी खाली पद सीधी भर्ती के नहीं हैं तो कितने पद ऐसे हैं, जिन्हें पदोन्नति से भरा जाना है?
सवाल 2: आखिर ये करीब 59 हजार पद किसके लिए हैं?
यहीं एक बड़ा आंकड़ा सामने आता है। स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार करीब 59 हजार खाली पद पदोन्नति के लिए निर्धारित हैं।
अब इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझिए। एक शिक्षक पहले से विभाग में नौकरी कर रहा है। सेवा और नियमों के अनुसार उसे आगे के पद पर पदोन्नत होना है। उसके लिए जो पद निर्धारित है, वह फिलहाल खाली दिखाई दे सकता है, लेकिन उस खाली पद का मतलब यह नहीं कि सरकार उस पर बाहर से नया शिक्षक भर्ती कर दे।
अगर पदोन्नति के लिए रखे गए इन्हीं पदों को सीधी भर्ती से भर दिया जाए तो फिर वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की पदोन्नति कहां होगी? यही कारण है कि 59 हजार पद खाली होने और 59 हजार नई नौकरियां उपलब्ध होने को एक ही बात नहीं माना जा सकता।
लेकिन अब सवाल फिर भी बचता है। ठीक है, करीब 59 हजार पद पदोन्नति के हैं, लेकिन जो पद सीधी भर्ती के लिए खाली हैं, उन पर तो नियुक्ति हो सकती है?
सवाल 3: सीधी भर्ती के पद खाली हैं तो फिर नियुक्ति में अड़चन कहां है?
यहां मामला विषय पर आकर टिकता है। स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि सीधी भर्ती के लिए उपलब्ध अधिकांश खाली पद गणित और विज्ञान विषय के हैं। अब मान लीजिए गणित के शिक्षक का पद खाली है और नियुक्ति की मांग करने वाला अभ्यर्थी आर्ट्स या कॉमर्स विषय से है, तो क्या केवल पद खाली होने के कारण उसे गणित का शिक्षक नियुक्त किया जा सकता है?
जाहिर है, ऐसा नहीं हो सकता। जिस विषय का पद है, उस विषय के लिए निर्धारित योग्यता भी जरूरी होगी।
यानी यहां एक और फर्क समझना जरूरी है—विभाग में पद खाली होना अलग बात है और आपके विषय का पद खाली होना अलग।
इसलिए केवल सीधी भर्ती के खाली पदों की संख्या देखना भी पूरी तस्वीर नहीं बताता। यह देखना उतना ही जरूरी है कि वे पद किन विषयों के हैं और नियुक्ति की मांग कर रहे अभ्यर्थी किस विषय के लिए पात्र हैं।
लेकिन कहानी अभी पूरी नहीं हुई। क्योंकि खाली पदों में एक संख्या ऐसे पदों की भी है, जो SC-ST बैकलॉग के हैं।
सवाल 4: SC-ST बैकलॉग के पद खाली हैं तो उन्हें क्यों नहीं भरा जा रहा?
अब मान लीजिए कोई पद SC या ST वर्ग के लिए आरक्षित है और उस पद के लिए पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं हो पाया। ऐसी स्थिति में वह पद खाली रह सकता है और सरकारी रिकॉर्ड में भी खाली ही दिखाई देगा।
स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने के कारण SC-ST के कई बैकलॉग पद अभी रिक्त हैं। लेकिन यहां सवाल आता है—क्या इन खाली पदों को दूसरे वर्ग के अभ्यर्थियों से भर दिया जाए?
मौजूदा नियम इसकी अनुमति नहीं देते। जिस वर्ग के लिए पद आरक्षित है, उसे नियमों से अलग जाकर किसी दूसरे वर्ग के उम्मीदवार को नहीं दिया जा सकता।
इसलिए जब हजारों खाली पदों की संख्या सामने रखी जाती है तो यह देखना भी जरूरी है कि उनमें बैकलॉग के कितने पद हैं और वे किन वर्गों के लिए निर्धारित हैं।
अब तक तीन बातें हमारे सामने हैं—कुछ पद पदोन्नति के हैं, सीधी भर्ती के पदों में विषय की योग्यता मायने रखती है और बैकलॉग पदों को दूसरे वर्ग के अभ्यर्थियों से नहीं भरा जा सकता।
इसके बाद सवाल सीधे उन अभ्यर्थियों पर आता है, जो नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
सवाल 5: क्या नियुक्ति की मांग कर रहे सभी अभ्यर्थी चयनित हैं?
यह इस पूरे मामले का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा है।
स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि आंदोलन कर रहे कई अभ्यर्थी खुद को ‘चयनित शिक्षक’ बताते हैं, जबकि उनके नाम न चयन सूची में हैं और न ही प्रतीक्षा सूची में।
अब यदि कोई अभ्यर्थी चयन सूची में नहीं है और प्रतीक्षा सूची में भी नहीं है तो सवाल उठता है कि उसे सीधे नियुक्ति किस आधार पर दी जाए? लेकिन यहां बात केवल पिछली चयन प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहती।
पिछले तीन वर्षों में बड़ी संख्या में नए युवाओं ने शिक्षक बनने के लिए जरूरी शैक्षणिक और व्यावसायिक योग्यता हासिल की है। अब यदि सरकार नई भर्ती करती है तो क्या इन नए पात्र अभ्यर्थियों को उसमें शामिल होने का अवसर नहीं मिलना चाहिए?
यदि नई भर्ती निकालने के बजाय पिछली प्रक्रिया में अचयनित रहे अभ्यर्थियों को ही सीधे नियुक्ति दी जाती है तो इस बीच पात्र बने युवाओं के समान अवसर का सवाल भी खड़ा होगा।
यानी सरकार के सामने केवल यह तय करना नहीं है कि कोई पद खाली है या नहीं। उसे यह भी देखना है कि उस पद पर नियुक्ति किस प्रक्रिया से होगी और उस प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार किन-किन पात्र अभ्यर्थियों का है।
अब वापस उसी सवाल पर आइए, जहां से बात शुरू हुई थी
जब हजारों शिक्षक पद खाली हैं तो नियुक्ति क्यों नहीं?
इन पांच सवालों के जवाब के बाद तस्वीर काफी हद तक साफ दिखाई देती है। पद खाली हैं, लेकिन सभी पद एक जैसे नहीं हैं। करीब 59 हजार पद पदोन्नति के लिए निर्धारित बताए जा रहे हैं। सीधी भर्ती के लिए उपलब्ध अधिकांश रिक्तियां गणित-विज्ञान विषय की हैं। SC-ST बैकलॉग के पदों को दूसरे वर्ग से नहीं भरा जा सकता। इसके बाद जो पद सीधी भर्ती के लिए उपलब्ध हैं, उनमें भी विषय और वर्ग के अनुसार पात्रता देखी जानी है।
इसके साथ नियुक्ति की मांग कर रहे अभ्यर्थियों की चयन और प्रतीक्षा सूची में स्थिति तथा पिछले तीन वर्षों में पात्र हुए नए उम्मीदवारों को समान अवसर देने का सवाल भी जुड़ा है।
इसलिए केवल यह कहना कि “इतने हजार पद खाली हैं, इन्हें भर दीजिए” पूरे मामले का एक हिस्सा जरूर बताता है, लेकिन पूरी तस्वीर नहीं।
इसका यह मतलब भी नहीं कि नियुक्ति की मांग कर रहे अभ्यर्थियों के सवालों को नजरअंदाज कर दिया जाए। खाली पदों को लेकर उनका सवाल वाजिब है और सरकार के लिए जरूरी है कि वह उनकी मांगों को सुने और जहां नियमों के भीतर रास्ता निकल सकता है, वहां समाधान तलाशे।
लेकिन शिक्षक भर्ती की वास्तविक स्थिति समझने के लिए केवल कुल रिक्तियों की संख्या नहीं, बल्कि यह भी देखना होगा कि कितने पद सीधी भर्ती के हैं, कितने पदोन्नति के, कितने बैकलॉग के, सीधी भर्ती के पद किन विषयों के हैं और उन पर नियुक्ति के लिए कौन पात्र है।
शायद इस पूरे मामले का जवाब भी यहीं छिपा है—सवाल केवल यह नहीं कि कितने शिक्षक पद खाली हैं, सवाल यह भी है कि वे पद किसके लिए हैं, किस प्रक्रिया से भरे जाने हैं और उन पर नियुक्ति का अधिकार किसका बनता है।