6 दिन, न नींद न थकान; बस सैकड़ों जिंदगियां बचाने का जुनून! जानिए कैसे सैलाब के बीच ‘देवदूत’ बनी नेपाल की पहली महिला कैप्टन प्रिया

छह दिन, करीब 100 उड़ानें और हर मिशन में जान का खतरा, नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर कैप्टन प्रिया अधिकारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच कैसे सैकड़ों लोगों तक पहुंचीं? पढ़ें उनकी जांबाजी की पूरी स्टोरी।

Sep 2, 2026 - 10:30
6 दिन, न नींद न थकान; बस सैकड़ों जिंदगियां बचाने का जुनून! जानिए कैसे सैलाब के बीच ‘देवदूत’ बनी नेपाल की पहली महिला कैप्टन प्रिया

New Delhi: नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस मुश्किल वक्त में 41 वर्षीय प्रिया अधिकारी राहत और बचाव अभियान की अहम कड़ी बनी हुई हैं। नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर कैप्टन प्रिया अधिकारी ने लगातार छह दिनों तक उड़ान भरकर करीब 100 बचाव मिशन पूरे किए। वह हिमालय के बेहद चुनौतीपूर्ण इलाकों में हेलीकॉप्टर उड़ाकर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ लापता लोगों और शवों की तलाश में भी जुटी हैं।

तिमुरे में सबसे चुनौतीपूर्ण रहा बचाव अभियान

रासुवा जिले का बाढ़ प्रभावित तिमुरे इलाका प्रिया अधिकारी के लिए सबसे कठिन रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक रहा। यहां बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात बेहद खतरनाक हो गए हैं। राहत अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए लगातार हेलीकॉप्टर उड़ाए जा रहे हैं।

एक साथ कई हेलीकॉप्टर

तिमुरे में बचाव अभियान के लिए करीब 20 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। कई मौकों पर पांच से छह हेलीकॉप्टरों को लगभग एक साथ लैंड करना पड़ता है। ऐसे हालात में पायलट रेडियो के जरिए लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं, ताकि हवा में या लैंडिंग के दौरान टक्कर का खतरा न हो।

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लैंड़िग बेहद जोखिम भरी

बाढ़ और भूस्खलन के बाद कई इलाकों में मोटी और अस्थिर मिट्टी जमा हो गई है। ऊपर से जमीन मजबूत दिखाई देती है, लेकिन पायलट के लिए यह तय करना मुश्किल होता है कि वह हेलीकॉप्टर का वजन सह पाएगी या नहीं। कुछ जगहों पर इंजन बंद करना भी जोखिम भरा होता है। ऐसे में यात्रियों को बाहर निकालते समय हेलीकॉप्टर का इंजन चालू रखना पड़ता है।

आसमान से दिखा तबाही का भयावह मंजर

प्रिया अधिकारी ने बताया कि तिमुरे के ऊपर से उड़ान भरते समय उन्होंने बाढ़ से तबाह इलाकों में कई शव बिखरे हुए देखे। वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में लोग मदद के इंतजार में हेलीकॉप्टर की ओर देख रहे थे। अभियान के शुरुआती दो दिनों में ही तिमुरे से 200 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया। नेपाल सेना के अगस्ता हेलीकॉप्टर भी इस बचाव अभियान में शामिल रहे।

हाथ हिलाते लोगों को देखकर बढ़ा हौसला

प्रिया अधिकारी के लिए जमीन पर खड़े और मदद के लिए हाथ हिलाते लोगों को देखना बेहद भावुक पल था। उन्होंने बताया कि ऐसे समय में वह लोगों से सिर्फ यही कहती थीं कि आप बच गए हैं। लगातार खतरे के बीच लोगों को सुरक्षित निकालना उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता रही।

लापता लोगों की तलाश में भी जुटीं प्रिया

रेस्क्यू अभियान के दौरान प्रिया अधिकारी ने उन लोगों की तलाश में भी मदद की, जो आपदा के बाद लापता हो गए। उन्होंने राधिका नाम की अमेरिकी-भारतीय महिला के माता-पिता को खोजने की कोशिश की, जिनका परिवार इस आपदा में फंस गया था। इसके अलावा तिमुरे में ईशा फाउंडेशन से जुड़े एक नेपाली व्यक्ति और बैंक में काम करने वाले एक अन्य नेपाली व्यक्ति की तलाश भी की गई।

‘ये मेरे रिश्तेदार नहीं थे फिर भी जुड़ाव महसूस हुआ’

प्रिया अधिकारी ने बताया कि लापता लोगों में से कोई भी उनका रिश्तेदार नहीं था, लेकिन आसमान से तबाही और शवों को देखने के बाद उनके मन में इन लोगों के लिए भावनात्मक जुड़ाव पैदा हो गया। उन्होंने प्रभावित इलाकों में शवों को सुरक्षित रखने के लिए बॉडी बैग की कमी को भी बड़ी जरूरत बताया।

6,200 मीटर तक कर चुकी हैं रेस्क्यू उड़ान

प्रिया अधिकारी को ऊंचाई वाले हिमालयी इलाकों में बचाव अभियानों का लंबा अनुभव है। वह करीब 6,200 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरकर घायल पर्वतारोहियों को बचाने जैसे चुनौतीपूर्ण मिशन कर चुकी हैं। उनके अनुभव ने मौजूदा बाढ़ और भूस्खलन के दौरान चल रहे बचाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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पर्यावरण विज्ञान से शुरू हुआ सफर

प्रिया अधिकारी का विमानन करियर सीधे तौर पर शुरू नहीं हुआ था। उन्होंने पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई की और शुरुआती दौर में केबिन क्रू के तौर पर काम किया। एक हेलीकॉप्टर की सवारी के बाद उनकी उड़ान में रुचि बढ़ी और उन्होंने पायलट बनने का फैसला किया। इसके लिए वह प्रशिक्षण लेने फिलीपींस गईं। जरूरी उड़ान घंटे पूरे करने के बाद वर्ष 2017 में वह पूर्णकालिक हेलीकॉप्टर पायलट बनीं और बाद में ऊंचाई वाले रेस्क्यू मिशनों में विशेषज्ञता हासिल की।

थकान के बावजूद जारी रखा बचाव अभियान

लगातार कई दिनों तक उड़ान भरने के कारण प्रिया अधिकारी और उनके साथ काम कर रहे अन्य पायलट बेहद थक चुके हैं। इसके बावजूद उन्होंने राहत और बचाव अभियान जारी रखा। प्रिया के मुताबिक, ऐसे मुश्किल हालात के लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया गया है और लोगों को बचाना उनका काम है।

2015 के भूकंप से भी मुश्किल लगा मौजूदा अभियान

प्रिया अधिकारी ने बताया कि बाढ़ और भूस्खलन के बीच चल रहा मौजूदा बचाव अभियान उन्हें वर्ष 2015 के नेपाल भूकंप से भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण लगा। उनके मुताबिक, इस बार तबाही एक संकरी घाटी में केंद्रित है, जिससे हेलीकॉप्टर ऑपरेशन और भी मुश्किल हो जाता है। छह दिनों में करीब 100 मिशन पूरे करना दिखाता है कि बेहद खतरनाक परिस्थितियों में भी राहत और बचाव कार्य किस तरह लगातार जारी रखा गया।

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