क्या भारत से राजनीति करेंगी शेख हसीना? मोदी सरकार ने थरूर समिति को दिया ये दो टूक जवाब
क्या भारत से राजनीति करेंगी बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना? मोदी सरकार ने संसद की विदेश मामलों की समिति को दिया स्पष्ट जवाब। जानिए प्रत्यर्पण की अर्जी, वीजा सेवाओं की बहाली और गंगा जल संधि पर क्या है भारत का नया प्लान!
New Delhi: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत में मौजूदगी को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर केंद्र सरकार ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति को साफ कर दिया है कि शेख हसीना को भारतीय जमीन से किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि चलाने की इजाजत नहीं होगी। वहीं दूसरी ओर, शेख हसीना ने खुद यह संकेत दिए हैं कि वह साल के अंत तक अपने देश बांग्लादेश वापस लौटने की योजना बना रही हैं।
शरण देना भारत की मानवीय परंपरा
कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि शेख हसीना को शरण देना भारत की उस प्राचीन सभ्यता और मानवीय परंपरा का हिस्सा है, जिसके तहत संकट में घिरे नेताओं को संरक्षण दिया जाता है।
विदेश मंत्रालय ने समिति को बताया कि बांग्लादेश सरकार की ओर से आए शेख हसीना के प्रत्यर्पण (Extradition) अनुरोध पर भारतीय अधिकारी कानून और तय प्रक्रियाओं के तहत समीक्षा कर रहे हैं। समिति ने सरकार से सिफारिश की है कि वह अपनी इस मानवीय नीति को बनाए रखे।
संबंधों को पटरी पर लाने की पहल
जुलाई 2024 में बांग्लादेश में हुई राजनीतिक उठापटक और सुरक्षा कारणों के चलते वीजा सेवाओं पर रोक लगा दी गई थी। लगभग दो साल के लंबे इंतजार के बाद 28 जून 2026 को भारत ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए दोबारा टूरिस्ट वीजा सेवाएं शुरू कर दी हैं। संसदीय समिति ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि वीजा प्रक्रिया में ढील देने से दोनों देशों के आम लोगों के बीच रिश्ते सुधरेंगे और सकारात्मक संदेश जाएगा।
गंगा जल संधि के नवीनीकरण पर तत्काल बातचीत की सिफारिश
1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हस्ताक्षरित ऐतिहासिक ‘गंगा जल संधि’ इस वर्ष समाप्त हो रही है। इसको ध्यान में रखते हुए संसदीय समिति ने मोदी सरकार से अपील की है कि वह बिना किसी देरी के ढाका के साथ नए सिरे से बातचीत शुरू करे। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि जल बंटवारे पर होने वाली यह नई वार्ता आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल आंकड़ों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए।