आदिवासी हितों के मुद्दे पर उमंग सिंघार ने MP सरकार को घेरा, बोले “वनाधिकार दावों में आदिवासियों के साथ हुआ अन्याय”

मध्यप्रदेश में वनाधिकार कानून के तहत दायर दावों पर सरकार के रुख को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीजेपी पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि “जल, जंगल और जमीन” की बात करने वाली सरकार आदिवासियों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित कर रही है। उनका आरोप है कि वन भूमि पर अधिकार के

Jul 10, 2026 - 11:30
आदिवासी हितों के मुद्दे पर उमंग सिंघार ने MP सरकार को घेरा, बोले “वनाधिकार दावों में आदिवासियों के साथ हुआ अन्याय”

मध्यप्रदेश में वनाधिकार कानून के तहत दायर दावों पर सरकार के रुख को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीजेपी पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि “जल, जंगल और जमीन” की बात करने वाली सरकार आदिवासियों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित कर रही है।

उनका आरोप है कि वन भूमि पर अधिकार के दावों के निस्तारण में बड़े पैमाने पर आदिवासी समुदाय के साथ अन्याय हुआ है। कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या आदिवासी विरोधी नीतियां ही भाजपा का असली चेहरा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सड़क से सदन तक आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखेगी।

उमंग सिंघार ने सरकार पर लगाए आरोप

उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश में वन भूमि पर अधिकार के लिए 2.59 लाख लोगों ने दोबारा दावा प्रस्तुत किया लेकिन इनमें से सिर्फ 30 हजार दावों को ही मंजूरी दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि 2.29 लाख दावे खारिज कर दिए गए, जिनमें करीब 95 प्रतिशत दावेदार आदिवासी हैं। उनके अनुसार, इससे स्पष्ट होता है कि वनाधिकार कानून का लाभ पात्र लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने सामुदायिक वन अधिकार के मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 540 मामलों में से सिर्फ 74 मामलों को मंजूरी मिली है, जबकि 400 से अधिक मामले वर्षों से लंबित हैं। उनका कहना है कि सामुदायिक वन अधिकार आदिवासी समुदाय की आजीविका, परंपरागत संसाधनों और स्थानीय स्वशासन से जुड़े महत्वपूर्ण अधिकार हैं, लेकिन सरकार इन मामलों के निस्तारण में गंभीरता नहीं दिखा रही है।

‘कांग्रेस जारी रखेगी संघर्ष’

उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल करते हुए कहा कि भाजपा सरकार बताए कि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों के साथ यह अन्याय क्यों किया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या “जल, जंगल और जमीन” का मुद्दा सिर्फ चुनावी नारा बनकर रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी विरोधी नीतियां और प्रशासनिक उदासीनता ही भाजपा सरकार का वास्तविक चेहरा हैं। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी।

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