ट्रंप प्रशासन का बड़ा झटका: भारतीय IT और तकनीकी पेशेवरों पर अनिश्चितता की तलवार, मचा हड़कंप
अमेरिका में H-1B वीजा पर काम कर रहे भारतीय पेशेवरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। नौकरी जाने के बाद मिलने वाली 60 दिन की राहत अवधि को खत्म करने का प्रस्ताव समीक्षा प्रक्रिया से आगे बढ़ गया है। जानिए भारतीय कर्मचारियों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
New Delhi: अमेरिका में काम कर रहे हजारों भारतीय IT और तकनीकी पेशेवरों के सिर पर अनिश्चितता की तलवार लटक गई है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) एक ऐसे नए प्रस्ताव पर काम कर रहा है, जिसके लागू होते ही नौकरी जाने पर मिलने वाली 60 दिनों की राहत अवधि (Grace Period) समाप्त हो सकती है। इस प्रस्ताव की समीक्षा व्हाइट हाउस से पूरी हो चुकी है, जिससे भारतीय कर्मचारियों में भारी हड़कंप मचा हुआ है।
क्या है 60 दिन का ग्रेस पीरियड और क्यों है ये जरूरी?
मौजूदा आव्रजन नियमों के तहत, यदि किसी H-1B, L-1 या O-1 वीजा धारक की नौकरी अचानक चली जाती है, तो उसे 60 दिन का समय दिया जाता है। इस अवधि में कर्मचारी या तो कोई नई कंपनी ढूंढकर अपना वीजा ट्रांसफर करवा सकता है या अपने परिवार के साथ देश छोड़ने की व्यवस्था कर सकता है। अगर यह समय सीमा खत्म कर दी जाती है, तो नौकरी गंवाने वाले कर्मचारियों को रातोंरात अमेरिका छोड़ना पड़ेगा।
व्हाइट हाउस की मंजूरी के करीब पहुंचा प्रस्ताव
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्ताव को व्हाइट हाउस की नियामक मामलों की शाखा से हरी झंडी मिल चुकी है। हालांकि, इसे लागू करने से पहले संघीय रजिस्टर में प्रकाशित किया जाएगा, जहां आम जनता और कंपनियों से सुझाव मांगे जाएंगे। इसके बाद ही अंतिम कानून बनेगा। लेकिन इस कदम से टेक कंपनियों में काम कर रहे भारतीयों की रातों की नींद उड़ गई है।
भारतीय समुदाय में भारी विरोध: ‘यह फैसला पूरी तरह अमानवीय’
अमेरिकी राष्ट्रपति की सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य अजय जैन भूटोरिया ने इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियों में इंटरव्यू की प्रक्रिया और वीजा ट्रांसफर की कागजी कार्रवाई में महीनों का समय लगता है। भूटोरिया ने याद दिलाया कि 2023 में उन्होंने इस अवधि को 60 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करने की सिफारिश की थी, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म करना अमानवीय है और इससे हजारों भारतीय परिवार सड़क पर आ जाएंगे।