US-Iran Deal Impact: अमेरिका और ईरान डील के बीच भारत को क्या होगा फायदा?
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब खत्म होने की दिशा में नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई है।
New Delhi: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब खत्म होने की दिशा में नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई है। साथ ही उन्होंने यह भी ऐलान किया कि मिडिल ईस्ट तनाव के चलते लंबे समय से बंद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और उस पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी हटाने पर सहमति बन गई है।
ऊर्जा संकट में फंसे देशों को बड़ी राहत
इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट देखने को मिली है, जिसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता दिख रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने से तेल और गैस की सप्लाई सामान्य होगी, जिससे ऊर्जा संकट में फंसे देशों को बड़ी राहत मिल सकती है।
एलपीजी की कीमतों में भी कमी आने की संभावना
भारत के लिए यह समझौता कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है। कच्चा तेल सस्ता होने से पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कीमतों में भी कमी आने की संभावना जताई जा रही है, जिससे आम जनता को राहत मिल सकती है।
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ग्लोबल टेंशन कम होने के संकेत
इसके अलावा, तेल की लागत घटने से ट्रांसपोर्टेशन खर्च कम होगा, जिसका असर खाद्य पदार्थों और जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इससे देश में महंगाई पर नियंत्रण की उम्मीद बढ़ गई है।शेयर बाजार पर भी इस समझौते का सकारात्मक असर देखा गया है। ग्लोबल टेंशन कम होने के संकेत के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और सेंसेक्स-निफ्टी में मजबूती दर्ज की गई है। विदेशी निवेशकों (FPI) की वापसी की संभावना भी बढ़ी है, जो बाजार को और समर्थन दे सकती है।
वहीं, रुपये की स्थिति को भी इस फैसले से मजबूती मिलने की उम्मीद है। कच्चे तेल के दाम घटने से भारत का आयात बिल कम होगा, जिससे व्यापार घाटा घट सकता है और रुपये पर दबाव कम हो सकता है।कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान शांति समझौते और होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटने की उम्मीद है, जिसका सबसे बड़ा लाभ भारत जैसे आयात-निर्भर देशों को मिल सकता है।