आपने हमें कहां लाकर छोड़ा है? पीएम मोदी की अपील पर अरविंद केजरीवाल की प्रतिक्रिया, सरकार से किए तीन सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘कटौती’ वाली अपील के बाद, राजनीतिक गलियारों में हलचल शुरू हो गई थी। सबकी निगाहें इस पर टिकी थीं कि आखिर कोई इस पर क्या कहेगा। अब दिल्ली से आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सामने आकर इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। केजरीवाल ने एक प्रेस

May 12, 2026 - 17:30
आपने हमें कहां लाकर छोड़ा है? पीएम मोदी की अपील पर अरविंद केजरीवाल की प्रतिक्रिया, सरकार से किए तीन सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘कटौती’ वाली अपील के बाद, राजनीतिक गलियारों में हलचल शुरू हो गई थी। सबकी निगाहें इस पर टिकी थीं कि आखिर कोई इस पर क्या कहेगा। अब दिल्ली से आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सामने आकर इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। केजरीवाल ने एक प्रेस कांफ्रेंस में साफ कहा कि देशहित में जो भी मुश्किलें आएंगी, हम सहने को तैयार हैं, लेकिन उन्होंने पीएम मोदी के सामने अपनी तीन बड़ी गुजारिशें भी रख दीं।

केजरीवाल का कहना था कि देश वाकई एक बड़े आर्थिक संकट से गुज़र रहा है। इसी के चलते पीएम मोदी ने जनता से 7 कठोर कदम उठाने की अपील की है। इनमें वर्क फ्रॉम होम करने, सोने की खरीद बंद करने, तेल की बचत करने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने, खाद का कम इस्तेमाल करने, विदेशी उत्पादों से दूरी बनाने, खाद्य तेल में कमी लाने और विदेश यात्रा बंद करने जैसी बातें शामिल हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 1950 के बाद देश ने कई बड़े संकट झेले हैं। अलग-अलग देशों से युद्ध भी हुए और आर्थिक मंदी का दौर भी देखा, लेकिन आज तक किसी भी प्रधानमंत्री ने देशवासियों से इतने कड़े कदम उठाने की बात नहीं कही।

उन्होंने आगे कहा कि एक समय आया था जब लाल बहादुर शास्त्री ने भी देश के लोगों से अपील की थी। इंदिरा गांधी ने भी जनता से कहा था कि सोना न खरीदें। लेकिन इतनी कठोर अपील, एक साथ सात बड़े कदम उठाने की बात… यह सुनकर केजरीवाल ने कहा कि वे सदमे में हैं। ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई।

केजरीवाल के तीन सवाल

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी पहली गुजारिश रखते हुए कहा, “मेरी पहली गुजारिश है कि अगर आपने इतने कठोर कदम उठाने को कहा है, तो इसका सीधा मतलब है कि हमारी अर्थव्यवस्था का काफी बुरा हाल है। या फिर आने वाले समय में स्थिति और भी बिगड़ सकती है। देश यह जानना चाहता है कि हम आखिर कहां खड़े हैं? आपने हमें कहां लाकर छोड़ा है?” उन्होंने साफ कहा कि हम सब देशवासी देशभक्त हैं। कठोर से कठोर कदम भी उठाएंगे। अगर हमें और कठिनाइयां झेलनी पड़ीं, कुर्बानियां देनी पड़ीं, तो हम वो भी देंगे। लेकिन पता तो चले कि ये कदम क्यों उठाए जा रहे हैं। पता तो चले कि हमारी अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर क्या है। केवल आदेश दे देने से तो काम नहीं चलेगा। यह देश हम सबका है, 140 करोड़ लोगों का है। इसलिए प्रधानमंत्री से पहला निवेदन यह है कि स्पष्ट करें कि आज हमारी अर्थव्यवस्था की क्या स्थिति है और आने वाले समय में क्या स्थिति होगी। इसकी सारी जानकारी देश के लोगों के साथ साझा करें।

दूसरा निवेदन करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, “हम सब जानते हैं कि यह ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध की वजह से हो रहा है। इससे पूरी दुनिया प्रभावित है, सभी देशों पर इसका असर पड़ रहा है। हालांकि, किसी भी देश की सरकार ने ऐसे कदम उठाने की अपील नहीं की है। किसी ने एक-दो काम करने को कहे होंगे, लेकिन इतने गंभीर रूप से किसी ने कटौती करने की बात नहीं की। इससे शंका पैदा होती है कि कहीं स्थिति केवल इस युद्ध की वजह से बनी है या इसके और भी कारण हैं? इसलिए हमारा दूसरा निवेदन यह है कि इस सवाल का जवाब दें कि जो कदम किसी और देश ने नहीं उठाए, वो अकेले हमें उठाने की क्या जरूरत पड़ी?” यह सवाल आज हर किसी के मन में है।

तीसरी बात, केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि इसका सारा बोझ आखिर मिडिल क्लास पर ही क्यों डाला जा रहा है? विदेश मत जाओ, विदेशी चीजें मत खरीदो, सोना मत खरीदो, तेल मत खरीदो… ये सारे नियम केवल मध्यमवर्गीय लोगों पर ही क्यों लागू हैं? मिडिल क्लास देशभक्त है। जरूरत पड़ेगी तो देश के लिए किसी भी हद तक जाएंगे, लेकिन केवल मिडिल क्लास ही क्यों? अगर किसी को सबसे पहले कुर्बानी देनी चाहिए थी, तो वह देश की सरकार को। उन्हें अपने खर्चों पर पहले कटौती करनी चाहिए थी। प्रधानमंत्री और सभी मंत्रियों को मिलकर कटौती करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। सब घूम रहे हैं, विदेश जा रहे हैं, गाड़ियां और हवाई जहाज भी खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। तो फिर केवल हम ही क्यों करें? यह सवाल आज हर आम आदमी पूछ रहा है।