मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला! MP में वनकर्मियों पर नहीं होगी सीधे FIR, ड्यूटी में गोली चलाने पर पहले होगी मजिस्ट्रियल जांच

मध्य प्रदेश सरकार ने वनकर्मियों को लेकर बड़ा फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ड्यूटी के दौरान हथियार चलाने वाले वनकर्मी पर सीधे आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जा सकेगा। पहले यह जांच होगी कि गोली चलाने की जरूरत क्यों पड़ी और क्या उस समय हथियार का इस्तेमाल उचित था। जांच में गलती मिलने

Aug 8, 2026 - 08:30
मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला! MP में वनकर्मियों पर नहीं होगी सीधे FIR, ड्यूटी में गोली चलाने पर पहले होगी मजिस्ट्रियल जांच

मध्य प्रदेश सरकार ने वनकर्मियों को लेकर बड़ा फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ड्यूटी के दौरान हथियार चलाने वाले वनकर्मी पर सीधे आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जा सकेगा। पहले यह जांच होगी कि गोली चलाने की जरूरत क्यों पड़ी और क्या उस समय हथियार का इस्तेमाल उचित था। जांच में गलती मिलने और रिपोर्ट सरकार द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद ही पुलिस कार्रवाई कर सकेगी।

दरअसल नई व्यवस्था का मकसद वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान अनावश्यक कानूनी कार्रवाई से बचाना है। जंगलों में वनकर्मियों को कई बार तस्करों, अतिक्रमणकारियों या दूसरे गंभीर हालात का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में अपनी सुरक्षा के साथ वन भूमि, वन संपदा और वन्यजीवों को बचाने के लिए हथियार का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। सरकार ने इसी तरह की परिस्थितियों को देखते हुए हर गोली चलने की घटना की जांच को जरूरी बनाया है। यानी कार्रवाई पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई गई है, बल्कि पुलिस कार्रवाई से पहले जांच का एक चरण तय किया गया है।

वनकर्मियों की गोलीबारी पर पहले होगी मजिस्ट्रियल जांच

वहीं नई व्यवस्था में हथियार चलाने की हर घटना की जांच उस इलाके के अधिकार क्षेत्र वाले कार्यपालिक दंडाधिकारी यानी एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट से कराई जाएगी। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि वनकर्मी किस परिस्थिति में मौजूद था, उसके सामने क्या स्थिति थी और हथियार चलाना वास्तव में जरूरी था या नहीं। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि हथियार का इस्तेमाल नियमों के मुताबिक किया गया या किसी गलत इरादे से किया गया।

दरअसल अगर जांच में सामने आता है कि वनकर्मी ने अपनी ड्यूटी निभाते हुए जरूरी और उचित स्थिति में हथियार चलाया था और इसमें कोई अनावश्यकता या दुर्भावना नहीं थी, तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी। वहीं, यदि जांच में यह सामने आता है कि गोली चलाने का फैसला गलत था या हथियार का इस्तेमाल अनुचित तरीके से किया गया, तो मामला आगे बढ़ सकता है। हालांकि इसके लिए जांच रिपोर्ट को राज्य सरकार द्वारा स्वीकार किया जाना भी जरूरी होगा। इसके बाद ही पुलिस FIR, गिरफ्तारी या दूसरी आपराधिक कार्रवाई कर सकेगी। इस व्यवस्था से एक तरफ वनकर्मियों को ड्यूटी के दौरान कानूनी सुरक्षा मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ हथियार के गलत इस्तेमाल की शिकायतों की जांच का रास्ता भी खुला रहेगा।

लटेरी गोलीकांड के बाद फिर चर्चा में आया था वनकर्मियों की फायरिंग का मुद्दा

दरअसल वन विभाग की टीम द्वारा ड्यूटी के दौरान हथियार चलाने और उसके बाद होने वाली पुलिस कार्रवाई का मुद्दा विदिशा के लटेरी गोलीकांड के बाद काफी चर्चा में आया था। 9 अगस्त 2022 को लटेरी क्षेत्र के खटयापुरा जंगल में लकड़ी तस्करी रोकने गई वन विभाग की टीम और ग्रामीणों के बीच विवाद हुआ था। वनकर्मियों का कहना था कि टीम पर पथराव किया गया था, जबकि ग्रामीणों की ओर से आरोप लगाया गया था कि वनकर्मियों ने गोली चलाई। घटना में आदिवासी युवक चैन सिंह की मौत हुई थी और तीन अन्य लोग घायल हुए थे।

वहीं घटना के बाद डिप्टी रेंजर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था और उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने न्यायिक जांच आयोग बनाने का फैसला लिया था। आयोग को यह पता लगाना था कि विवाद की शुरुआत कैसे हुई, वनकर्मियों ने किस परिस्थिति में बल का इस्तेमाल किया और गोली चलाने का फैसला सही था या नहीं। आयोग को जिम्मेदारी तय करने की दिशा में भी जांच करनी थी। उसकी रिपोर्ट के लिए तय समय सीमा को बाद में कई बार बढ़ाया गया।

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।