महिला दिवस पर सीएम रेखा गुप्ता का बड़ा तोहफा, अनाथ युवाओं के लिए ‘आफ्टरकेयर स्कीम’ दी मंजूरी, जानें क्या है यह योजना

मातृ दिवस के पावन अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उन युवाओं को स्नेह भरा तोहफा दिया है, जो 18 साल की उम्र के बाद चाइल्ड केयर संस्थानों से बाहर निकलते ही जीवन की नई चुनौतियों के भंवर में फंस जाते हैं। दिल्ली सरकार ने ऐसे अनाथ और जरूरतमंद युवाओं की देखभाल के

May 10, 2026 - 18:30
महिला दिवस पर सीएम रेखा गुप्ता का बड़ा तोहफा, अनाथ युवाओं के लिए ‘आफ्टरकेयर स्कीम’ दी मंजूरी, जानें क्या है यह योजना

मातृ दिवस के पावन अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उन युवाओं को स्नेह भरा तोहफा दिया है, जो 18 साल की उम्र के बाद चाइल्ड केयर संस्थानों से बाहर निकलते ही जीवन की नई चुनौतियों के भंवर में फंस जाते हैं। दिल्ली सरकार ने ऐसे अनाथ और जरूरतमंद युवाओं की देखभाल के लिए एक दूरगामी ‘आफ्टरकेयर स्कीम’ को मंजूरी दे दी है, जिसकी भनक लगते ही उन हजारों युवाओं के चेहरों पर उम्मीद की एक नई किरण जगमगा उठी है। सरकार की मंशा साफ है: पढ़ाई, नौकरी और आर्थिक मदद देकर इन युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना, ताकि वे समाज में सिर उठाकर जी सकें।

रविवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संस्थागत देखभाल छोड़ने वाले युवाओं के लिए इस ‘आफ्टरकेयर स्कीम फॉर यंग पर्सन्स’ की विधिवत घोषणा की। इस योजना का मुख्य मकसद उन युवाओं को एक मजबूत सहारा देना है, जो 18 साल की दहलीज पार करते ही अपने संरक्षण संस्थानों से बाहर कदम रखते हैं और फिर अकेले ही जिंदगी की राह पर संघर्ष करते नजर आते हैं। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर दिल छू लेने वाली बात कही कि सरकार का लक्ष्य केवल बच्चों को संरक्षण देना नहीं है, बल्कि उन्हें एक ऐसा सुरक्षित और सक्षम भविष्य देना है, जहां वे खुद को कभी अकेला या असहाय महसूस न करें। उन्होंने जोर देकर कहा, “कोई भी बच्चा बालिग होने के बाद खुद को अकेला न समझे, सरकार उसका साथ नहीं छोड़ेगी।” यह बयान उन हजारों बच्चों के लिए एक बड़ा आश्वासन है, जिन्हें अक्सर 18 साल की उम्र के बाद खुद को बेसहारा महसूस करना पड़ता है।

योजना के लिए 3.5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट

इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 3.5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट तय किया गया है, जो सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस बजट के तहत, जरूरत के हिसाब से युवाओं की पहचान की जाएगी और फिर उनकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार अलग-अलग प्लान तैयार किए जाएंगे। इसका सीधा फायदा यह होगा कि हर युवा को सही समय पर सही मदद मिल सकेगी, जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल होगा। मातृ दिवस पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लाजपत नगर स्थित विलेज कॉटेज होम का दौरा भी किया। वहां उन्होंने बच्चों से आत्मीयता से मुलाकात की, उनका हाल जाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उनकी यह यात्रा बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।

दिल्ली में इस समय 88 चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशंस (सीसीआई) सक्रिय हैं, जिनका संचालन सरकार और गैर-सरकारी संस्थाएं मिलकर करती हैं। इन संस्थानों में 18 साल तक के बच्चों को रहने, पढ़ने, सुरक्षा और अन्य सभी जरूरी सुविधाएं मिलती हैं। इसके अलावा, दो आफ्टरकेयर होम भी हैं, जिनमें एक लड़कों और दूसरा लड़कियों के लिए है, जहां 18 साल से ऊपर के युवाओं को सीमित समय के लिए सहारा दिया जाता है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, हर साल लगभग 150 से 200 युवा 18 साल की उम्र के बाद इन संस्थानों से बाहर आते हैं। संस्थान के भीतर उन्हें भरपूर मदद मिलती है, लेकिन बाहर निकलने के बाद उच्च शिक्षा जारी रखना, नौकरी ढूंढना, रहने की व्यवस्था करना और आर्थिक समस्याओं से जूझना उनके लिए पहाड़ जैसी चुनौती बन जाती है। कई बार तो उन्हें परिवार का सहारा भी नहीं मिल पाता, जिससे वे बिल्कुल अकेले पड़ जाते हैं। इन्हीं गंभीर चुनौतियों को देखते हुए यह नई योजना तैयार की गई है, जो इन युवाओं के जीवन में एक बड़ा बदलाव लाएगी।

युवाओं को कॉलेज और व्यावसायिक पढ़ाई जारी रखने के लिए समर्थन

इस योजना के तहत, युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए हरसंभव सहायता दी जाएगी, ताकि वे कॉलेज या अन्य व्यावसायिक पढ़ाई जारी रख सकें और अपने सपनों को पूरा कर सकें। साथ ही, स्किल डेवलपमेंट और व्यावसायिक प्रशिक्षण के जरिए उन्हें रोजगार के लिए पूरी तरह से तैयार किया जाएगा, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। योजना में इंटर्नशिप और नौकरी के अवसरों से जोड़ने पर भी खास जोर रहेगा, ताकि उन्हें सीधे कार्यबल में शामिल होने का मौका मिले। आर्थिक मदद के रूप में मासिक स्टाइपेंड देने का प्रावधान किया गया है, जिससे शुरुआती दौर में उन्हें आर्थिक राहत मिल सके और वे बिना किसी चिंता के आगे बढ़ सकें। इसके अलावा, काउंसलिंग, मेंटरिंग, करियर गाइडेंस और भावनात्मक सहयोग भी दिया जाएगा, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ सकें और किसी भी चुनौती का सामना कर सकें। जरूरत पड़ने पर युवाओं को इमरजेंसी सहायता और केस-आधारित मदद भी मिलेगी। सरकार का मानना है कि हर युवा की स्थिति अलग होती है, इसलिए योजना को लचीला रखा गया है ताकि जरूरत के हिसाब से सहायता दी जा सके।

राज्य और जिला स्तर पर मजबूत निगरानी व्यवस्था

योजना के बेहतर संचालन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य और जिला स्तर पर एक मजबूत निगरानी व्यवस्था भी बनाई जाएगी। राज्य स्तर पर महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में स्टेट आफ्टरकेयर कमेटी गठित होगी, जो योजना की निगरानी और नीतिगत फैसले लेगी। वहीं, जिला स्तर पर जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में कमेटियां बनेंगी, जो युवाओं की जरूरतों का आकलन कर उन्हें सहायता देने की सिफारिश करेंगी, जिससे मदद सीधे और प्रभावी ढंग से उन तक पहुंच सके। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार अलग-अलग विभागों और संस्थाओं के साथ मिलकर इन युवाओं को रोजगार, इंटर्नशिप और आजीविका के अवसरों से जोड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह योजना केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को जीवन में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास और एक स्थायी भविष्य देना है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन के अंत में एक मार्मिक बात कही। उन्होंने कहा कि मातृ दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हर बच्चे को सुरक्षा और अपनापन मिलना चाहिए। सरकार का यह प्रयास है कि संस्थानों से बाहर आने के बाद भी कोई युवा खुद को अकेला महसूस न करे और हर किसी को बेहतर भविष्य बनाने का सुनहरा मौका मिले। यह योजना लाखों बच्चों के जीवन में एक नया सवेरा लाएगी।