G7 Summit में महाशक्तियों का माइंड गेम: क्या पुतिन की जगह लेंगे पीएम मोदी? जानें कोल्ड वॉर और G8 की वापसी का इनसाइड डिकोड

G7 Summit 2026 में करीब डेढ़ साल बाद मिले पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप। लेकिन मुलाकात में दिखी ‘कोल्ड वॉर’ जैसी असहजता। जानें कैसे फ्रांस ने मोदी को पुतिन की पुरानी कुर्सी पर बिठाकर दुनिया को G8 की वापसी का बड़ा संकेत दे दिया है।

Jun 17, 2026 - 16:30
G7 Summit में महाशक्तियों का माइंड गेम: क्या पुतिन की जगह लेंगे पीएम मोदी? जानें कोल्ड वॉर और G8 की वापसी का इनसाइड डिकोड

Evian: फ्रांस के एवियन में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) से वैश्विक राजनीति की एक ऐसी इनसाइड स्टोरी सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया के कूटनीतिज्ञों को हैरान कर दिया है। करीब डेढ़ साल के लंबे इंतजार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आमने-सामने की मुलाकात तो हुई, लेकिन इस मुलाकात की गर्मजोशी के पीछे एक गहरा सन्नाटा और ‘कोल्ड वॉर’ (शीत युद्ध) जैसा माइंड गेम साफ दिखाई दिया।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दोनों देशों के बीच आई कड़वाहट का असर नेताओं के हाव-भाव में साफ दिखा। मगर इस असहजता से इतर, सबसे बड़ी चर्चा उस ‘कुर्सी’ की हो रही है, जिस पर बैठकर पीएम मोदी ने दुनिया को एक नया संदेश दिया है।

पुतिन की पुरानी जगह पर मोदी! क्या बनने जा रहा है नया G8?

इस समिट का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला टर्निंग पॉइंट था नेताओं का ‘सिटिंग अरेंजमेंट’ (बैठने की व्यवस्था)। फ्रांस ने गैर-स्थायी सदस्य होने के बावजूद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ठीक बगल वाली वीआईपी कुर्सी दी। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में यह जगह कभी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हुआ करती थी, जब यह ‘G8’ ग्रुप हुआ करता था। साल 2014 में क्रीमिया पर कब्जे के बाद रूस को इस एलीट ग्रुप से बाहर कर दिया गया था।

नियम के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति के एक तरफ मेजबान देश का राष्ट्राध्यक्ष होता है और दूसरी तरफ सबसे ताकतवर देश का नेता। ट्रंप के बगल में मोदी को बिठाकर फ्रांस ने यह संकेत दे दिया है कि क्या भारत अब पुतिन की जगह लेकर इस ग्रुप को फिर से ‘G8’ बनाने जा रहा है?

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फोटोशूट का ‘ईगो क्लैश’: जब दोनों ने एक-दूसरे को किया इग्नोर

फैमिली फोटोशूट के दौरान मोदी और ट्रंप के बीच का ‘ईगो क्लैश’ साफ नजर आया। दोनों नेताओं ने शुरुआत में एक-दूसरे को पूरी तरह इग्नोर करने की कोशिश की। दोनों के बीच यह साफ दिख रहा था कि हाथ आगे बढ़ाने या बातचीत शुरू करने की पहल पहले कौन करे। हालांकि, इस बीच ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कुछ ऐसा किया जिसने सबको चौंका दिया। स्टार्मर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पूरी तरह ‘बाइपास’ (नजरअंदाज) करते हुए सीधे पीएम मोदी की तरफ कदम बढ़ाए और उन्हें गले लगा लिया। ब्रिटेन के पीएम का भारत की तरफ यह झुकाव वहां मौजूद सभी वैश्विक नेताओं के लिए एक बड़ा सरप्राइज था।

बिना गले मिले हाथ मिलाया, इंटरप्रेटर के सामने हुईं सीक्रेट बातें

फोटोशूट खत्म होने के बाद जब नेता मुख्य हॉल की तरफ बढ़े, तो ट्रंप पहले ही अपनी सीट पर बैठ चुके थे। चूंकि पीएम मोदी की सीट ट्रंप के ठीक बगल में थी, इसलिए मोदी ने पीछे से आते हुए आखिरकार खुद पहल की और ट्रंप की तरफ हाथ बढ़ाया। दोनों ने हाथ तो मिलाया, लेकिन पुरानी मुलाकातों की तरह वे गले नहीं मिले। समिट की औपचारिक शुरुआत से पहले दोनों के बीच कुछ मिनट बेहद ‘प्राइवेट’ बातचीत हुई।

इस गोपनीय बातचीत में दोनों के इंटरप्रेटर (अनुवादक) के अलावा कोई तीसरा शामिल नहीं था। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने इस दौरान ओमान की खाड़ी में कमर्शियल जहाजों पर हुए हालिया हमलों और उसमें भारतीय नाविकों की मौत का गंभीर मुद्दा ट्रंप के सामने प्रमुखता से उठाया।

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ट्रंप की नीतियों पर मोदी का सीधा तंज

मुलाकात की इस तल्खी के बीच पीएम मोदी ने समिट के मुख्य संबोधन में अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ और संरक्षणवादी नीतियों पर बिना नाम लिए बड़ा कटाक्ष किया। पीएम मोदी ने वैश्विक मंच से कहा, “आज की आधुनिक दुनिया में सबसे अहम रणनीतिक संपत्ति (Strategic Asset) न तो खनिज हैं, न कोई आधुनिक तकनीक और न ही कोई बड़ा बाजार, बल्कि ‘आपसी भरोसा’ है।” मोदी का यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका की वर्तमान नीतियों पर एक बड़ा कूटनीतिक तंज माना जा रहा है, जिसने एवियन समिट के माहौल को और अधिक गर्मा दिया है।

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