गुना में दूषित पेयजल से बिगड़े हालात, कई बच्चे बीमार: उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा, उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
उमंग सिंघार ने गुना जिले में दूषित पेयजल की आपूर्ति से कई बच्चों के बीमार पड़ने की घटना को गंभीर जनस्वास्थ्य संकट बताते हुए राज्य की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में जल संकट अब सिर्फ असुविधा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह स्वास्थ्य आपदा का रूप लेता
उमंग सिंघार ने गुना जिले में दूषित पेयजल की आपूर्ति से कई बच्चों के बीमार पड़ने की घटना को गंभीर जनस्वास्थ्य संकट बताते हुए राज्य की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में जल संकट अब सिर्फ असुविधा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह स्वास्थ्य आपदा का रूप लेता जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि गुना के बूढ़े बालाजी क्षेत्र में दूषित पानी की सप्लाई के कारण डेढ़ दर्जन से अधिक बच्चे बीमार हो गए हैं और उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। दूषित पेयजल से उपजे संकट पर सवाल उठाते हुए उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
गुना घटना पर उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश में बढ़ते जल संकट और दूषित पेयजल की समस्या को लेकर राज्य सरकार पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने गुना जिले की घटना पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि “इंदौर के भागीरथपुरा और अन्य क्षेत्रों में दूषित पानी से हुई मौतों तथा स्वास्थ्य संकट की घटनाओं के बावजूद सरकार कोई सबक लेने को तैयार नहीं दिख रही है। बार-बार चेतावनियां मिलने के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है।”
जांच और कार्रवाई की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि “एक तरफ सरकार ‘हर घर जल’ के बड़े-बड़े दावे कर रही है, दूसरी तरफ लोगों को स्वच्छ पेयजल तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। आखिर जनता को गंदा और संक्रमित पानी पीने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है?” उन्होंने कहा कि जब पीने का पानी ही बीमारी और मौत का कारण बन जाए तो यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है। उमंग सिंघार ने गुना मामले की उच्च स्तरीय जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पूरे प्रदेश में पेयजल गुणवत्ता की व्यापक समीक्षा की मांग की है।
बता दें कि मध्यप्रदेश के कई जिलों में इस वर्ष जल संकट की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। गर्मी के मौसम में भूजल स्तर में गिरावट, जल स्रोतों का सूखना, पुरानी पेयजल पाइपलाइनें और जल प्रबंधन की कमजोर व्यवस्था लोगों की परेशानी को बढ़ा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी इलाकों में भी पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं।