MP शिक्षक भर्ती 2025 में NIOS D.El.Ed पर नया विवाद, दस्तावेज सत्यापन रुका, भोपाल में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन
मध्य प्रदेश की प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 एक बार फिर चर्चा में है। इस बार विवाद भर्ती परीक्षा या मेरिट सूची को लेकर नहीं, बल्कि दस्तावेज सत्यापन के दौरान NIOS D.El.Ed (2017-19) डिग्री की मान्यता को लेकर सामने आया है। भर्ती प्रक्रिया के अंतिम चरण तक पहुंच चुके कई चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि
मध्य प्रदेश की प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 एक बार फिर चर्चा में है। इस बार विवाद भर्ती परीक्षा या मेरिट सूची को लेकर नहीं, बल्कि दस्तावेज सत्यापन के दौरान NIOS D.El.Ed (2017-19) डिग्री की मान्यता को लेकर सामने आया है। भर्ती प्रक्रिया के अंतिम चरण तक पहुंच चुके कई चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि अब उनकी डिग्री को अमान्य बताकर दस्तावेज सत्यापन रोक दिया गया है। इससे हजारों युवाओं के सामने नौकरी मिलने का सपना अधर में लटक गया है।
गुरुवार को प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी भोपाल पहुंचे और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि जब इसी डिग्री के आधार पर पहले शिक्षक भर्ती में नियुक्तियां दी जा चुकी हैं, तो अब उसी डिग्री को अमान्य बताना समझ से परे है। अभ्यर्थियों ने मांग की है कि दस्तावेज सत्यापन जल्द पूरा कराया जाए ताकि नियुक्ति प्रक्रिया बिना किसी देरी के आगे बढ़ सके।
क्या है पूरा मामला?
MP शिक्षक भर्ती 2025 के तहत चयनित कई अभ्यर्थियों का आरोप है कि दस्तावेज सत्यापन के दौरान उनकी NIOS D.El.Ed (2017-19) डिग्री को स्वीकार नहीं किया जा रहा। कुछ जिला शिक्षा कार्यालयों में उनके दस्तावेजों पर होल्ड या अपात्र लिखकर प्रक्रिया रोक दी गई है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यह फैसला उन्हें हैरान करने वाला है, क्योंकि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से पहले जारी नियमों में कहीं भी इस डिग्री को अमान्य नहीं बताया गया था। उन्होंने भर्ती परीक्षा पास की, मेरिट में स्थान बनाया और दस्तावेज सत्यापन तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चरण में नई आपत्ति सामने आने से उनकी नियुक्ति अटक गई है।
भोपाल पहुंचे अभ्यर्थियों ने डीपीआई आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
समस्या के समाधान की मांग को लेकर प्रदेश के कई जिलों से अभ्यर्थी भोपाल पहुंचे। उन्होंने लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि उनकी NIOS D.El.Ed डिग्री को वैध मानते हुए दस्तावेज सत्यापन पूरा कराया जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे सभी भर्ती की निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। अब यदि अंतिम समय में डिग्री पर सवाल उठाए जाते हैं, तो इससे उनकी वर्षों की मेहनत बेकार हो जाएगी।
अभ्यर्थियों का दावा- NIOS D.El.Ed डिग्री पूरी तरह वैध है
शाजापुर के अभ्यर्थी रामस्वरूप मेवाड़ ने बताया कि उन्होंने प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में चयन हासिल किया है। उनका कहना है कि वर्ष 2017 से 2019 के बीच कराई गई NIOS D.El.Ed भारत सरकार की पहल के तहत संचालित कार्यक्रम था और इसे संबंधित संस्थाओं की मंजूरी प्राप्त थी।
अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि इस डिग्री की वैधता को लेकर पहले भी विभिन्न न्यायालयों में सुनवाई हो चुकी है। उनके अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय और कुछ उच्च न्यायालयों के फैसलों में इस डिग्री को मान्यता मिलने का उल्लेख किया गया है। इसी आधार पर वे विभाग से मांग कर रहे हैं कि बिना किसी स्पष्ट लिखित आदेश के उनकी डिग्री को अमान्य न माना जाए।
एक जिले में सत्यापन, दूसरे में होल्ड
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि डिग्री अमान्य है, तो कुछ जिलों में उसी डिग्री के आधार पर दस्तावेज सत्यापन कैसे पूरा हो गया? और यदि डिग्री मान्य है, तो दूसरे जिलों में अभ्यर्थियों को “होल्ड” या “अपात्र” क्यों लिखा जा रहा है?
अभ्यर्थियों का कहना है कि अलग-अलग जिलों में अलग-अलग तरीके से काम होने के कारण चयनित उम्मीदवार असमंजस में हैं। उनका आरोप है कि कई अधिकारियों के पास ऐसा कोई लिखित आदेश भी नहीं है, जिसमें NIOS D.El.Ed (2017-19) को अमान्य बताया गया हो।
अब क्यों बदला फैसला?
अभ्यर्थियों ने अपने ज्ञापन में यह भी सवाल उठाया है कि वर्ष 2020 की शिक्षक भर्ती में इसी NIOS D.El.Ed डिग्री के आधार पर कई उम्मीदवारों को नियुक्ति दी गई थी। वे आज भी सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
ऐसे में वर्तमान भर्ती में उसी डिग्री को लेकर आपत्ति उठना अभ्यर्थियों को समझ नहीं आ रहा। उनका कहना है कि यदि पहले यह डिग्री स्वीकार की गई थी, तो अब बिना किसी नई अधिसूचना या स्पष्ट आदेश के इसे अस्वीकार करना उचित नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर अभ्यर्थी विभाग से लिखित स्पष्टीकरण भी मांग रहे हैं, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।