तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से की मुलाकात, बागी सांसदों के विलय को बताया असंवैधानिक

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने शुक्रवार को अपने 20 बागी सांसदों की अयोग्यता की मांग को लेकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से भेंट की। इस दौरान पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इन सांसदों के एक नई पार्टी में विलय को असंवैधानिक करार दिया। उनके साथ वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी, डेरेक ओ’ब्रायन, महुआ मोइत्रा और

Jun 19, 2026 - 20:30
तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से की मुलाकात, बागी सांसदों के विलय को बताया असंवैधानिक

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने शुक्रवार को अपने 20 बागी सांसदों की अयोग्यता की मांग को लेकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से भेंट की। इस दौरान पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इन सांसदों के एक नई पार्टी में विलय को असंवैधानिक करार दिया। उनके साथ वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी, डेरेक ओ’ब्रायन, महुआ मोइत्रा और सौगत राय भी मौजूद रहे।

अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर बिरला को 20 बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की मांग करते हुए 20 अलग-अलग याचिकाएं सौंपीं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से स्पष्ट रूप से कहा कि कोई भी सांसद अपने आप किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकता है। ऐसा करने पर उन्हें सदन की सदस्यता से अयोग्य करार दिया जाना चाहिए। बनर्जी ने अपनी बात रखते हुए न्याय की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि लोकसभा अध्यक्ष हमें न्याय प्रदान करेंगे।’

अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग उठाई

स्पीकर से मुलाकात के उपरांत अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि जिन बागी सांसदों ने ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) नामक एक कम जानी-मानी पार्टी में शामिल होने का दावा किया है, उन्हें पार्टी छोड़ने के आधार पर सदन की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 20 सांसदों ने स्पीकर से मिलकर दावा किया था कि उन्हें एक अलग समूह माना जाए। बाद में यह जानकारी सामने आई कि उन सांसदों ने एनसीपीआई में शामिल होने का दावा किया है, जिसका नाम किसी ने नहीं सुना है, यहां तक कि उन सांसदों ने भी पहले इस पार्टी का नाम नहीं सुना होगा।

अभिषेक बनर्जी ने संविधान की 10वीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा कि यह स्पष्ट करती है कि यदि कोई सदस्य स्वेच्छा से अपनी मूल पार्टी की सदस्यता छोड़ता है, तो वह सांसद के तौर पर अयोग्य हो जाता है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई सदस्य किसी चुनाव चिह्न पर चुना गया है और दो साल बाद यह दावा करता है कि वह एक नई पार्टी में शामिल हो रहा है, तो उसकी संसद सदस्यता समाप्त हो जानी चाहिए। बनर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि दो-तिहाई सदस्यों के किसी दूसरी पार्टी में विलय का नियम पूरी पार्टी पर लागू होता है, न कि केवल विधायी दल पर। उन्होंने कहा, “इसी आधार पर, टीएमसी के लोकसभा नेता के तौर पर मैंने उन सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की 20 अलग-अलग याचिकाएं सौंपी हैं।”

स्पीकर ने अभिषेक बनर्जी को अपना पक्ष रखने के लिए किया था आमंत्रित

उल्लेखनीय है कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने टीएमसी के लोकसभा नेता अभिषेक बनर्जी को इस पूरे मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए आमंत्रित किया था। यह आमंत्रण तब दिया गया, जब 20 बागी तृणमूल कांग्रेस सांसदों ने एनसीपीआई के साथ विलय के बाद खुद को एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। स्पीकर इस मांग पर निर्णय लेने से पूर्व सभी पक्षों को सुनना चाहते थे। अभिषेक बनर्जी ने गत सप्ताह भी स्पीकर को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ का अलग गुट होने का दावा करने वाले किसी भी समूह को कोई मान्यता, दर्जा या सुविधा न दी जाए। उन्होंने अपने पत्र में तर्क दिया था कि संविधान और दलबदल विरोधी कानून किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर एक अलग समूह बनाने की अनुमति नहीं देते हैं। यह टीएमसी का दृढ़ मत है कि इन बागी सांसदों का कदम असंवैधानिक है और उन्हें तुरंत अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।