TMC में मतभेद की खबरों के बीच अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा स्पीकर को लिखा पत्र, जानिए क्या है कारण?
पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों गहमागहमी बनी हुई है। दरअसल तृणमूल कांग्रेस के भीतर कथित मतभेद और टूट की अटकलों के बीच पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एक बार फिर विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है। वहीं अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस को यह पत्र भेजा है। उन्होंने इसमें नेता प्रतिपक्ष
पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों गहमागहमी बनी हुई है। दरअसल तृणमूल कांग्रेस के भीतर कथित मतभेद और टूट की अटकलों के बीच पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एक बार फिर विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है। वहीं अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस को यह पत्र भेजा है। उन्होंने इसमें नेता प्रतिपक्ष (LoP) की नियुक्ति को लेकर पार्टी के रुख को दोहराया है। अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति एक स्थापित परंपरा है। पार्टी जिस व्यक्ति को नामित करती है, अध्यक्ष उसी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा प्रदान करते हैं। बनर्जी ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त करने के पार्टी के फैसले को दोहराया है। इस पत्र के सामने आने के बाद टीएमसी में मतभेद की अटकलों को एक बार फिर हवा मिली है। पार्टी ने दो विधायकों रितब्रता बनर्जी और संदीपन साहा को पहले ही निष्कासित कर दिया है।
दरअसल तृणमूल कांग्रेस के दो विधायक, कुणाल घोष और आशिमा पात्रा, ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपने का प्रयास किया। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि अध्यक्ष बोस के कार्यालय में अनुपस्थित रहने के कारण, उनके कार्यालय सचिव ने पत्र लेने से इनकार कर दिया। सचिव ने बताया कि उन्हें टीएमसी से कोई भी पत्र न लेने के मौखिक निर्देश मिले हैं। कुणाल घोष ने इस स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कल तक विधानसभा अध्यक्ष उनके पत्र स्वीकार कर रहे थे। आज अज्ञात कारणों से कार्यालय ने पत्र लेना बंद कर दिया है। घोष ने सवाल किया कि दो विधायकों का आधिकारिक पत्र कैसे अस्वीकार किया जा सकता है। उन्होंने इस रवैये को लोकतंत्र के संरक्षक के रूप में अध्यक्ष की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगाया। घोष ने कहा कि क्या यह कोई मजाक है।
विधानसभा अध्यक्ष को इसे ईमेल किया गया
दरअसल पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पत्र सौंपे जाने में नाकाम रहने के बाद विधानसभा अध्यक्ष को इसे ईमेल किया गया। अभिषेक बनर्जी द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में आशिमा पात्रा को विधानसभा उपाध्यक्ष और फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक के रूप में नामित किया गया है। पत्र में अध्यक्ष से दशकों से चली आ रही विधानसभा की परंपरा के आधार पर इन पदों को मान्यता देने का अनुरोध किया गया है। अभिषेक बनर्जी ने 2001 के उस उदाहरण का हवाला दिया है, जब तत्कालीन अध्यक्ष हाशिम अब्दुल हलीम ने टीएमसी की सिफारिश पर पंकज बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी थी। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया 2006, 2011, 2016 और 2021 के राज्य चुनावों के बाद भी जारी रही है।
पत्र में 2021 के उदाहरण का भी जिक्र किया
वहीं अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में 2021 के उदाहरण का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि 2021 में, भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी के नाम को विपक्ष के नेता के रूप में प्रस्तावित किया था, जिसे तत्कालीन अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया था। उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और विपक्ष के नेता नामित किए गए चट्टोपाध्याय द्वारा 15 मई को विधानसभा में अध्यक्ष के चुनाव के बाद उनका हाथ पकड़कर उन्हें उनकी कुर्सी तक ले जाने की परंपरा का भी उल्लेख किया है। बनर्जी ने इस बात पर जोर दिया कि अध्यक्ष ने सदन में चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता के रूप में पहले ही मान्यता दे दी है। उन्होंने अध्यक्ष का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि उन्होंने चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता के रूप में भाषण देने के लिए आमंत्रित किया था। भाजपा के वरिष्ठ मंत्री तपस रॉय ने इस आधार पर पत्र की वैधता पर सवाल उठाया है कि इस पर निर्वाचित टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षर नहीं हैं।