ममता बनर्जी को फिर लगा झटका, टीएमसी जिलाध्यक्ष आशीष बनर्जी ने पद से दिया इस्तीफा, जानिए क्या है कारण?
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह का दौर लगातार गहराता जा रहा है। दरअसल ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका लगा है, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और बीरभूम जिलाध्यक्ष आशीष बनर्जी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब राज्य में
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह का दौर लगातार गहराता जा रहा है। दरअसल ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका लगा है, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और बीरभूम जिलाध्यक्ष आशीष बनर्जी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब राज्य में टीएमसी के भीतर टूट की खबरें लगातार चर्चा में हैं और पार्टी को संगठनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
दरअसल आशीष बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में अपनी सीट गंवाने के बाद यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है। उन्होंने अपने इस निर्णय के बारे में तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को जानकारी दे दी है। आशीष बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं, जिससे उनके इस्तीफे का राजनीतिक गलियारों में विशेष महत्व माना जा रहा है। काकोली घोष दस्तीदार के बाद आशीष बनर्जी दूसरे जिलाध्यक्ष होंगे, जिन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया है, जो पार्टी के लिए चिंता का विषय है।
क्या है इस्तीफे के पीछे की वजह?
वहीं इस बार के विधानसभा चुनाव में बीरभूम जिले की कुल 11 सीटों में से तृणमूल कांग्रेस केवल 5 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने 6 सीटों पर कब्जा किया। यह प्रदर्शन साल 2021 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले काफी कमजोर रहा, जब तृणमूल कांग्रेस ने बीरभूम की 10 सीटों पर जीत हासिल की थी और भाजपा को केवल एक सीट मिली थी। चुनाव में मिली इस हार को आशीष बनर्जी के इस्तीफे की एक बड़ी वजह माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने सीट गंवाने के बाद यह कदम उठाया है।
पार्टी नहीं छोड़ रहे हैं आशीष बनर्जी
हालांकि, आशीष बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वह पार्टी नहीं छोड़ रहे हैं और तृणमूल कांग्रेस के एक सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर काम करते रहेंगे। उनका यह बयान उन अटकलों पर विराम लगाता है कि वह किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल हो सकते हैं। बनर्जी ने लावपुर से विधायक रह चुके अभिजीत सिन्हा के विचारों से सहमति व्यक्त की है, जिन्होंने बीरभूम जिला कोर कमेटी पर विधानसभा चुनाव के दौरान अपने राजनीतिक कर्तव्यों का सही ढंग से पालन न करने का आरोप लगाते हुए उसकी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। आशीष बनर्जी और अभिजीत सिन्हा दोनों को हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।
सांसद काकोली घोष ने भी दिया था इस्तीफा
दरअसल आशीष बनर्जी से पहले, बारासात से लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने भी बारासात जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने केवल जिलाध्यक्ष पद ही नहीं, बल्कि पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों को भी छोड़ दिया था। काकोली घोष ने भी सुब्रत बख्शी को पत्र लिखकर अपने फैसले से अवगत कराया था। काकोली घोष दस्तीदार का इस्तीफा भी पार्टी के भीतर चल रही खींचतान का परिणाम था। उनकी नाराजगी की मुख्य वजह उन्हें लोकसभा में मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के पद से हटाया जाना था। ममता बनर्जी ने यह जिम्मेदारी काकोली घोष से वापस लेकर कल्याण बनर्जी को सौंप दी थी, जिससे काकोली घोष काफी आहत थीं। हालांकि, काकोली घोष ने भी तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है और वह अभी भी लोकसभा सदस्य के रूप में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।