मध्यप्रदेश में जर्जर पुलों के मुद्दे पर उमंग सिघार ने बीजेपी को घेरा, पूछा “क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है”

मध्यप्रदेश में जर्जर पुलों के मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिघार ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब ऊपर से नीचे तक भाजपा की सरकारें विपक्ष को तोड़ने, सरकारें गिराने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने में व्यस्त हों तो विकास और बुनियादी ढांचे पर ध्यान कैसे जाएगा। कांग्रेस ने ने

Jun 29, 2026 - 12:30
मध्यप्रदेश में जर्जर पुलों के मुद्दे पर उमंग सिघार ने बीजेपी को घेरा, पूछा “क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है”

मध्यप्रदेश में जर्जर पुलों के मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिघार ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब ऊपर से नीचे तक भाजपा की सरकारें विपक्ष को तोड़ने, सरकारें गिराने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने में व्यस्त हों तो विकास और बुनियादी ढांचे पर ध्यान कैसे जाएगा।

कांग्रेस ने ने कहा कि प्रदेश में 253 पुल जर्जर घोषित किए जा चुके हैं, जिनमें 46 पुल बेहद खतरनाक श्रेणी में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश और निर्धारित नियमों के बावजूद सुरक्षा ऑडिट, भौतिक निरीक्षण और सर्वे का काम पूरा नहीं किया गया।

उमंग सिंघार ने जर्जर पुलों के मुद्दे पर किए सवाल

उमंग सिंघार मे जर्जर पुलों के मुद्दे पर सरकार को घेरा है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि मंचों से विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रदेश की जनता हर दिन ऐसे पुलों से गुजरने को मजबूर है, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसी दुर्घटना के बाद मुआवजा बांटना सरकार के लिए आसान होता है लेकिन दुर्घटना होने से पहले बुनियादी ढांचे को सुरक्षित बनाना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में विज्ञापनों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जबकि पुलों की हालत लगातार खराब होती जा रही है। उन्होंने कहा कि भाषणों में विकास दिखाई देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर बुनियादी ढांचा कमजोर पड़ रहा है। उमंग सिघार ने सवाल किया कि प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है या फिर समय रहते जर्जर पुलों की मरम्मत और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट

हाल ही में सामने आई लोक निर्माण विभाग की जानकारी के अनुसार प्रदेश में विभिन्न मार्गों पर 253 पुल जर्जर घोषित किए गए हैं। इनमें 46 पुल बेहद खतरनाक श्रेणी में हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि संवेदनशील पुलों की सूची में सिर्फ पुराने ढांचे ही नहीं, बल्कि हाल के वर्षों में बने कुछ पुल भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ऑन रोड सेफ्टी, इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) और एमपी पीडब्ल्यूडी के क्वालिटी कंट्रोल मैनुअल के अनुसार हर साल 15 जून तक सभी पुलों और पुलियों का सुरक्षा ऑडिट एवं भौतिक निरीक्षण पूरा किया जाना अनिवार्य है, लेकिन इस साल यह प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।