“हम नहीं, ईरान बातचीत के लिए बेताब था”- ट्रंप ने विपक्षी डेमोक्रेट्स और सर्वोच्च नेता खामेनेई को दिया करारा जवाब
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद भी दोनों देशों में तनाव बरकरार है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध में ईरान की सैन्य ताकत तबाह हो चुकी है और उसे कोई आर्थिक राहत नहीं मिलेगी, जबकि खामेनेई ने ट्रंप को समझौते के लिए बेताब बताया।
Washington: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर तो हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच कड़वाहट और तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए तीखा हमला बोला है।
ट्रंप ने दावा किया है कि हालिया संघर्ष के बाद ईरान की सैन्य क्षमताएं लगभग पूरी तरह से घुटनों पर आ चुकी हैं। इसके साथ ही उन्होंने साफ कर दिया कि अमेरिका ईरान को किसी भी तरह की वित्तीय या आर्थिक राहत देने के मूड में नहीं है और उसे अमेरिका से एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिलेगी।
ट्रंप का दावा- ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह तबाह
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार कई पोस्ट साझा कर ईरान की वर्तमान स्थिति पर अपनी बात रखी। उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों की आलोचनाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि हालिया सैन्य टकराव ने ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप के मुताबिक, वर्तमान में ईरान के पास न तो कोई प्रभावी वायुसेना बची है और न ही उसकी नौसेना में कोई दम रह गया है।
इतना ही नहीं, उन्होंने दावा किया कि ईरान का एंटी-aircraft सिस्टम और रडार नेटवर्क भी अब पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि युद्ध ने ईरान को भीतर से पूरी तरह कमजोर कर दिया है और उसकी सैन्य शक्ति अब इतिहास की बात हो चुकी है।
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घरेलू मोर्चे पर डेमोक्रेट्स पर साधा निशाना
ईरान के मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के विपक्षी डेमोक्रेट नेताओं को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कुछ डेमोक्रेट नेता लगातार यह भ्रामक दावा कर रहे हैं कि ईरान चार महीने पहले की तुलना में आज बेहतर स्थिति में है।
इस पर तंज कसते हुए ट्रंप ने लिखा, “फिर भी डेमोक्रेट्स का कहना है कि ईरान अब चार महीने पहले की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में है। क्या आप इसकी कल्पना भी कर सकते हैं? कुछ लोग राजनीति में कितने मूर्ख हो सकते हैं?”
बातचीत के लिए अमेरिका नहीं, ईरान था बेताब
समझौते की पृष्ठभूमि पर बात करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इस डील के लिए पहल अमेरिका की तरफ से नहीं हुई थी। उन्होंने कहा, “हम किसी समझौते के लिए बेताब नहीं थे, बल्कि ईरान बेताब था। वे पूरी तरह खत्म हो चुके हैं और इसीलिए वे टेबल पर आए।”
ट्रंप ने अपने सख्त रुख को दोहराते हुए कहा कि ईरान को किसी भी तरह की वित्तीय सहायता या प्रतिबंधों में ढील का लाभ नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “उन्हें अमेरिका से न पैसे मिलेंगे और न ही दस सेंट।”
खामेनेई ने ट्रंप के दावों को किया खारिज
डोनाल्ड ट्रंप का यह तीखा बयान ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई की उस टिप्पणी के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने ट्रंप पर निशाना साधा था। खामेनेई ने ट्रंप के दावों को झूठा करार देते हुए कहा था कि वास्तव में अमेरिका और खुद राष्ट्रपति ट्रंप ही इस समझौते को अमलीजामा पहनाने के लिए सबसे ज्यादा उत्सुक थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस डील को हासिल करने के लिए राजनीतिक रूप से “बेताब” थे और इसके लिए उन्होंने हर मुमकिन कूटनीतिक रणनीति का इस्तेमाल किया।
समझौते पर ईरान के सर्वोच्च नेता की सफाई
डील पर हस्ताक्षर होने के बाद अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में खामेनेई ने देश के सामने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में वे सैद्धांतिक रूप से इस समझौते के पूरी तरह खिलाफ थे।
हालांकि, बाद में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्यों ने उन्हें इस बात का पूरा भरोसा दिलाया कि यह समझौता ईरान और उसके सहयोगी “रेजिस्टेंस फ्रंट” के हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा। इस आश्वासन के बाद ही उन्होंने समझौते को अपनी अंतिम मंजूरी दी।