वंदे मातरम् बिल पर बोले असदुद्दीन ओवैसी, कहा – ‘वंदे मातरम् के पाठ में देवी की पूजा-अर्चना की बात’, पढ़ें खबर
संसद के मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026, जिसे वंदे मातरम् बिल के नाम से भी जाना जाता है, दोनों सदनों में बहुमत से पारित हो गया है, जिसके बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने देश के पहले राष्ट्रपति
संसद के मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026, जिसे वंदे मातरम् बिल के नाम से भी जाना जाता है, दोनों सदनों में बहुमत से पारित हो गया है, जिसके बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद पर गंभीर टिप्पणी करते हुए बिल पर कई सवाल उठाए हैं।
दरअसल आज गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को लोकसभा में विपक्षी दलों के जोरदार हंगामे और विरोध के बावजूद इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कर दिया गया, जबकि इससे ठीक एक दिन पहले यानी बुधवार, 29 जुलाई 2026 को संसद के उच्च सदन, राज्यसभा ने भी इस बिल को अपनी मंजूरी दे दी थी। अब संसद के दोनों सदनों से इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद इसके कानून का रूप लेने का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो गया है।
प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद पर की टिप्पणी
हालाँकि, केंद्र सरकार की तरफ से लोकसभा में वंदे मातरम् बिल पेश किए जाने के साथ ही विपक्षी दलों ने इसका जमकर विरोध किया और सदन में लगातार हंगामा देखने को मिला। इसी बीच, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बिल के पास होने के उपरांत देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद का नाम लेते हुए उन पर टिप्पणी की। उन्होंने यह स्पष्ट रूप से कहा कि वर्ष 1950 में वंदे मातरम् को लेकर राजेंद्र प्रसाद ने एक बहुत बड़ी गलती की थी।
वंदे मातरम् में देवी की पूजा-अर्चना की बात: असदुद्दीन ओवैसी
लोकसभा में बिल पर बहस के दौरान अपनी बात रखते हुए AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने विस्तार से बताया कि जब आप जन गण मन पढ़ते हैं, तो उसमें इस देश का प्रतिबिंब और देश की जनता का स्वरूप दिखाई देता है। वहीं, जब आप वंदे मातरम् का पाठ करते हैं, तो उसमें भगवान और देवी की पूजा-अर्चना की बात निहित है। उन्होंने इस अवसर पर प्रश्न किया कि उन मुजाहिदीन-ए-आजादी को अब क्या कहा जाएगा, जिन्होंने इस देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया? उनका कहना था कि जन गण मन तो जनता के लिए ही रचा गया था और यह देश के हर नागरिक की भावना को दर्शाता है।
इसके लिए एक उचित संकल्प पारित किया जाना चाहिए था: ओवैसी
ओवैसी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वर्ष 1950 में राजेंद्र प्रसाद ने एक बहुत बड़ी त्रुटि की थी। उन्होंने किसी भी संकल्प (रेजुलेशन) के बिना ही इसे राष्ट्रीय गीत घोषित कर दिया, जबकि इसके लिए एक उचित संकल्प पारित किया जाना चाहिए था। उन्होंने जोर देकर कहा कि कहीं पर भी राष्ट्रीय गीत की कोई स्पष्ट परिभाषा मौजूद नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि आप (केंद्र सरकार) संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 का सरासर उल्लंघन कर रहे हैं, जो नागरिकों के मौलिक अधिकारों से संबंधित हैं।
इसी बीच, समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी इस बिल पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् बिल का सम्मान इस देश के सभी लोग करते हैं और हम सब भी इसका आदर करते हैं। सभी इसका सम्मान करते हैं। उनका आरोप था कि ये सभी बिल केवल लोगों का ध्यान भटकाने के उद्देश्य से लाए जा रहे हैं, ताकि राम मंदिर के चंदा चोरी के मामले पर सदन में कोई सार्थक चर्चा न हो पाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे बिल का कोई विरोध नहीं करते हैं और उसका सम्मान करते हैं। उनके अनुसार, यह बिल तो पहले से ही मौजूद है, इसे दोबारा लाने की कोई आवश्यकता नहीं थी और हम सभी इसका सम्मान करते हैं।
सपा सांसद डिंपल यादव ने भी सरकार पर उठाए सवाल
सपा सांसद डिंपल यादव ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यह सरकार बार-बार संशोधन बिल क्यों ला रही है? वंदे मातरम् बिल संसद में पहले ही पारित हो चुका है। अब वे फिर से थोड़ा संशोधन करके एक नया बिल ला रहे हैं। उन्होंने पुनः प्रश्न किया कि आखिरकार बार-बार बिल क्यों लाया जा रहा है? डिंपल यादव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हम चाहते हैं कि राम मंदिर में जो चंदा चोरी हुई है, उस पर चर्चा हो। उन्होंने लोगों की श्रद्धा की लूट का जिक्र करते हुए उस पर चर्चा की मांग की। उनका निष्कर्ष था कि कहीं न कहीं सरकार ध्यान भटकाने वाली राजनीति में संलिप्त है, जिससे जनता के असल मुद्दे पीछे छूट रहे हैं।