विश्वकर्मा जयंती: सृजन और शिल्प के आराध्य हैं भगवान विश्वकर्मा, सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी शुभकामनाएं
आज विश्वकर्मा जयंती है। भगवान विश्वकर्मा को सृजन, शिल्प और निर्माण का देवता माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने देवताओं के लिए कई भव्य नगरों, भवनों और अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था। इसीलिए विश्वकर्मा जयंती का संबंध सिर्फ आस्था से ही नहीं, बल्कि शिल्प, तकनीक, निर्माण और श्रम की परंपरा से भी जुड़ा हुआ है। […]
आज विश्वकर्मा जयंती है। भगवान विश्वकर्मा को सृजन, शिल्प और निर्माण का देवता माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने देवताओं के लिए कई भव्य नगरों, भवनों और अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था। इसीलिए विश्वकर्मा जयंती का संबंध सिर्फ आस्था से ही नहीं, बल्कि शिल्प, तकनीक, निर्माण और श्रम की परंपरा से भी जुड़ा हुआ है।
विश्वकर्मा जयंती पर मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने उन्होंने प्रार्थना की है कि भगवान विश्वकर्मा की कृपा और प्रेरणा से श्रम, कौशल और नवाचार की भावना लगातार मजबूत हो तथा शिल्पकारों, कारीगरों और श्रमशील लोगों के जीवन में सुख, समृद्धि और उन्नति आए।
क्यों मनाई जाती है विश्वकर्मा जयंती
हिंदू पंचांग के अनुसार विश्वकर्मा जयंती कन्या संक्रांति के अवसर पर मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का वास्तुकार और दिव्य शिल्पकार बताया गया है। उन्हें निर्माण कला, वास्तुकला, औजारों और तकनीकी कौशल का आराध्य माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन विशेष रूप से कारखानों, कार्यशालाओं, दुकानों और निर्माण से जुड़े स्थानों पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है।
कारीगरों और श्रमिकों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। मशीनों, औजारों और काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। कई जगह कामकाजी उपकरणों को साफ किया जाता है और उनके सुरक्षित तथा बेहतर इस्तेमाल की कामना की जाती है।
श्रम और कौशल के आराध्य हैं भगवान विश्वकर्मा
पौराणिक कथाओं में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार कहा गया है। मान्यता है कि उन्होंने इंद्रपुरी, द्वारका और लंका जैसे कई दिव्य नगरों और भवनों के निर्माण में भूमिका निभाई। हालांकि अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में उनके स्वरूप और उनसे जुड़ी कथाओं का विवरण अलग-अलग मिलता है।
विश्वकर्मा जयंती का व्यापक संदेश श्रम और कौशल के सम्मान से भी जुड़ा है। आधुनिक समय में यह अवसर उन लोगों के योगदान को याद करने का माध्यम बन गया है जो अपने हुनर और मेहनत से निर्माण, उत्पादन, तकनीक और कारीगरी के क्षेत्र को आगे बढ़ाते हैं। इसलिए विश्वकर्मा जयंती धार्मिक आस्था के साथ हुनर, मेहनत और सृजनशीलता को सम्मान देने का भी पर्व है।
सृजन, शिल्प और कौशल के आराध्य भगवान श्री विश्वकर्मा जी की जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
विश्वकर्मा भगवान की कृपा एवं प्रेरणा से श्रम, कौशल और नवाचार की भावना निरंतर सशक्त हो तथा हमारे शिल्पकारों, कारीगरों और श्रमशील बंधुओं के जीवन में सुख, समृद्धि और उन्नति का संचार हो,… pic.twitter.com/VFptob5fMy
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) September 17, 2026