कौन हैं सुजाता कार्तिकेयन? जिनके बीजेडी में शामिल होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल हुई तेज, जानें इनके बारे में

ओडिशा की राजनीति में इन दिनों एक नई चर्चा गर्म है, और इसकी वजह बनी हैं पूर्व आईएएस अधिकारी सुजाता आर. कार्तिकेयन। गुरुवार को उन्होंने बीजू जनता दल (बीजेडी) की सदस्यता ग्रहण कर ली, और यह सब हुआ पार्टी अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की मौजूदगी में। नवीन पटनायक ने इस अवसर पर उनका

Jun 25, 2026 - 16:30
कौन हैं सुजाता कार्तिकेयन? जिनके बीजेडी में शामिल होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल हुई तेज, जानें इनके बारे में

ओडिशा की राजनीति में इन दिनों एक नई चर्चा गर्म है, और इसकी वजह बनी हैं पूर्व आईएएस अधिकारी सुजाता आर. कार्तिकेयन। गुरुवार को उन्होंने बीजू जनता दल (बीजेडी) की सदस्यता ग्रहण कर ली, और यह सब हुआ पार्टी अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की मौजूदगी में। नवीन पटनायक ने इस अवसर पर उनका स्वागत करते हुए कहा कि प्रशासनिक क्षेत्र में सुजाता का लंबा अनुभव पार्टी के लिए भी और ओडिशा की जनता के लिए भी बहुत लाभदायक साबित होगा।

नवीन पटनायक ने यह भी बताया कि सुजाता आर. कार्तिकेयन ने विशेष रूप से महिलाओं से जुड़े विभागों में लंबे समय तक काम किया है। ऐसे में उनका अनुभव महिलाओं के सशक्तिकरण और जनसेवा के क्षेत्र में बीजेडी के प्रयासों को और मजबूत करेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी में अपनी नई भूमिका निभाते हुए वह लोगों के हित में, खासकर महिलाओं के हित में, महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

सुजाता ने नवीन पटनायक का जताया आभार

बीजेडी में शामिल होने के बाद सुजाता ने नवीन पटनायक का दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अपने 24 वर्षों के प्रशासनिक जीवन में उन्हें नवीन पटनायक के कुशल नेतृत्व में ओडिशा के लोगों की सेवा करने का अवसर मिला। अब राजनीति के माध्यम से उन्हें एक बार फिर से राज्य और जनता के लिए काम करने का मौका मिला है। सुजाता ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की कृपा और ओडिशा की जनता के आशीर्वाद से वह पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ राज्य की सेवा जारी रखेंगी। सदस्यता ग्रहण करने के दौरान सुजाता कार्तिकेयन ने नवीन पटनायक का आशीर्वाद भी लिया, जो इस मौके की एक खास बात रही।

कौन हैं सुजाता आर. कार्तिकेयन?

अब सवाल उठता है कि कौन हैं सुजाता आर. कार्तिकेयन? आपको बता दें कि वह वर्ष 2000 बैच की ओडिशा कैडर की भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी रही हैं। वह अपनी प्रशासनिक सेवाओं के साथ-साथ पूर्व आईएएस अधिकारी और बीजेडी के पूर्व वरिष्ठ नेता वी. के. पांडियन की पत्नी होने के कारण भी काफी चर्चित रही हैं। करीब 24 वर्षों की अपनी सरकारी सेवा के दौरान उन्होंने ओडिशा सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण, सामाजिक कल्याण और वित्त विभाग जैसे अहम विभागों में अपनी सेवाएं दीं। प्रशासनिक सेवा के दौरान उनकी पहचान एक अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारी के रूप में रही है।

मिशन शक्ति विभाग में निभाई अहम जिम्मेदारी

उनकी सबसे चर्चित जिम्मेदारियों में से एक थी मिशन शक्ति विभाग की आयुक्त-सह-सचिव की भूमिका। मिशन शक्ति ओडिशा सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, जिसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करना, उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और उनके लिए आजीविका के अवसर बढ़ाना है। उनके कार्यकाल में मिशन शक्ति कार्यक्रम का काफी विस्तार हुआ और यह राज्य की महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं में शामिल हो गया। बाद में उन्होंने ओडिशा सरकार के वित्त विभाग में भी वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्य किया।

2024 चुनाव के दौरान आरोपों से घिरी थीं सुजाता

साल 2024 के लोकसभा और ओडिशा विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने उन्हें सार्वजनिक संपर्क वाले विभाग से हटाकर गैर-सार्वजनिक विभाग में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। यह फैसला उन शिकायतों के बाद लिया गया था, जिनमें उनके आधिकारिक पद के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे। विपक्षी दलों, खासकर भाजपा ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था, क्योंकि उस समय उनके पति वी.के. पांडियन बीजेडी के प्रमुख नेताओं में शामिल थे।

बीजेडी में शामिल होते ही खत्म हुईं सुजाता कार्तिकेयन की राजनीतिक एंट्री की अटकलें

चुनाव के बाद सुजाता कार्तिकेयन कई महीनों तक चाइल्ड केयर लीव पर रहीं। बाद में जब उनकी छुट्टी बढ़ाने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया तो उन्होंने वित्त विभाग में दोबारा अपनी जिम्मेदारी संभाली। मार्च 2025 में केंद्र सरकार ने उनके वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) के आवेदन को मंजूरी दे दी। इस दौरान सामान्य नोटिस अवधि में भी छूट दी गई। उनके वीआरएस को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा हुई, क्योंकि इससे पहले उनके पति वी.के. पांडियन भी वीआरएस लेकर राजनीति में आए थे। हालांकि, उस समय सुजाता कार्तिकेयन ने कहा था कि उनका वीआरएस निजी कारणों से है और राजनीति में आने की उनकी कोई योजना नहीं है। लेकिन उनके सेवानिवृत्त होने के बाद लगातार यह चर्चा होती रही कि वह भविष्य में सक्रिय राजनीति में आ सकती हैं। अब गुरुवार को बीजेडी की सदस्यता ग्रहण करने के साथ इन सभी अटकलों पर विराम लग गया है।

2024 चुनावी हार के बाद वी.के. पांडियन ने राजनीति से बनाई दूरी

वी.के. पांडियन की बात करें तो ओडिशा की राजनीति में उनका नाम भी लंबे समय तक सुर्खियों में रहा है। विपक्षी दल अक्सर उन पर आरोप लगाते थे कि बिना किसी निर्वाचित पद पर रहते हुए भी उनका सरकार और बीजेडी में काफी प्रभाव था। हालांकि, नवीन पटनायक ने हमेशा इस बात को स्पष्ट किया कि पांडियन उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी नहीं हैं। साल 2024 के ओडिशा विधानसभा चुनाव में जब बीजेडी को हार का सामना करना पड़ा, तब वी.के. पांडियन ने सक्रिय राजनीति से खुद को अलग करने का फैसला कर लिया। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर यह भी कहा था कि अगर उनके कारण पार्टी को नुकसान हुआ है तो उन्हें इसका बेहद दुख है, और इसी वजह से वह राजनीति से दूर हो रहे हैं। तब से लेकर वर्ष 2026 तक, पांडियन सक्रिय राजनीति में कहीं नजर नहीं आए हैं।

अब सुजाता आर. कार्तिकेयन के बीजेडी में शामिल होने को ओडिशा की राजनीति का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव का लाभ संगठन और जनता दोनों को मिलेगा, खासकर महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर। पार्टी के अंदर दबी जुबान में यह चर्चा भी है कि सुजाता का बीजेडी में आना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। भले ही वे तुरंत किसी बड़े पद पर न बैठें, लेकिन ऐसी संभावना है कि वे नवीन पटनायक के ऑफिस से ही काम संभाल सकती हैं।