PM मोदी आज BRICS में करेंगे 4 अहम बैठकें, साझा करेंसी पर भी साफ हुआ फैसला
BRICS समिट के अंतिम दिन ओपन मीटिंग होगी जिसमें सदस्य देशों के नेताओं के साथ आमंत्रित देशों के प्रमुख भी शामिल होंगे। दरअसल बैठक में संगठन से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग मुलाकात करेंगे। समिट के पहले दिन भारत ने साझा करेंसी […]
BRICS समिट के अंतिम दिन ओपन मीटिंग होगी जिसमें सदस्य देशों के नेताओं के साथ आमंत्रित देशों के प्रमुख भी शामिल होंगे। दरअसल बैठक में संगठन से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग मुलाकात करेंगे। समिट के पहले दिन भारत ने साझा करेंसी को लेकर स्थिति साफ करते हुए कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है जबकि स्थानीय करेंसी में व्यापार को बढ़ावा देने पर बातचीत जारी है।
वहीं समिट के पहले दिन BRICS देशों ने नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी। इस साझा बयान में कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों ने अपना रुख सामने रखा। रूस, चीन, भारत समेत सभी सदस्य देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने की बात कही।
आतंकवाद पर सख्त किया रयख
दरअसल डेक्लरेशन में आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वालों के खिलाफ कदम उठाने पर भी सहमति जताई गई। यह साझा बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और ईरान, सऊदी अरब तथा यूएई जैसे देशों के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख रहे हैं। इसके बावजूद सभी सदस्य देशों ने संयुक्त घोषणा पर सहमति बनाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने संबोधन में BRICS के अगले 20 साल के लिए नया एजेंडा तैयार करने की बात कही।
BRICS में साझा करेंसी नहीं
वहीं समिट के दौरान विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि BRICS देशों की कोई साझा करेंसी शुरू करने का फैसला नहीं हुआ है। फिलहाल सदस्य देशों के बीच अपनी-अपनी करेंसी में व्यापार और भुगतान बढ़ाने पर चर्चा चल रही है। इसका उद्देश्य देशों के बीच लेन-देन को आसान बनाना और डॉलर पर निर्भरता कम करना है। BRICS देश इस दिशा में अलग-अलग देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को जोड़ने की संभावना पर भी काम कर रहे हैं। हालांकि अभी संगठन का कोई साझा पेमेंट सिस्टम या एकल डिजिटल करेंसी नहीं है। भारत की कोशिश है कि सदस्य देशों के डिजिटल भुगतान तंत्र को आपस में जोड़ा जाए ताकि सीमा पार भुगतान आसान हो सके।