CM डॉ. मोहन यादव ने गंगा दशहरा को बताया कृतज्ञता का पर्व, प्रदेशवासियों से जल संरक्षण आंदोलन में जुड़ने का किया आह्वान
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंगा दशहरा से पहले प्रदेशवासियों को बड़ा संदेश दिया है। दरअसल मुख्यमंत्री ने इस बड़े पर्व से पहले ब्लॉग लिखा है, जिसमें उन्होंने गंगा दशहरा को कृतज्ञता का पर्व बताया है। इसके साथ ही प्रदेशवासियों से जल संरक्षण आंदोलन में जुड़ने का आह्वान किया है। चलिए जानते
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंगा दशहरा से पहले प्रदेशवासियों को बड़ा संदेश दिया है। दरअसल मुख्यमंत्री ने इस बड़े पर्व से पहले ब्लॉग लिखा है, जिसमें उन्होंने गंगा दशहरा को कृतज्ञता का पर्व बताया है। इसके साथ ही प्रदेशवासियों से जल संरक्षण आंदोलन में जुड़ने का आह्वान किया है। चलिए जानते हैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने ब्लॉग में क्या कहा है?
अपने ब्लॉग में गंगा दशहरा के पावन अवसर से पहले जल संरक्षण को राष्ट्रीय दायित्व बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह पर्व जल के प्रति हमारी कृतज्ञता को दर्शाता है। भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में नदियों को केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि देवी के रूप में पूजा जाता है, जिनमें गंगा का स्थान सर्वोपरि है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला गंगा दशहरा या गंगावतरण पर्व, गंगा नदी के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। यह दिन जल के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘पवित्र और स्वच्छ जल के इसी महत्व को समझते हुए, यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने जल संरक्षण को एक राष्ट्रीय जन आंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने जल को विकास का एक प्रमुख पैरामीटर बनाते हुए ‘हर घर जल’ और ‘जल है तो कल है’ के संकल्प को साकार किया है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में जल शक्ति मंत्रालय का गठन, जल जीवन मिशन, नमामी गंगे, अमृत सरोवर मिशन और जल शक्ति अभियान जैसी अनेक ऐतिहासिक पहलें की गई हैं, जिन्होंने देश की जल सुरक्षा को एक नई और सशक्त दिशा प्रदान की है।’
अमृत सरोवर योजना ने जल संरक्षण को एक नया आयाम दिया: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि ‘प्रधानमंत्री के इन प्रयासों के तहत अमृत सरोवर योजना ने जल संरक्षण को एक नया आयाम दिया है। इसके अंतर्गत प्रत्येक जिले में 75 जलाशयों के निर्माण या पुनरुद्धार का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके परिणाम स्वरूप अब तक 70 हजार से अधिक अमृत सरोवर तैयार हो चुके हैं। इन सरोवरों से वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और सिंचाई सुविधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह मिशन ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ का एक अभिन्न हिस्सा है और सामुदायिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। नमामी गंगे परियोजना के माध्यम से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, नदी फ्रंट विकास और जैव विविधता संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी निरंतर जारी हैं। इसी प्रकार, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ का मंत्र दिया गया, जिसने ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया। ‘कैच द रेन’ अभियान ने वर्षा जल संचयन को एक व्यापक जन आंदोलन बना दिया है। प्रधानमंत्री ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि पानी बचाना ‘स्वच्छ भारत मिशन’ की तरह ही एक सामूहिक दायित्व है। उनके मार्गदर्शन में लाखों जल संरचनाओं का निर्माण हुआ है, चेकडैम बनाए गए हैं, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं और पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार किया गया है।’
देश भर में भूजल रिचार्ज बढ़ा : मुख्यमंत्री यादव
वहीं मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि ‘इन व्यापक और समन्वित प्रयासों का परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। देश भर में भूजल रिचार्ज बढ़ा है, ओवर-एक्सप्लॉइटेड इकाइयों की संख्या में कमी आई है और कई जिलों में जल संकट की स्थिति में सुधार हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण केवल बुनियादी ढांचा निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जल संरक्षण को एक संस्कृति और आदत बनाने पर जोर देते हैं। वे बच्चों को ‘वाटर वॉरियर्स’ बनाने और समाज को इस दिशा में अधिक जिम्मेदार बनाने पर बल देते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण अब भारत की विकास यात्रा का एक अभिन्न अंग बन चुका है। ये प्रयास न केवल वर्तमान की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक जल-समृद्ध भारत का आधार भी तैयार कर रहे हैं। जल संरक्षण अब मात्र एक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।’
सफलतापूर्वक चलाया जा रहा जल गंगा संवर्धन अभियान
CM यादव ने कहा कि ‘मध्यप्रदेश भी, जिसे प्राकृतिक जल संसाधनों से समृद्ध माना जाता है, जल संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय पहल कर रहा है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ एक राज्य स्तरीय जन आंदोलन है। वर्ष 2025 में यह अभियान 19 मार्च से 30 जून तक सफलतापूर्वक चलाया गया था, और चालू वर्ष-2026 में भी यह अभियान पूरे जोर-शोर से संचालित हो रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश के जल स्रोतों का संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन करना है, ताकि मध्यप्रदेश जल संकट से पूरी तरह मुक्त हो सके। अभियान के तहत नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों, चेकडैम और अन्य जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार, गहरीकरण, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। नए जल स्रोतों का निर्माण, वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और पुरानी जल संरचनाओं का पुनरुद्धार इस अभियान के प्रमुख स्तंभ हैं। प्रदेश में 10 हजार से अधिक चेकडैम और स्टॉपडैम का संधारण, हजारों तालाबों का गहरीकरण, नई जल संरचनाओं का निर्माण और लगभग 2,500 करोड़ रुपये की लागत से बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं। इन कार्यों में ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, जनप्रतिनिधियों, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।’
कृषि प्रधान राज्य है मध्यप्रदेश: CM यादव
मध्यप्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है, और यहां की अर्थव्यवस्था तथा किसानों की समृद्धि सीधे तौर पर जल पर निर्भर करती है। बढ़ती जनसंख्या, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट और जल प्रदूषण जैसी चुनौतियों ने जल संकट को और गहरा दिया है। इस अभियान का महत्व इन्हीं चुनौतियों के प्रभावी समाधान में निहित है। अभियान से वर्षा जल का अधिकतम संचयन होता है, जिससे सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि होती है। भूजल स्तर में वृद्धि से सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भी फसल उत्पादन संभव हो पाता है। खेत तालाबों, रिज-टू-वैली मॉडल और अन्य जल संरक्षण संरचनाओं के माध्यम से किसानों की आय में भी लगातार वृद्धि हो रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मध्यप्रदेश में प्राचीन बावड़ियां, तालाब और जल संरचनाएं न केवल जल स्रोत हैं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर भी हैं। उनका जीर्णोद्धार सांस्कृतिक गौरव को बढ़ाता है और पर्यटन को भी बढ़ावा देता है। यह अभियान जनभागीदारी पर आधारित है। ‘पानी चौपाल’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को कम पानी वाली फसलें, ड्रिप सिंचाई और आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्रदान की जा रही है। इससे जल संरक्षण की संस्कृति विकसित हो रही है, और महिलाओं तथा युवाओं की भागीदारी से सामुदायिक जिम्मेदारी भी बढ़ रही है।’
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से किया ये आह्वान
वहीं अंत में मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि यह अभियान मध्यप्रदेश को जल संरक्षण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने में सफल हो रहा है। अमृत सरोवरों के जल क्षेत्र में भारी वृद्धि, नदियों का पुनःप्रवाह और लाखों जल संरचनाओं का निर्माण राष्ट्रीय स्तर पर एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। यह अभियान केवल एक सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि एक सामूहिक संकल्प है। यशस्वी प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में यह जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने में सफल हो रहा है। यह मध्यप्रदेश के भविष्य की नींव है, जो हमें सिखाता है कि जल ही जीवन है और उसकी रक्षा हमारा परम दायित्व है। यदि हम आज जल स्रोतों का संरक्षण करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां समृद्ध जल संसाधनों का उपयोग कर सकेंगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से इस अभियान से जुड़कर जल संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया है, क्योंकि स्वच्छ, समृद्ध और जल-सम्पन्न मध्यप्रदेश का सपना तभी साकार होगा जब हर नागरिक इसमें अपना योगदान देगा।