मध्य प्रदेश के संविदा अधिकारी-कर्मचारियों को बड़ी सौगात, वेतन में होगी बढ़ोतरी, वित्त विभाग ने जारी किए आदेश
मध्य प्रदेश के एक लाख से अधिक संविदा अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यह एक बेहद सुखद और बड़ी खबर है। प्रदेश के वित्त विभाग ने हाल ही में इनके वेतन में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी के आदेश जारी कर दिए हैं, जिससे उनकी मासिक आय में 2500 रुपए तक का इजाफा होने की उम्मीद है। यह
मध्य प्रदेश के एक लाख से अधिक संविदा अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यह एक बेहद सुखद और बड़ी खबर है। प्रदेश के वित्त विभाग ने हाल ही में इनके वेतन में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी के आदेश जारी कर दिए हैं, जिससे उनकी मासिक आय में 2500 रुपए तक का इजाफा होने की उम्मीद है। यह निर्णय संविदा कर्मचारियों के जीवन में आर्थिक स्थिरता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
जारी आदेशों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से इन संविदाकर्मियों के पारिश्रमिक में 4.46 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि लागू की जाएगी। यह वृद्धि पिछले वर्ष की दर 3.87 प्रतिशत से अधिक है, जो कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त लाभ का स्पष्ट संकेत है। संविदा अधिकारी-कर्मचारी संघ का दावा है कि इस बढ़ोतरी से कर्मचारियों के वेतन में हर महीने करीब 1 हजार रुपए से लेकर 2500 रुपए तक का सीधा इजाफा होगा, जिससे उनकी क्रय शक्ति में वृद्धि होगी और जीवन स्तर में सुधार आएगा।
संविदा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने फैसले का किया स्वागत
संविदा अधिकारी-कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने इस फैसले का हार्दिक स्वागत करते हुए बताया कि यह लाभ उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में बढ़ोतरी के कारण कर्मचारियों को मिल रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संघ लगातार इस मांग को सरकार के समक्ष उठाता रहा था, और आखिरकार उनकी अथक प्रयासों का फल मिला है। राठौर ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का भी हृदय से आभार व्यक्त किया, जिन्होंने कर्मचारियों के हित में इस महत्वपूर्ण निर्णय पर मुहर लगा दी।
1 अप्रैल 2026 से लागू होगी वेतन वृद्धि
वित्त विभाग ने यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग की 22 जुलाई 2023 की संविदा नीति के आधार पर जारी किए हैं। इस नीति के तहत, हर साल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में होने वाली वृद्धि के आधार पर संविदा कर्मचारियों के पारिश्रमिक में बढ़ोतरी की जाती है। यह एक पारदर्शी और न्यायसंगत तरीका है, जो कर्मचारियों को महंगाई के प्रभावों से बचाने में मदद करता है। 1 अप्रैल 2026 की स्थिति में वार्षिक वृद्धि दर को 4.46 प्रतिशत तय कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में स्पष्ट रूप से अधिक है, और यह कर्मचारियों के लिए एक अतिरिक्त प्रोत्साहन है।
रमेश राठौर ने पिछली 2023 की संविदा नीति के महत्व को भी रेखांकित किया। उनके अनुसार, इस नीति के लागू होने से पहले, विभिन्न विभागों में समान पदों पर कार्यरत संविदा कर्मचारियों को अलग-अलग वेतन मिलता था, जिससे वेतन विसंगति की स्थिति बनी रहती थी। नई नीति ने इस समस्या का समाधान करते हुए समकक्ष पदों का वेतनमान एक समान कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, संविदा कर्मचारियों का वेतन 21,800 रुपए से लेकर 70 हजार रुपए तक निर्धारित किया गया था। अब इसी आधार पर सीपीआई इंडेक्स के अनुसार वार्षिक वृद्धि का लाभ प्रदान किया जा रहा है, जिससे वेतन प्रणाली में और अधिक एकरूपता एवं निष्पक्षता आई है।
संविदा अधिकारी-कर्मचारी संघ की सरकार से मांग
हालांकि, इस महत्वपूर्ण वृद्धि का लाभ फिलहाल प्रदेश के सभी संविदा अधिकारियों और कर्मचारियों को नहीं मिल पाएगा। प्रदेश में करीब डेढ़ लाख संविदा अधिकारी-कर्मचारी विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं, लेकिन 2023 की संविदा नीति अभी तक सभी विभागों में पूरी तरह से लागू नहीं हुई है। इसी कारण, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर होने वाली इस वेतन बढ़ोतरी का लाभ फिलहाल करीब एक लाख कर्मचारियों और अधिकारियों को ही मिलेगा। संविदा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने सरकार से यह पुरजोर मांग की है कि जिन विभागों में अभी तक 2023 की संविदा नीति लागू नहीं हुई है, वहां भी इसे अविलंब लागू किया जाए ताकि शेष बचे कर्मचारियों को भी इस वार्षिक वृद्धि का समान रूप से लाभ मिल सके। यह सुनिश्चित करेगा कि प्रदेश के सभी संविदा कर्मचारी समान रूप से आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें और उन्हें न्यायपूर्ण पारिश्रमिक प्राप्त हो।