दिल्ली में सर्दियों के प्रदूषण से निपटने के लिए विंटर एंटी पॉल्यूशन प्लान, पार्किंग शुल्क दोगुना करने की तैयारी

दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने अभी से व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में दिल्ली सरकार ने “विंटर एंटी पॉल्यूशन प्लान” का ऐलान किया है जो हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगा। इस योजना का उद्देश्य सर्दियों

Jun 19, 2026 - 17:30
दिल्ली में सर्दियों के प्रदूषण से निपटने के लिए विंटर एंटी पॉल्यूशन प्लान, पार्किंग शुल्क दोगुना करने की तैयारी

दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने अभी से व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में दिल्ली सरकार ने “विंटर एंटी पॉल्यूशन प्लान” का ऐलान किया है जो हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगा। इस योजना का उद्देश्य सर्दियों में स्मॉग और खतरनाक वायु गुणवत्ता स्तर को नियंत्रित करना है।

सरकार ने साफ किया है कि यह योजना पहले से लागू ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के साथ मिलकर काम करेगी, ताकि प्रदूषण के स्तर के हिसाब से तुरंत सख्त कदम उठाए जा सकें। दिल्ली का यह विंटर एंटी पॉल्यूशन प्लान एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें यातायात नियंत्रण, वाहन उत्सर्जन पर सख्ती और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे उपाय शामिल हैं।

पार्किंग शुल्क दोगुना करने का प्रस्ताव

इस योजना के तहत सबसे अहम कदमों में से एक निजी वाहनों के उपयोग को कम करना है। इसके लिए पार्किंग शुल्क को दोगुना करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे लोग निजी वाहनों की बजाय मेट्रो, बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों का अधिक उपयोग करेंगे जिससे सड़क पर ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों में कमी आएगी। नई व्यवस्था के अनुसार यदि किसी वाहन के पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट नहीं होगा तो उसे दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं मिलेगा। यह नियम पुराने या बिना जांच वाले वाहनों पर रोक लगाने के लिए लागू किया जाएगा।

बाहरी कमर्शियल वाहनों पर रोक 

विंटर प्लान में यह भी प्रावधान किया गया है कि दिल्ली के बाहर से आने वाली गैर-बीएस-6 (Non-BS6) कमर्शियल गाड़ियों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि सीएनजी, इलेक्ट्रिक, आपातकालीन सेवाओं और सरकारी वाहनों को इस नियम से छूट दी जाएगी। दिल्ली सरकार का कहना है कि इन कदमों का मकसद सर्दियों में होने वाले गंभीर प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करना और नागरिकों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम धीरे-धीरे ट्रैफिक कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।

दरअसल दिल्ली एनसीआर हर साल अक्टूबर-नवंबर से फरवरी तक भयंकर वायु प्रदूषण की चपेट में आ जाता है। इस दौरान AQI अक्सर 400 से 900 के बीच पहुंच जाता है जो ‘गंभीर’ से ‘खतरनाक’ श्रेणी में आता है। इसके मुख्य कारणों में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में धान की पराली जलाना शामिल है। इसके अलावा वाहनों का धुआं, निर्माण स्थलों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, त्योहारों में पटाखे और कचरा जलाना भी प्रदूषण को बढ़ाते हैं। ट्रैफिक जाम के कारण निजी वाहनों का अत्यधिक उपयोग उत्सर्जन को और बढ़ा देता है।