भारत की रक्षा क्षेत्र में बड़ी छलांग, DRDO-वायुसेना ने मिलकर किया रुद्रम-II मिसाइल का सफल परीक्षण, राजनाथ सिंह ने दी बधाई
भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में एक और मील का पत्थर जुड़ गया है। देश के दुश्मनों को थर्रा देने वाली हमारी वायुसेना अब और भी ज्यादा घातक हो गई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ के साथ मिलकर भारतीय वायुसेना ने मंगलवार को रुद्रम-II मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण कर अपनी अदम्य
भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में एक और मील का पत्थर जुड़ गया है। देश के दुश्मनों को थर्रा देने वाली हमारी वायुसेना अब और भी ज्यादा घातक हो गई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ के साथ मिलकर भारतीय वायुसेना ने मंगलवार को रुद्रम-II मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण कर अपनी अदम्य शक्ति का प्रदर्शन किया। यह परीक्षण किसी सामान्य परिस्थिति में नहीं, बल्कि बेहद कठिन हालातों में एक एयरबोर्न प्लेटफॉर्म से किया गया, जिसने सभी सब-सिस्टम की क्षमता को सुनिश्चित करते हुए क्रिटिकल ट्रेजेक्ट्री का सफल निर्धारण किया। हवा-से-सतह में अचूक मार करने वाली यह मिसाइल, वायुसेना के बेड़े में शामिल होकर उसकी ताकत को कई गुना बढ़ा देगी। यह सिर्फ एक परीक्षण नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और तकनीकी आत्मनिर्भरता का सीधा प्रमाण है।
इस अजेय मिसाइल का निर्माण पूरी तरह स्वदेशी है, जो आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। रुद्रम-II को डीआरडीओ की नोडल लेबोरेटरी, रिसर्च सेंटर इमारत, हैदराबाद ने अपनी कड़ी मेहनत और विशेषज्ञता से विकसित किया है। यह सिर्फ एक लेबोरेटरी का काम नहीं, बल्कि देश के कई शीर्ष रक्षा संस्थानों का संयुक्त प्रयास है। इसके विकास में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी, हाई एनर्जी मटेरियल रिसर्च लेबोरेटरी, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैबिलिशमेंट और आईटीआर जैसी अनेक सहयोगी प्रयोगशालाओं ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है। इतना ही नहीं, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, रिजनल सेंटर फोर मिलिट्री एयरवर्दीनेस, मिसाइल सिस्टम क्वालिटी एश्योरेंस एजेंसी और विकास सह उत्पादन साझेदारों (DCPP) सहित कई अन्य उद्योगों ने भी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सफल बनाने में अपना अमूल्य योगदान दिया है। यह दिखाता है कि देश के वैज्ञानिक और इंजीनियर किस तरह एकजुट होकर भारत की सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं, जिस पर हर हिंदुस्तानी गर्व करता है।
राजनाथ सिंह ने DRDP और भारतीय वायुसेना को दी बधाई
इस ऐतिहासिक सफलता पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अपनी खुशी व्यक्त करते हुए डीआरडीओ और भारतीय वायुसेना को दिल से बधाई दी है। उन्होंने इस मिसाइल के सफल परीक्षण के लिए सभी योगदानकर्ताओं डीआरडीओ के वैज्ञानिकों, भारतीय वायुसेना के जांबाजों, रक्षा उपक्रमों और उद्योग जगत के अथक प्रयासों की जमकर सराहना की है। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह परीक्षण सिर्फ एक मिसाइल की उड़ान नहीं, बल्कि हमारी स्वदेशी रक्षा तकनीक की बढ़ती परिपक्वता का जीवंत प्रमाण है। यह उन्नत हथियार प्रणालियों में भारत की आत्मनिर्भरता को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह हमें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए और भी सशक्त बनाएगा। भारत अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं, बल्कि खुद अपने दम पर दुनिया के सबसे आधुनिक हथियार बनाने की क्षमता रखता है।
RudraM-II, Air-to-Surface Missile was successfully tested by #DRDO and @IAF_MCC from Airborne Platform. The tests were conducted under extreme release conditions with critical trajectory establishing the capability of all subsystems. pic.twitter.com/ED6DZK4hz7
— DRDO (@DRDO_India) June 2, 2026