खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर बढ़ा सस्पेंस, भारत से कौन होगा शामिल, जानिए पूरा प्लान

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर दुनिया की नजरें टिकी हैं। भारत को भी इस राजकीय समारोह का न्योता मिला है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर भारत की ओर से कौन जाएगा? प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।

Jun 29, 2026 - 17:30
खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर बढ़ा सस्पेंस, भारत से कौन होगा शामिल, जानिए पूरा प्लान

New Delhi: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद देश में शोक का माहौल है। जुलाई के पहले सप्ताह में उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस समारोह में दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। भारत को भी आधिकारिक निमंत्रण भेजा गया है, जिसके बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि इस अहम मौके पर भारत की ओर से कौन शामिल होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी समारोह में आने का न्योता दिया गया था। हालांकि उनके पहले से तय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के चलते उनके शामिल होने की संभावना कम बताई जा रही है।

भारत से कौन जा सकता है?

मीडिया रिपोर्ट्स और ईरानी सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भारत का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। इसके अलावा बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन का नाम भी संभावित प्रतिनिधिमंडल में शामिल बताया जा रहा है। हालांकि, भारत सरकार ने अभी तक इस प्रतिनिधिमंडल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में अंतिम फैसला आने का इंतजार किया जा रहा है।

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चार जुलाई से शुरू होंगे अंतिम संस्कार के कार्यक्रम

ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होंगे। चार और पांच जुलाई को तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में खामेनेई के पार्थिव शरीर को आम लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद 6 जुलाई को राजकीय अंतिम यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें देश-विदेश के कई बड़े नेता शामिल हो सकते हैं। अंतिम कार्यक्रम 9 जुलाई को उनके गृह नगर मशहद में होगा, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इस दौरान लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा?

भारत और ईरान के संबंध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भी रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह और पश्चिम एशिया की रणनीतिक स्थिति जैसे कई अहम मुद्दों पर लगातार सहयोग रहा है। ऐसे में इस अंतिम संस्कार में भारत की उच्चस्तरीय मौजूदगी को दोनों देशों के मजबूत रिश्तों का प्रतीक माना जा रहा है।

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हाल के महीनों में बढ़े दोनों देशों के संपर्क

बीते कुछ महीनों में भारत और ईरान के बीच लगातार उच्चस्तरीय संपर्क देखने को मिला है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में भारत का दौरा किया था, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। खामेनेई के निधन के बाद भी भारत ने संवेदना व्यक्त करते हुए नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में शोक संदेश दर्ज कराया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दूतावास पहुंचकर शोक पुस्तिका में हस्ताक्षर किए थे।

भारत पहले भी ईरान के शीर्ष नेताओं के निधन पर उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजता रहा है। वर्ष 2024 में तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मौत के बाद तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अंतिम संस्कार में शामिल होने ईरान गए थे।

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