तबाही से सुपर नेपाल बनने की राह: 6 अरब डॉलर का प्लान, जानिए भारत समेत किस देश ने खोली अपनी तिजोरी
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण के लिए 6 अरब डॉलर के बजट का आकलन किया गया है। तबाही के इस दौर में भारत, चीन, अमेरिका, यूएई समेत कई देशों और वैश्विक संस्थाओं ने मदद का हाथ बढ़ाया है। पढ़िए पूरी खबर
Kathmandu: नेपाल में हाल ही में आई भीषण भोटेकोशी-त्रिशूली बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में 1200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग लापता हैं। अब शुरुआती राहत और बचाव कार्य पूरा होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस तबाही से नेपाल वापस कैसे उभरेगा?
इसी बीच वैश्विक ध्यान इस बात पर टिका है कि अब तक नेपाल को किस देश से कितनी सहायता मिली है और आपदा के बाद देश को फिर से मजबूत बनाने में कौन-कौन से देश उसके साथ खड़े हैं।
मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 6 अरब डॉलर का दांव
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले के अनुसार, बाढ़ के बाद देश को सिर्फ पहले जैसा बनाना काफी नहीं होगा, बल्कि ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा जो भविष्य की आपदाओं को झेल सके। इसके लिए 6 अरब डॉलर तक का खर्च आएगा।
साधारण पुनर्निर्माण की तुलना में आपदा-रोधी इमारतों और सड़कों को बनाने में दो से तीन गुना ज्यादा लागत आती है। नेपाल सरकार फिलहाल एआई, तकनीक और ऑन-साइट निरीक्षण के जरिए व्यापक ‘पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट’ (PDNA) कर रही है।
पड़ोसी देशों का साथ: भारत और चीन की मदद
मुश्किल वक्त में नेपाल के पड़ोसी देशों ने सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाया। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भी कहा कि मित्र देश संकट के समय नेपाल के लिए ताकत के स्तंभ साबित हुए हैं। संकट की शुरुआत से ही भारत अलग-अलग चरणों में राहत सामग्री, खाद्य सामान और विशेषज्ञ टीमों को लगातार नेपाल भेज रहा है। चीन ने तत्काल सहायता के रूप में लगभग 30 करोड़ नेपाली रुपये मूल्य की राहत सामग्री उपलब्ध कराई है।
एशियाई देश और खाड़ी देशों का बड़ा योगदान
नेपाल की मदद में एशियाई और खाड़ी देश भी पीछे नहीं रहे। श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश ने जरूरी राहत सामग्री भेजी है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 83 टन राहत सामग्री के साथ-साथ 10 मिलियन डॉलर की बड़ी सहायता का वादा किया है। वहीं कतर ने भी नेपाल के लिए 40 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी है।
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों का हाथ
पश्चिमी और यूरोपीय देशों ने नकदी और तकनीक दोनों से नेपाल को सहारा दिया है।
अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया: अमेरिका ने राहत पैकेज दिया है, वहीं ऑस्ट्रेलिया ने 10 लाख डॉलर की नकद सहायता के साथ एक्सपर्ट्स और ड्रोन ऑपरेटरों की विशेष टीम भेजी है।
ब्रिटेन और यूरोपीय संघ: ब्रिटेन ने 50 लाख पाउंड और यूरोपीय संघ ने 25 लाख यूरो की मदद की घोषणा की है।
अन्य देश: स्विट्जरलैंड (1 मिलियन डॉलर), जर्मनी (20 लाख डॉलर), डेनमार्क (35 लाख क्रोनर), आयरलैंड (5 लाख यूरो), नॉर्वे (17 लाख क्रोनर) और चेक रिपब्लिक (25 लाख कोरुना) ने भी वित्तीय मदद दी है।
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वैश्विक टेक कंपनियों और बैंकों से वित्तीय सहायता
सरकारी मदद के अलावा निजी क्षेत्र और वैश्विक वित्तीय संस्थानों ने भी नेपाल को आर्थिक मजबूती दी है।
एनवीडिया (NVIDIA): अमेरिका की इस प्रमुख टेक कंपनी ने नेपाल को 10 मिलियन डॉलर का दान दिया है।
विश्व बैंक (World Bank): नेपाल को संभलने के लिए विश्व बैंक ने रियायती दरों पर 167 मिलियन डॉलर का लोन देने का वादा किया है।
एशियाई विकास बैंक (ADB): एडीबी ने 5 मिलियन डॉलर का अनुदान और तकनीकी सहायता प्रदान की है।
नेपाल के प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में अब तक 10 अरब नेपाली रुपये से अधिक की राशि जुट चुकी है। वैश्विक बिरादरी के इस सहयोग से नेपाल अब पुनर्निर्माण के रास्ते पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है।