तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, रेप केस में दो हफ्ते के भीतर सरेंडर करने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को रेप के मामले में दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। अदालत ने तेजपाल की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी अपील पर सुनवाई होने तक सरेंडर से छूट देने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट

Aug 25, 2026 - 17:30
तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, रेप केस में दो हफ्ते के भीतर सरेंडर करने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को रेप के मामले में दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। अदालत ने तेजपाल की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी अपील पर सुनवाई होने तक सरेंडर से छूट देने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील पर आगे सुनवाई से पहले उन्हें आत्मसमर्पण करना होगा।

मंगलवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि तेजपाल दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करें और इसका प्रमाण पत्र अदालत में दाखिल करें। उनकी अपील पर अगली सुनवाई 22 सितंबर को निर्धारित है और सरेंडर प्रमाण पत्र दाखिल होने के बाद मामले में आगे की सुनवाई का रास्ता साफ होगा।

शीर्ष अदालत ने नहीं दी राहत

तरुण तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत से आग्रह किया था कि सरेंडर से छूट की उनकी अर्जी को पहले सुना जाए और तब तक उन्हें आत्मसमर्पण से राहत दी जाए। उनका तर्क था कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट का रुख करने के लिए समय दिया था, इसलिए तत्काल सरेंडर की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।

वहीं, गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया। राज्य सरकार का कहना था कि दोषसिद्धि के खिलाफ अपील पर सुनवाई के लिए पहले आरोपी को सरेंडर करना चाहिए या नियमानुसार सरेंडर से छूट मांगनी चाहिए। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के नियमों का हवाला देते हुए तेजपाल की अपील की सुनवाई से पहले इस प्रक्रिया का पालन जरूरी बताया।

क्या है मामला

यह मामला नवंबर 2013 का है। आरोप था कि तहलका के एक कार्यक्रम के दौरान गोवा के एक होटल में तरुण तेजपाल ने अपनी एक महिला सहकर्मी के साथ लिफ्ट में यौन हमला किया। हालांकि उन्होंने आरोपों से इनकार किया था। मामले में गोवा पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह मामला ट्रायल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है।

इस मामले में गोवा की सत्र अदालत ने मई 2021 में तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में अपील की थी। इसके बाद 6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलट दिया। हाईकोर्ट ने तेजपाल को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने उन पर करीब 10.1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जिसे पीड़िता को दिए जाने का निर्देश दिया गया। हाईकोर्ट ने उन्हें पहले चार सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का समय दिया था ताकि वे सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तेजपाल

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद तरुण तेजपाल ने 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और अपनी दोषसिद्धि तथा 10 साल की सजा को चुनौती दी। उनकी याचिका में हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करने की मांग की गई है। इसी बीच गोवा सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर 10 साल की सजा बढ़ाकर उम्रकैद करने की मांग की है।