भारत-चीन रिश्तों में नई पहल, NSA डोभाल करेंगे सीमा विवाद पर 25वें दौर की वार्ता
NSA अजीत डोभाल चीन के बीजिंग पहुंच गए हैं, जहां वह भारत-चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वीं वार्ता में हिस्सा लेंगे। बैठक में LAC पर शांति, सीमा सुरक्षा और दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने पर चर्चा होगी।
New Delhi: भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे हैं। डोभाल यहां भारत-चीन के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वें दौर की वार्ता में हिस्सा लेंगे। इस बैठक को दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
वांग यी के साथ होगी अहम बैठक
बीजिंग में होने वाली इस विशेष वार्ता में NSA अजीत डोभाल अपने चीनी समकक्ष और विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत करेंगे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर यह 25वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता होगी। इस तंत्र की शुरुआत साल 2003 में की गई थी, जिसका उद्देश्य सीमा से जुड़े जटिल मुद्दों को बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से सुलझाना है।
LAC विवाद और रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश
भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में तनाव के बाद रिश्तों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे में डोभाल की यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।
वार्ता के दौरान भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बनाए रखने, सैन्य तनाव कम करने और लंबित मुद्दों के समाधान पर अपनी बात रख सकता है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश सीमा, सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकननेक क्षेत्र की सुरक्षा और सीमा पार आतंकवाद जैसे अहम मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं।
शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से पहले अहम दौरा
NSA डोभाल का यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सितंबर 2026 में नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है। इसमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
ऐसे में डोभाल की बीजिंग यात्रा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच संभावित मुलाकात की कूटनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत से पहले सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर माहौल बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।
भारत रखेगा अपने सुरक्षा हितों की बात
माना जा रहा है कि भारत इस वार्ता में अपने सुरक्षा हितों को मजबूती से सामने रखेगा। खासकर अरुणाचल प्रदेश और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर भारत अपनी चिंताओं से चीन को अवगत करा सकता है। NSA अजीत डोभाल की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश सीमा पर स्थिरता और आपसी संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।