कोलकाता मेट्रो रेल परियोजना में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को लगाई कड़ी फटकार, कहा- आपके लिए त्योहार विकास से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता मेट्रो रेल परियोजना को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने विकास कार्यों में बाधा डालने और मुद्दे का राजनीतिकरण करने के लिए राज्य सरकार के अधिकारियों के “हठधर्मी रवैये” की तीखी आलोचना की। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने स्पष्ट कहा कि विकास से
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता मेट्रो रेल परियोजना को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने विकास कार्यों में बाधा डालने और मुद्दे का राजनीतिकरण करने के लिए राज्य सरकार के अधिकारियों के “हठधर्मी रवैये” की तीखी आलोचना की। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने स्पष्ट कहा कि विकास से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
यह मामला कोलकाता में एक महत्वपूर्ण मेट्रो रेल परियोजना के निर्माण से जुड़ा है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा कथित तौर पर सहयोग नहीं किया जा रहा था। अदालत ने इस बात पर गहरी आपत्ति जताई कि एक चुनी हुई सरकार मदद के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाए।
‘आपके लिए त्योहार विकास से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं’
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने राज्य सरकार के वकील द्वारा दी गई दलीलों पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें त्योहारों के आयोजन के कारण निर्माण कार्य के लिए पुलिस सहायता प्रदान करने में असमर्थता जताई गई थी।
“आपने हाई कोर्ट में कहा था कि हमें त्योहारों का आयोजन करना है, इसलिए हम निर्माण कार्य के लिए पुलिस सहायता नहीं दे सकते हैं। आपके लिए त्योहार विकास से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।”- जस्टिस जॉयमाल्य बागची
अदालत ने कहा कि यह परियोजना राष्ट्रीय परिषद की घोषणा से काफी पहले ही घोषित हो चुकी थी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वह विकास को रोकने के लिए इसे एक और बहाना नहीं बनने देगी।
सरकार की दलील से संतुष्ट नहीं हुई बेंच
पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने पक्ष में सार्वजनिक सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं का हवाला दिया। सरकार ने तर्क दिया कि जिस कॉरिडोर पर निर्माण होना है, उसका उपयोग एम्बुलेंस और अंग प्रत्यारोपण वाले वाहनों द्वारा अक्सर किया जाता है, इसलिए ट्रैफिक व्यवस्था के लिए और समय की आवश्यकता है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की बेंच इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई। चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की कि राज्य के अधिकारियों की तरफ से गंभीर चूक के बावजूद, कलकत्ता हाई कोर्ट ने काफी संयम दिखाया है। कोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज किया कि अधिकारियों का रवैया केवल कोलकाता शहर में मेट्रो रेल परियोजना में देरी करने और उसे रोकने की मंशा को दर्शाता है।
अदालत ने कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा पारित आदेश में कोई खामी नहीं पाई और विश्वास जताया कि यह महत्वपूर्ण परियोजना समय पर पूरी हो जाएगी। कोर्ट ने कहा, “हमें यह बिल्कुल पसंद नहीं है कि राज्य सरकार हमारे दरवाजे पर आकर कहे कि कृपया आइए और हमें बचाइए। हर चीज का राजनीतिकरण न करें। यह विकास से जुड़ा मुद्दा है।”