US-Iran Tension: हवाई और ड्रोन हमलों के बाद क्या टिकेगा सीजफायर? अमेरिका-ईरान के बीच दोहा में आज महाबैठक

US-Iran Ceasefire: हालिया हवाई और ड्रोन हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कतर के दोहा में हाई-लेवल बैठक होगी। डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य चेतावनी और ईरान के पलटवार के बीच सीजफायर पर सस्पेंस गहरा गया है।

Jun 29, 2026 - 09:30
US-Iran Tension: हवाई और ड्रोन हमलों के बाद क्या टिकेगा सीजफायर? अमेरिका-ईरान के बीच दोहा में आज महाबैठक

Tehran: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। हाल ही में हुए भीषण हवाई और ड्रोन हमलों के बाद अमेरिका और ईरान एक बार फिर एक-दूसरे पर हमले रोकने और टेबल पर बैठने के लिए तैयार हो गए हैं। मंगलवार, 30 जून को दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच कतर की राजधानी दोहा में एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-लेवल मीटिंग होने जा रही है।

इस आपातकालीन बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच हुए सीजफायर (युद्धविराम) समझौते को टूटने से बचाना है। पिछले कुछ दिनों से दोनों महाशक्तियों के बीच लगातार हो रही सैन्य झड़पों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी थी, जिससे इस क्षेत्र में एक बड़े युद्ध का खतरा मंडराने लगा था।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी अंतरिम सहमति

एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान इस बात पर सहमत हुए हैं कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को लेकर कतर में बातचीत का दौर जारी रहेगा, तब तक कोई भी पक्ष किसी प्रकार की सैन्य गतिविधि या उकसावे वाली कार्रवाई को अंजाम नहीं देगा। आपको बता दें कि इस साल 28 फरवरी को दोनों देशों के बीच शुरू हुए इस खूनी संघर्ष को थामने के लिए महज 11 दिन पहले ही एक अंतरिम समझौता हुआ था।

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हालांकि, इस समझौते की शर्तों और शामिल मुद्दों को लेकर दोनों देशों की ओर से विरोधाभासी बयान सामने आ रहे थे। बयानों में दिख रहे इसी अंतर के कारण सीजफायर की मजबूती पर लगातार सस्पेंस बना हुआ था और यह आशंका जताई जा रही थी कि यह डील किसी भी वक्त टूट सकती है।

अमेरिकी एयरस्ट्राइक और ईरान का पलटवार

इस कूटनीतिक प्रयास के बीच जमीनी हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका द्वारा किए गए नए हवाई हमलों के जवाब में ईरान ने रविवार (28 जून) को बहरीन और कुवैत में स्थित ठिकानों को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू कर दिए थे।

इसके साथ ही तेहरान ने खुले तौर पर धमकी दी थी कि यदि वॉशिंगटन ने अपनी सैन्य आक्रामकता और हवाई हमले बंद नहीं किए, तो वह युद्ध को खत्म करने के लिए चल रही शांति वार्ता को पूरी तरह से ठप कर देगा। ईरान के इस कड़े रुख के बाद ही दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने के लिए कतर को मध्यस्थता के लिए आगे आना पड़ा।

डोनाल्ड ट्रंप ने दी ईरान का अस्तित्व मिटाने की चेतावनी

इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार (27 जून) को एक बड़ा बयान देकर सनसनी फैला दी थी। ट्रंप ने तेहरान पर होर्मुज स्ट्रेट के पास एक कमर्शियल तेल टैंकर पर हमला करने और सीजफायर समझौते का उल्लंघन करने का सीधा आरोप लगाया था। राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ईरान के हमले जारी रहे, तो ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा।

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अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा, “अमेरिकी विमानों ने सीजफायर तोड़ने के जवाब में ईरानी मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज और कोस्टल रडार साइट्स को फिर से तबाह कर दिया है। ये कभी नहीं सुधरेंगे!” उन्होंने आगे लिखा कि एक वक्त ऐसा आ सकता है जब हमें उस काम को सेना के जरिए पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जिसे हमने कामयाबी से शुरू किया था।

दोहा बैठक पर टिकी दुनिया की नजरें

इस बेहद आक्रामक माहौल और जुबानी जंग के बीच अब सबकी निगाहें दोहा में होने वाली इस हाई-लेवल मीटिंग पर टिक गई हैं। कतर की मध्यस्थता में होने वाली इस बातचीत का मुख्य एजेंडा 11 दिन पहले हुए अंतरिम समझौते को और अधिक मजबूत और व्यावहारिक बनाना है, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित सैन्य टकराव को टाला जा सके। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोहा में यह बातचीत बेनतीजा रहती है, तो होर्मुज स्ट्रेट में कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर पड़ेगा।

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