रूस के पाले में भारत की तोपों की ताकत: आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ की पुतिन के जनरल से ऐतिहासिक मुलाकात
भारतीय सेना के प्रमुख जनरल धीरज सेठ की रूस यात्रा से दोनों देशों के रक्षा संबंध और मजबूत हुए हैं। इस अहम दौरे के दौरान तोपखाने के आधुनिकीकरण, स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति और सैनिकों की साझा ट्रेनिंग पर रणनीतिक चर्चा हुई है।
Moscow: भारतीय सेना और रूस के बीच आपसी रणनीतिक और रक्षा संबंधों को एक नई गति मिली है। हाल ही में, भारतीय सेना के प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने रूस का एक महत्वपूर्ण दौरा किया। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य ताकत को बढ़ाने, तोपखाने (आर्टिलरी) के आधुनिकीकरण और संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण जैसे गंभीर मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। पिछले आठ वर्षों में किसी सेवारत भारतीय सेना प्रमुख की यह पहली रूस यात्रा है, जो इस लिहाज से बेहद खास मानी जा रही है।
मॉस्को में रक्षा अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें
अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान, जनरल धीरज सेठ ने मॉस्को में रूस के रक्षा उप-मंत्री जनरल यूनुस-बेक येवकुरोव और रूसी सेना प्रमुख कर्नल जनरल आंद्रे मोर्दविचेव से मुलाकात की। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच संयुक्त क्षमता विकास, पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान और आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करना था।
चर्चा के दौरान मुख्य रूप से भारतीय सेना के पास पहले से मौजूद रूसी मूल के सैन्य उपकरणों के स्पेयर पार्ट्स और उनकी नियमित मरम्मत की आपूर्ति पर जोर दिया गया। भारतीय सेना की सूची में शामिल असॉल्ट राइफल, बख्तरबंद गाड़ियां, टैंक, एयर डिफेंस सिस्टम और रॉकेट लॉन्चर के लिए यह स्पेयर सपोर्ट बेहद जरूरी है।
सेंट पीटर्सबर्ग में आर्टिलरी अकादमी का दौरा और आधुनिकीकरण पर जोर
अपनी यात्रा के दूसरे चरण में, जनरल सेठ ने सेंट पीटर्सबर्ग स्थित प्रतिष्ठित ‘मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी अकादमी’ का दौरा किया। वहां उन्होंने फैकल्टी सदस्यों के साथ आर्टिलरी के आधुनिकीकरण और आधुनिक ट्रेनिंग के तरीकों पर गहराई से विचार-विमर्श किया।
इस यात्रा के दौरान उन्हें ऐतिहासिक पीटर एंड पॉल किले में पारंपरिक तोप दागने का विशेष सम्मान भी प्रदान किया गया। यह दौरा भारत और रूस के बीच आपसी भरोसे की गहरी नींव को और पुख्ता करता है।
टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के भविष्य पर मंथन
भारतीय सेना के आर्मर्ड कोर और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री में रूसी प्लेटफॉर्म की भूमिका हमेशा से अहम रही है। वर्तमान में, भारतीय सेना के पास हजारों बीएमपी (BMP) प्लेटफॉर्म मौजूद हैं, जो बख्तरबंद मोबिलिटी ढांचे का मुख्य हिस्सा हैं। अब रूस नई पीढ़ी के इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल को बढ़ावा दे रहा है।
इसके अलावा, भविष्य के मुख्य युद्धक टैंक (मेन बैटल टैंक) की जरूरत को पूरा करने के लिए भी चर्चा हुई। भारत का ‘फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल’ (FRCV) प्रोग्राम पुराने पड़ रहे टी-72 और टी-90 टैंकों के बेड़े को आधुनिक पीढ़ी के टैंकों से बदलने के लिए तैयार किया गया है। रूस ने इन उन्नत टैंकों या भविष्य के प्लेटफॉर्म को मिलकर विकसित करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे भारतीय तोपों और बख्तरबंद दस्तों को भविष्य के युद्धों के लिए और अधिक ताकतवर बनाया जा सके।