जीतू पटवारी ने सीएम डॉ. मोहन यादव को लिखा पत्र, मध्यप्रदेश में कृषि मंडियों की बदहाली पर उठाए सवाल

मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेश की कृषि मंडियों में किसानों को मिल रही मूलभूत सुविधाओं पर सवाल किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की 110 मंडियां ऐसी हैं जिनकी वार्षिक आय 3 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके बावजूद कई मंडियों में किसानों के लिए

Aug 21, 2026 - 11:30
जीतू पटवारी ने सीएम डॉ. मोहन यादव को लिखा पत्र, मध्यप्रदेश में कृषि मंडियों की बदहाली पर उठाए सवाल

मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेश की कृषि मंडियों में किसानों को मिल रही मूलभूत सुविधाओं पर सवाल किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की 110 मंडियां ऐसी हैं जिनकी वार्षिक आय 3 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके बावजूद कई मंडियों में किसानों के लिए पेयजल, छाया, शौचालय, सड़क, बैठने और उपज के सुरक्षित भंडारण जैसी बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि मध्यप्रदेश मंडी बोर्ड मंडियों का वर्गीकरण मंडी शुल्क और अनुज्ञप्ति शुल्क से होने वाली आय के आधार पर करता है। ऐसे में अधिक आय वाली मंडियों के पास विकास और सुविधाओं के लिए अपेक्षाकृत अधिक संसाधन होने चाहिए। इसके बावजूद कई मंडियों में किसानों को जरूरी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

कृषि मंडियों की अव्यवस्थाओं पर सरकार को घेरा

जीतू पटवारी ने कहा कि राघौगढ़ मंडी में स्वच्छ पेयजल और कैंटीन जैसी सुविधाओं का अभाव बताया जा रहा है। वहीं सीधी की नई सब्जी मंडी में सड़क, शौचालय और गोदाम जैसी सुविधाएं अधूरी हैं। इसी तरह सबलगढ़ मंडी में छाया, पानी और शौचालय की समस्या सामने आने की बात भी अपने पत्र में लिखी है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि किसान और व्यापारी मंडी शुल्क के रूप में राशि जमा करते हैं, लेकिन इसके अनुपात में मंडियों में सुविधाएं दिखाई नहीं देतीं। उन्होंने सवाल किया कि मंडी शुल्क के रूप में प्राप्त राशि का कितना हिस्सा मंडियों के विकास और किसान सुविधाओं पर खर्च किया जा रहा है।  उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वयं मंडियों की मूलभूत सुविधाओं और पुरानी संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि करोड़ों रुपये की आय अर्जित करने वाली मंडियों में किसान आज भी पानी, छाया, शौचालय, बैठने की जगह और उपज के सुरक्षित भंडारण जैसी बुनियादी जरूरतों से क्यों जूझ रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि “मंडी शुल्क वसूलते समय किसान सरकार को हितग्राही नहीं राजस्वदाता दिखाई देता है, लेकिन जब किसान को सुविधाएं देने की बारी आती है तो वही किसान सरकार की प्राथमिकता से गायब हो जाता है।”

सार्वजनिक ऑडिट कराने की मांग

जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश की सभी मंडियों की आय, व्यय और उपलब्ध सुविधाओं का मंडीवार सार्वजनिक ऑडिट कराया जाए। इसके साथ ही 3 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक आय वाली 110 मंडियों के लिए समयबद्ध मूलभूत सुविधा सुधार योजना घोषित की जाए। उन्होंने कहा है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए मंडी पहुंचने पर सम्मानजनक और जरूरी सुविधाएं मिलना उनका अधिकार है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार से मामले में तत्काल संज्ञान लेकर प्रदेश की मंडियों में पेयजल, शौचालय, छाया, सड़क, बैठने की व्यवस्था और भंडारण जैसी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि “किसानों से शुल्क लेकर उन्हें बदहाल मंडियां देना किसान कल्याण नहीं, बल्कि किसान की कमाई पर सरकारी उपेक्षा का टैक्स है।”

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।