ईद पर डूबा भोपाल का चाँद: मशहूर शायर बशीर बद्र का निधन, अदब की दुनिया में शोक

“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए” इस शानदार शेर को कहने वाले मकबूल शायर बशीर बद्र साहब फानी दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। दुनिया से रुखसती के लिए उन्होंने ईद का दिन चुना। हालांकि कुछ लोग कहीं नहीं जाते…वे हमेशा ज़िंदा रहते

May 28, 2026 - 16:30
ईद पर डूबा भोपाल का चाँद: मशहूर शायर बशीर बद्र का निधन, अदब की दुनिया में शोक

“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए”

इस शानदार शेर को कहने वाले मकबूल शायर बशीर बद्र साहब फानी दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। दुनिया से रुखसती के लिए उन्होंने ईद का दिन चुना। हालांकि कुछ लोग कहीं नहीं जाते…वे हमेशा ज़िंदा रहते हैं और बशीर साहब भी उन्हीं में शुमार हैं। उनके कलाम इस दुनिया में पीढ़ियों तक उजाले भरते रहेंगे। हम भोपाल वाले शुक्रगुज़ार हैं कि उन्होंने अरसे तक इस शहर को अपने नूर से रौशन किया।

मशहूर शायद बशीर बद्र का निधन

पद्मश्री और साहित्य अकामदी सम्मान से सम्मानित मशहूर उर्दू शायर बशीर बद्र साहब का गुरुवार को 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने भोपाल स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से डिमेंशिया और उम्र संबंधी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से अदब की दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई।

डॉ. बशीर बद्र साहब का जन्म 15 फरवरी 1935 को अयोध्या में हुआ था। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एम.ए. और पीएच.डी. की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने अलीगढ़ और मेरठ कॉलेज में उर्दू के प्रोफेसर के रूप में पढ़ाया। 1987 के मेरठ सांप्रदायिक दंगों में उनका घर जल गया और अनगिनत अप्रकाशित ग़ज़लें-नज़्में खाक हो गईं। इसके बाद उस शहर से उनका कुछ मोहभंग हुआ और वे भोपाल शिफ्ट हो आए। यहीं उन्होंने डॉ. राहत बद्र से शादी की और बाकी ज़िंदगी इस शहर को अपनी शायरी का नूर बख्शते हुए गुज़ारी।

अपनी शायरी के ज़रिए हमेशा रहेंगे साथ 

बशीर बद्र उर्दू अदब के उन दुर्लभ शायरों में शुमार थे जिनकी ज़बान बेहद सादी, दिलकश और आम आदमी की बोली थी। उनकी शायरी में मोहब्बत, तन्हाई, दर्द, दोस्ती और ज़िंदगी के गहरे फलसफे बयान होते थे। उनके कलाम न सिर्फ मुशायरों में गूंजे बल्कि आम बोलचाल, राजनीति और पॉपुलर कल्चर का हिस्सा बन गए। जगजीत सिंह सहित कई सुप्रसिद्ध गायकों ने उनकी ग़ज़लों को अपनी आवाज दी। आज उन्हें चाहने वालों की आंखें नम हैं। लेकिन कुछ लोग कभी विदा नहीं होते। वे बस अपना ठिकाना बदल लेते हैं। अब हम उन्हें उनकी शायरी, नज़्मों, गज़लों में पाएंगे। यही उनका स्थायी पता है। उनकी शायरी पीढ़ी दर पीढ़ी उजाले बिखेरती रहेगी। हम हमेशा उन्हें पढ़ते रहेंगे और उनकी यादों के उजाले हमें रौशनी देते रहेंगे।

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।