लोकसभा में प्रियंका गांधी के कड़े तेवर, बोलीं- छात्रों को सड़क से हटाया जा सकता है, उनके सवालों को नहीं, PM Modi को दी ये सलाह
संसद में पिछले कई दिनों से चल रहा गतिरोध आज थोड़ा थम गया, केंद्र सरकार ने कल लोकसभा में जिस सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधनों की रोकथाम, संशोधन विधेयक, 2026 (Public Examinations Prevention of Unfair Means Amendment Bill, 2026) को लोकसभा में पेश किया था आज उसपर आखिरकार चर्चा शुरू हुई, सत्ता पक्ष और विपक्ष की
संसद में पिछले कई दिनों से चल रहा गतिरोध आज थोड़ा थम गया, केंद्र सरकार ने कल लोकसभा में जिस सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधनों की रोकथाम, संशोधन विधेयक, 2026 (Public Examinations Prevention of Unfair Means Amendment Bill, 2026) को लोकसभा में पेश किया था आज उसपर आखिरकार चर्चा शुरू हुई, सत्ता पक्ष और विपक्ष की सहमति के बाद इसपर रात 10 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है, जिसमें दोनों पक्षों के सांसद अपनी अपनी बात रख सकेंगे।
लोकसभा में कार्यवाही शुरू हुई लेकिन विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया, विपक्ष की मांग थी कि छात्रों पर हुए लाठीचार्ज पर गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब दें, शोर शराबे के चलते कार्यवाही 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई , इसके बाद जब फिर कार्यवाही शुरू हुई तो फिर शोर शराबा शुरू हो गया, स्पीकर ओम बिरला ने अनुरोध किया कि आज बहुत महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा करनी है जो छात्रों एक हिट के लिए है इसलिए आप सभी इसमें भाग लें और अपने विचार रखें।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी जब बोलने के लिए खड़ी हुई तो उनके तेवर कड़े थे, वे जिस तरह पिछले कई दिनों से सड़क पर लगातार सरकार पर हमलावर हैं वैसी ही आज लोकसभा में दिखाई दी, उन्होंने कहा छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़ने की, उनपर लाठियां बरसाने की क्या जरूरत थी? नौजवान लड़कियों को जलील करते हुए उनके कपड़े फाड़ने की, उनको बेरहमी से पिटवाने की क्या जरुरत थी? देश के युवाओं पर पैलेट गन, AK-47 चलवाने की क्या जरूरत थी, क्या वे आतंकवादी हैं? आज ये सवाल सिर्फ कांग्रेस पार्टी नहीं, बल्कि पूरा देश पूछ रहा है और इसका जवाब देने की जिम्मेदारी सरकार की है। ये सरकार देश के नौजवानों से क्यों डरती है, उनकी आवाज दबाने का हक सरकार को किसने दिया?
प्रियंका गांधी ने कहा पिछले दिनों हजारों बच्चे सड़क पर उतरे और गांधी जी के दिखाए रास्ते पर चलते हुए अपना दर्द बयान किया। ये उस भारत के बच्चे हैं- जो गांवों, कस्बों, शहरों, महानगरों में रहते हैं। जहां इनके लिए मां गहने बेच देती है, पिता जमीन गिरवी रख देता है। एक परिवार जिन बच्चों पर जिंदगी भर की कमाई खर्च कर देता है, आज उन्हीं बच्चों को लगने लगा है कि मेहनत से ज्यादा बेईमानी मायने रखती है। ऐसे में सिर्फ छात्र नहीं- उम्मीद हार जाती है।
उन्होंने कहा इन परेशान बच्चों की मांग थी कि पेपर लीक करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जो सिस्टम उनके भविष्य को कुचल रहा है, उसे सुधारा जाए, जिस मंत्री के कार्यकाल में ये सब हो रहा है, वो अपने पद से इस्तीफा दें, छात्रों पर बर्बरता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और माफी मांगी जाए, संविधान के द्वारा दिए गए शिक्षा और अभिव्यक्ति के अधिकार को कायम रखा जाए। क्या ये मांग करना उनका अधिकार नहीं है, बदले में उन्हें क्या मिला लाठियां?
प्रियंका गांधी ने कहा देश के एजुकेशन सिस्टम में कई सारी खामियां भर गई हैं। कई बच्चे दबाव में आकर जान दे देते हैं तो कई डिप्रेशन में चले जाते हैं। परिवारों पर भी भारी दबाव है और उन्हें कर्ज लेना पड़ता है। उसके बावजूद बच्चों के अच्छे भविष्य की कोई गारंटी नहीं रह गई है। सरकार ने रोजगार पैदा करने वाले सेक्टर्स को कमजोर कर दिया है आज देश का एग्जाम सिस्टम फेल हो चुका है,10 साल में 152 पेपर लीक हुए और 7.5 करोड़ छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़ किया गया, मगर एक भी माफिया को सजा नहीं हुई।
प्रियंका गांधी ने पत्रकारों को कहा पालतू मीडिया
प्रियंका गांधी ने कहा देश के युवाओं का भरोसा इस पूरे सिस्टम से टूट चुका है। इस भरोसे को फिर से कायम करने के लिए सिस्टम के अंदर से जवाब नहीं ढूंढा जा सकता। सिस्टम के दायरे से बाहर निकलना पड़ता है, ठोस प्रयास करने पड़ते हैं। लेकिन अफसोस है कि मोदी सरकार ये बात समझ नहीं पा रही है। सरकार को अभी भी लगता है कि PR और पालतू मीडिया के सहारे उनकी नैय्या पार हो जाएगी।
धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत पर भड़कीं प्रियंका गांधी
कांग्रेस सांसद ने कहा कुछ दिन पहले शर्मनाक परिस्थितियों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। लेकिन कल जब वे संसद पहुंचे तो BJP सांसदों ने उनका ऐसा स्वागत किया, मानों कोई सुपरस्टार आया हो। जब ये सब हो रहा था, तो महाराष्ट्र में एक परिवार पेपर लीक पीड़ित बेटी की आत्महत्या का शोक मना रहा था। आखिर सरकार को किस बात का गर्व है? जहां आंखों में शर्म होनी चाहिए, वहां फूल-माला से स्वागत किया जा रहा था। इस सबके बीच- PM मोदी ने एक नया शिक्षा मंत्री चुना, जिसने एक गर्भवती महिला के रेपिस्टों की रिहाई पर सहमति व्यक्त की थी। ऐसा करके PM मोदी ने देश की करोड़ों लड़कियों को क्या संदेश दिया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सच्चाई से बहुत दूर हो चुके हैं
पीएम मोदी के वीडियो पर पटाक्ष करते ही प्रियंका गांधी ने कहा कि आप फिर से यदि जेन ज़ी का भरोसा जितना चाहते है तो नए नए एंगल से अपन फोन से वीडियो बनाने से कुछ नहीं होगा, प्रधानमंत्री मोदी को कैमरे का एंगल नहीं दिल का एंगल बदलना होगा। उन्होंने कहा आज हम सदन में एक ऐसे विधेयक संशोधन पर चर्चा कर रहे हैं, जो 2024 में पारित हो चुका था। इसमें मुख्य संशोधन यही है कि पेपर लीक के अपराधियों के लिए सजा बढ़ाई जाएगी, लेकिन जब से ये विधेयक पारित हुआ है सरकार ने एक भी अपराधी को सजा नहीं दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सच्चाई से बहुत दूर हो चुके हैं। उन्हें समझना होगा कि सिर्फ नई-नई कमेटियां बनाने से काम नहीं चलेगा।
देश के नौजवान न्याय मांग रहे हैं भीख नहीं
छात्रों को सड़क से हटाया जा सकता है, लेकिन उनके सवालों को नहीं। सच यही है कि वो लाठियां बच्चों की पीठ से ज्यादा- मोदी सरकार की साख पर पड़ी है। देश के नौजवान न्याय मांग रहे हैं भीख नहीं। वे सरकार गिराने नहीं, अपना भरोसा बचाने के लिए आए थे। अगर देश का युवा निराश हो गया, उसकी उम्मीद टूट गई- तो सबसे बड़ी हार भारत की होगी। हम जान दे देंगे, लेकिन भारत की हार नहीं होने देंगे।