ट्विशा शर्मा मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, अदालत का कहना- निष्पक्ष जांच हो, मीडिया से की ये अपील

भोपाल में हुए ट्विशा शर्मा मौत के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई रखी गई। इस मामले में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उनकी सास पूर्व जिला जज है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह कहा जा रहा है कि न्यायपालिका मुकदमे का विवरण दे रही है। बता दें कि 12 मई को

May 25, 2026 - 14:30
ट्विशा शर्मा मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, अदालत का कहना- निष्पक्ष जांच हो, मीडिया से की ये अपील

भोपाल में हुए ट्विशा शर्मा मौत के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई रखी गई। इस मामले में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उनकी सास पूर्व जिला जज है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह कहा जा रहा है कि न्यायपालिका मुकदमे का विवरण दे रही है। बता दें कि 12 मई को ट्विशा अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली थी।

बता दें कि भोपाल के वकील समर्थ सिंह के साथ उनकी शादी को केवल 5 महीने हुए थे। इस संवेदनशील मामले को अदालत में एक युवा लड़की की उसके ससुराल में हुई अप्राकृतिक मौत में कथित संस्थागत पक्षपात और प्रक्रियागत विसंगतियां के तहत सूचीबद्ध किया गया है। मामले में सुप्रीम कोर्ट का क्या कहना है।

सुप्रीम कोर्ट ने जताया दुख

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को मामले की शुरुआती जांच के तौर तरीकों पर गहरा दुख जताते हुए देखा गया। यह कहा जा रहा है कि न्यायपालिका आरोपियों को संरक्षण दे रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि न्यायपालिका निष्पक्ष ट्रायल की अनुमति नहीं दे रही है। कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि पीड़ित और आरोपी पक्ष जांच में सहयोग करें। हमें इस पर कोई संदेह नहीं है कि राज्य एजेंसी या सीबीआई जो भी जांच कर रहे हैं वह जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाएंगे या सच्चाई का पता लगाएंगे। कोर्ट ने कहा कि हमें अपने सिस्टम पर पूरा विश्वास है लेकिन हम चाहते हैं कि इस मामले की जांच एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा की जाए, घटना में बिना भेदभाव के जांच की जरूरत है।

हाईकोर्ट की सराहना मीडिया से गुजारिश

इस मामले में शीर्ष अदालत ने ट्विशा शर्मा का दूसरा पोस्टमार्टम कराने का आदेश देने के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की सराहना की है। इसी के साथ मीडिया से कड़े शब्दों में या आग्रह किया गया है कि मामले के बारे में कोई भी जानकारी देने से पहले संयम बनाकर रखें। कोर्ट ने कहा हमारी मीडिया से गुजारिश है कि पीड़ित परिवार के बयान रिकॉर्ड ना करें उनके गहरे दुख को टीवी की साउंड बाइट तक सीमित न रखें।

बयान देने पर लगाई रोक

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर से सभी पीड़ित और आरोपियों को मीडिया में किसी भी तरह का बयान देने से रोक दिया गया है। कोर्ट के आदेश के बाद आरोपी वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि आरोपी के परिवार से जुड़े पूर्व जज जांच के संबंध में मीडिया को कोई बयान नहीं देंगे। पीड़ित पक्ष के लोगों से भी सार्वजनिक बयान देने से मना किया गया है।

सॉलिसिटर जनरल ने जताया दुख

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सपना के सिफारिश की गई है। इस दौरान मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने यह दलील दी है कि मीडिया के हस्तक्षेप की वजह से ही जांच में प्रगति हुई है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर को भावुक टिप्पणी करते हुए देखा गया। उन्होंने कहा कि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना का सामना करने से बेहतर है की बेटी का तलाक हो जाए।