उमंग सिंघार का सरकार पर हमला, बोले 10 प्रमुख विभागों की 711 घोषणाएं अब भी लंबित, लखपति दीदी पर भी उठाये सवाल

मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्य प्रदेश सरकार पर बड़ा हमला किया हैं, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी सरकार पर जनता से कियेवादे पूरे नहीं करने के आरोप लगाये हैं, सिंघार ने कहा ये घोषणाओं की सरकार है इसकी पोल CM Office की मॉनिटरिंग रिपोर्ट से खुल गई है, सिंघार ने तंज कसते

Jul 4, 2026 - 13:30
उमंग सिंघार का सरकार पर हमला, बोले 10 प्रमुख विभागों की 711 घोषणाएं अब भी लंबित, लखपति दीदी पर भी उठाये सवाल

मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्य प्रदेश सरकार पर बड़ा हमला किया हैं, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी सरकार पर जनता से कियेवादे पूरे नहीं करने के आरोप लगाये हैं, सिंघार ने कहा ये घोषणाओं की सरकार है इसकी पोल CM Office की मॉनिटरिंग रिपोर्ट से खुल गई है, सिंघार ने तंज कसते हुए कहा दीदी अब नहीं रही लखपति…

उमंग सिंघार ने X पर लिखा- मुख्यमंत्री डॉ  मोहन यादव की बड़ी-बड़ी घोषणाओं की हकीकत अब खुद CM Office की मॉनिटरिंग रिपोर्ट से सामने आ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 10 प्रमुख विभागों की 711 घोषणाएं अब भी लंबित हैं। यानी विकास के नाम पर किए गए करीब 70% वादे आज भी अधूरे हैं।

सबसे खराब स्थिति PWD की है, जहां 191 में से 149 घोषणाएं अब तक पूरी नहीं हो सकी हैं। वहीं पंचायत, नगरीय विकास, स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य और जनजातीय कार्य जैसे विभागों में भी 70% से अधिक घोषणाएं अधूरी पड़ी हैं। सवाल यह है कि क्या सरकार के लिए घोषणा करना ही उपलब्धि बन गया है? हर मंच से नए वादे किए जाते हैं, लेकिन पुराने वादों का हिसाब कोई नहीं देता। घोषणाएं होती हैं, फाइलें बनती हैं और फिर वही घोषणाएं वर्षों तक कागज़ों में दबी रह जाती हैं।

जनता अब नए वादे नहीं, पुराने वादों का हिसाब चाहती है: कांग्रेस 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा,  विकास की पहचान घोषणाओं से नहीं, बल्कि ज़मीन पर पूरे हुए कामों से होती है। मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं का यह हाल है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के ढाई साल के कार्यकाल में जनता को अधूरी घोषणाएं ज़्यादा मिलीं या पूरे हुए विकास कार्य? जनता अब नए वादे नहीं, पुराने वादों का हिसाब चाहती है।

लखपति दीदी योजना पर उमंग सिंघार ने उठाये सवाल 

उमंग सिंघार ने कहा मध्यप्रदेश सरकार की एक और योजना की विफलता सामने आ रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, ‘लखपति दीदी’ की सालाना कमाई अब हजारों में सिमट गई है। सरकार ने बड़े-बड़े मंचों से ‘लखपति दीदी’ का सपना दिखाया। दावा किया गया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी और उनकी आय लाखों तक पहुंचेगी। लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है।

क्या योजनाएं सिर्फ विज्ञापनों, भाषणों और सरकारी पोस्टरों तक सीमित हैं 

रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में महिलाओं की सालाना आय घटकर हजारों रुपये में सिमट गई है और हजारों महिलाओं की आय ₹25,000 से भी कम रह गई है। कई महिलाओं का कहना है कि पहले काम मिलता था, लेकिन अब न काम है और न ही उत्पाद बेचने के लिए पर्याप्त बाज़ार। सवाल यह है कि अगर ज़मीनी हकीकत यही है, तो ‘लखपति दीदी’ का सपना आखिर किसके लिए था? क्या योजनाएं सिर्फ विज्ञापनों, भाषणों और सरकारी पोस्टरों तक सीमित रह गई हैं?

कांग्रेस ने उठाई योजनाओं के क्रियान्वयन, निगरानी की समीक्षा की मांग 

उमंग सिंघार ने कहा  जब प्रचार ‘लखपति’ का हो और हकीकत ‘हजारपति’ की निकल आए, तब सिर्फ योजनाओं की नहीं, बल्कि उनके क्रियान्वयन और निगरानी की भी समीक्षा होनी चाहिए। महिलाओं को नारों की नहीं, बल्कि स्थायी रोज़गार, बेहतर मार्केटिंग और बढ़ती आय की ज़रूरत है। क्योंकि आत्मनिर्भरता भाषणों से नहीं, आमदनी से साबित होती है।

 

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।