पश्चिम बंगाल: TMC में अंदरूनी कलह के बीच ममता बनर्जी पर कानूनी शिकंजा, कोलकाता पुलिस ने दर्ज की FIR, जानें पूरा मामला

पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी को मिली करारी शिकस्त के बाद राज्य में राजनीतिक परिदृश्य बदलने लगे हैं। ममता बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। एक तरफ पार्टी टूटने का गम है तो वहीं अब दूसरी ओर कानूनी कार्रवाई का शिकंजा भी कस चुका है। बता

Jun 12, 2026 - 18:30
पश्चिम बंगाल: TMC में अंदरूनी कलह के बीच ममता बनर्जी पर कानूनी शिकंजा, कोलकाता पुलिस ने दर्ज की FIR, जानें पूरा मामला

पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी को मिली करारी शिकस्त के बाद राज्य में राजनीतिक परिदृश्य बदलने लगे हैं। ममता बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। एक तरफ पार्टी टूटने का गम है तो वहीं अब दूसरी ओर कानूनी कार्रवाई का शिकंजा भी कस चुका है।

बता दें कि टीएमसी की मुखिया ममता बनर्जी पर नई मुसीबत आ गई है। कोलकाता में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। ममता बनर्जी पर बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले कोलकाता में धरने के मंच से भाषण में सांप्रदायिक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, 9 मार्च 2026 को एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बयान दिया था, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि अपने भाषण में उन्होंने कहा था कि यदि एक विशेष समुदाय एकजुट हो जाए, तो इसके अन्य लोगों के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ममता के इसी भाषण को आधार बनाते हुए कारोबारी तुषार कांति दास ने कोलकाता के हेयर स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर कोलकाता पुलिस ने अब मामला दर्ज कर एफआईआर दर्ज कर ली है।

इन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर

इस मामले में एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196(1), 351(2) और 352 के तहत दर्ज की गई है। धारा 196(1) विभिन्न धार्मिक, जातीय या भाषाई समूहों के बीच वैमनस्य, घृणा या शत्रुता को बढ़ावा देने से संबंधित है, जबकि धारा 351(2) आपराधिक धमकी से जुड़ी है, जिसके तहत किसी व्यक्ति या समूह को भयभीत करने या धमकाने के उद्देश्य से दिए गए कथित बयानों को शामिल किया जाता है।

वहीं, धारा 352 जानबूझकर किसी व्यक्ति या समुदाय को उकसाने, अपमानित करने या शांति भंग होने की आशंका पैदा करने वाले कृत्यों से संबंधित है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर इन धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

तृणमूल कांग्रेस में टूट

ममता के खिलाफ एफआईआर ऐसे समय में दर्ज हुई है जब उनकी पार्टी टीएमसी पर संकट मंडरा रहा है। टीएमसी के कई विधायक और सांसदों अपने बागी तेवर दिखा रहे हैं। इतना ही नहीं पिछले 5 दिनों में 4 राज्यसभा सांसद (सुखेंदु शेखर, सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बराइक और कोयल मल्लिक) इस्तीफा दे चुके हैं।

बता दें कि पार्टी में नेताओं के पलायन का दौर ममता के लिए बड़ा सिरदर्द है। लोकसभा से भी 20 सांसद अलग होने की खबर है वहीं विधानसभा की बात करें तो, कुल 80 टीएमसी विधायकों में से 58 विधायकों ने एक अलग गुट बना लिया है। इन बागी विधायकों ने ऋतुब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना है। इन विधायकों की सूची भी अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है, जिससे पार्टी के भीतर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।