इंदौर में रिटायर्ड बैंक मैनेजर से जमीन दिलाने के नाम पर की गई धोखाधड़ी, 62.50 लाख ठगे, चार साल बाद दर्ज हुई FIR
इंदौर में जमीन के सौदे के नाम पर एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है। दरअसल पीड़ित ने 2021 से 2022 के बीच रिश्तेदारों को 62.50 लाख रुपये दिए लेकिन न जमीन की रजिस्ट्री हुई और न कब्जा मिला। शिकायत के चार साल बाद पुलिस ने दो
इंदौर में जमीन के सौदे के नाम पर एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है। दरअसल पीड़ित ने 2021 से 2022 के बीच रिश्तेदारों को 62.50 लाख रुपये दिए लेकिन न जमीन की रजिस्ट्री हुई और न कब्जा मिला। शिकायत के चार साल बाद पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दरअसल राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने अतुल पंडित की शिकायत पर हरीश आदले और योगेश भटाने के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार अतुल पंडित अप्रैल 2021 में ग्रामीण बैंक से वरिष्ठ प्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। रिटायरमेंट के बाद मिली एकमुश्त राशि को निवेश करने के दौरान उनके रिश्तेदार हरीश ने बिजलपुर में कृषि भूमि खरीदने का प्रस्ताव दिया। उसने दावा किया कि भविष्य में इस जमीन का व्यावसायिक उपयोग होगा और इसकी कीमत कई गुना बढ़ सकती है। इसी भरोसे में अतुल पंडित ने अलग-अलग किश्तों में आरोपियों को बड़ी रकम दे दी।
कैसे हुआ 62.50 लाख रुपये का लेन-देन?
वहीं पुलिस जांच के मुताबिक वर्ष 2021 से जून 2022 के बीच अतुल पंडित ने कुल 62 लाख 50 हजार रुपये आरोपियों को दिए। इस रकम का कुछ हिस्सा हरीश के भांजे योगेश भटाने के बैंक खाते में भी जमा कराया गया। पीड़ित को भरोसा दिलाया गया था कि तय प्रक्रिया पूरी होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री उनके नाम कर दी जाएगी। समय बीतने के बावजूद न तो जमीन का कब्जा मिला और न ही रजिस्ट्री हुई। जब अतुल पंडित ने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने करीब 31 लाख 90 हजार रुपये लौटा दिए, लेकिन बाकी रकम देने से इनकार कर दिया। शिकायत के अनुसार शेष राशि मांगने पर आरोपियों ने उन्हें धमकाया और आत्महत्या कर फंसाने जैसी बातें भी कहीं। इसके बाद पीड़ित ने पूरे दस्तावेजों के साथ वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत करने का फैसला लिया।
चार साल बाद DCP के निर्देश पर दर्ज हुई FIR
दरअसल अतुल पंडित का कहना है कि वह करीब चार साल तक कार्रवाई की उम्मीद में राजेंद्र नगर थाने के चक्कर लगाते रहे। इस दौरान उन्होंने तत्कालीन पुलिस अधिकारियों से भी शिकायत की, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका। हाल ही में उन्होंने DCP जोन-1 नरेंद्र रावत से मुलाकात कर बैंक लेन-देन और अन्य दस्तावेज सौंपे। दस्तावेजों की जांच के बाद पुलिस को प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी के पर्याप्त आधार मिले जिसके बाद राजेंद्र नगर थाने में दोनों आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। फिलहाल हरीश आदले और योगेश भटाने फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस बैंक ट्रांजैक्शन, जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि जमीन का सौदा किन शर्तों पर हुआ था और आरोपियों की भूमिका किस स्तर तक रही। मामले की जांच जारी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रयास कर रही है।