MP में तालाब निर्माण में करोड़ों के घोटाले का आरोप, कमलनाथ ने प्रदेश सरकार से की निष्पक्ष जांच की मांग
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर तालाब निर्माण के नाम पर बड़े घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में करोड़ों रुपये तालाब बनाने के नाम पर खर्च कर दिए गए, लेकिन तालाब बने ही नहीं। कई जगहों पर सड़क निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढों को तालाब बता दिया
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर तालाब निर्माण के नाम पर बड़े घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में करोड़ों रुपये तालाब बनाने के नाम पर खर्च कर दिए गए, लेकिन तालाब बने ही नहीं। कई जगहों पर सड़क निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढों को तालाब बता दिया गया, जबकि पुराने तालाबों को नया बताकर भुगतान कर लिया गया।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश पहले ही विभिन्न घोटालों के कारण बदनाम हो चुका है और अब सरकार ने तालाब निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये के नए घोटाले को अंजाम दिया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
कमलनाथ ने लगाया तालाब घोटाले का आरोप
कमलनाथ ने कहा कि सरकार ने मध्यप्रदेश में तालाब निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन कई स्थानों पर वास्तविक तालाब बनाए ही नहीं गए। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से उन्होंने आरोप लगाया कि कहीं सड़क निर्माण के दौरान बने गड्ढों और प्राकृतिक नालों को ही तालाब दिखाकर भुगतान कर दिया गया, जबकि कुछ मामलों में वर्षों पुराने तालाबों को नए निर्माण के रूप में दर्ज कर सरकारी राशि निकाल ली गई। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कथित तालाबों की जमीन पर खेती तक की जा रही है, जिससे निर्माण संबंधी दावों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़ा है और इसकी निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
क्या है मामला
मध्यप्रदेश में जल संरचनाओं और तालाब निर्माण योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर हाल के दिनों में कई जिलों से अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि कुछ परियोजनाओं में नए तालाबों के निर्माण के बजाय पहले से मौजूद जलाशयों, प्राकृतिक जल निकासी मार्गों या अन्य स्थानों को नया निर्माण दर्शाकर सरकारी भुगतान किया गया। कुछ मामलों में दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर मिलने की बात भी सामने आई है।
इसी क्रम में दमोह जिले में अमृत सरोवर परियोजना से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर विवाद सामने आया, जहां जांच के दौरान कुछ तालाबों का विवरण उपलब्ध नहीं होने का मामला चर्चा में रहा। वहीं शहडोल जिले में जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) से स्वीकृत तालाब निर्माण कार्यों में भी पुराने जलाशयों अथवा अन्य स्थानों को नया निर्माण दर्शाकर भुगतान किए जाने के आरोप सामने आए हैं। इन मामलों ने योजनाओं के क्रियान्वयन, निगरानी व्यवस्था और सरकारी धन के उपयोग को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष इन्हीं घटनाओं को आधार बनाकर पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है।