Operation Sindoor: पाकिस्तान की फूट गई थीं आंखें; जिस राफेल को ‘गिराने’ का मनाया जश्न, अब वो बना मातम का कारण
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने भारतीय राफेल को मार गिराने के दावे किए थे, लेकिन बाद की रिपोर्टों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए। कहानी के केंद्र में आया X-Guard डिकॉय, जिसने दुश्मन के रडार और मिसाइलों को भ्रमित करने की क्षमता दिखाई।
New Delhi: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराने के कई दावे किए गए थे। इन दावों में राफेल का नाम भी प्रमुखता से सामने आया। हालांकि, बाद में सामने आई रिपोर्टों ने इस कहानी को एक अलग मोड़ दे दिया। दावा किया गया कि पाकिस्तानी सेंसर जिस टारगेट को भारतीय राफेल समझ रहे थे, वह संभवतः असली विमान नहीं बल्कि एक टोड डिकॉय सिस्टम था।
यानी जिस लक्ष्य को पाकिस्तान ने अपनी बड़ी कामयाबी माना, उसके पीछे इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की एक ऐसी तकनीक हो सकती है, जिसका मकसद ही दुश्मन के रडार और मिसाइलों को भ्रमित करना है।
30 किलो का डिकॉय कैसे करता है काम?
राफेल से जुड़ा बताया जा रहा X-Guard एक फाइबर-ऑप्टिक टोड डिकॉय है। इसे लड़ाकू विमान के पीछे केबल के जरिए खींचा जाता है। रिपोर्टों के अनुसार यह करीब 30 किलोग्राम का हल्का सिस्टम है और विमान से काफी दूरी पर रहकर दुश्मन के रडार के सामने एक ज्यादा आकर्षक लक्ष्य पैदा कर सकता है।
इसकी खासियत यह है कि यह केवल कोई साधारण नकली विमान नहीं है। सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल के जरिए दुश्मन के सेंसर को यह भरोसा दिलाने की कोशिश करता है कि निशाने पर वही विमान है, जिसे वह ट्रैक कर रहा है। ऐसे में अगर दुश्मन की मिसाइल उस सिग्नल की तरफ चली जाती है, तो असली लड़ाकू विमान को बचने का मौका मिल सकता है। यही वजह है कि आधुनिक हवाई युद्ध में डिकॉय तकनीक को बेहद अहम माना जाता है।
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SPECTRA के साथ बढ़ जाती है सुरक्षा
राफेल की इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता में SPECTRA सिस्टम की महत्वपूर्ण भूमिका है। X-Guard को इसी इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा ढांचे के साथ जोड़े जाने की रिपोर्ट सामने आई है। इसका मकसद दुश्मन के रडार, मिसाइल और दूसरे सेंसर से आने वाले खतरे को पहचानना और उनका असर कम करना है।
X-Guard जैसे डिकॉय की खासियत यह है कि यह असली विमान की इलेक्ट्रॉनिक पहचान जैसी तस्वीर बनाने की कोशिश करता है। इससे दुश्मन के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि रडार पर दिखाई दे रहा लक्ष्य असली है या उसे जानबूझकर वहां दिखाया जा रहा है।
पाकिस्तान के दावों पर क्यों उठे सवाल?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की तरफ से भारतीय विमानों को नुकसान पहुंचाने के दावे सामने आए थे। बाद की रिपोर्टों में यह संभावना जताई गई कि कुछ कथित हिट असली विमानों के बजाय डिकॉय सिस्टम से जुड़े हो सकते हैं।
हालांकि, यहां एक जरूरी बात यह है कि X-Guard के ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल और हर कथित पाकिस्तानी ‘किल’ के डिकॉय से जुड़ने की बात को सार्वजनिक रूप से पूरी तरह साबित तथ्य मानना जल्दबाजी होगी। कुछ रिपोर्टों ने इसे संभावना और विशेषज्ञ आकलन के तौर पर पेश किया है।
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असली लड़ाई अब आसमान के साथ स्क्रीन पर भी
ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी X-Guard की कहानी आधुनिक हवाई युद्ध की बदलती तस्वीर दिखाती है। अब लड़ाई सिर्फ यह नहीं है कि किस विमान के पास ज्यादा ताकतवर मिसाइल है। असली मुकाबला रडार, सेंसर, जैमिंग, डिकॉय और इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को लेकर भी होता है।
एक पायलट को बचाने के लिए कभी-कभी दुश्मन को यह यकीन दिलाना ही काफी होता है कि असली निशाना उसके सामने मौजूद है, जबकि असली विमान किसी और दिशा में अपना मिशन पूरा कर रहा है।