सतना में HIV संक्रमित ब्लड केस पर उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा, कहा “मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं, ब्लड माफिया मॉडल चल रहा है”
उमंग सिंघार ने सतना में बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने के मामले को लेकर राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह भ्रष्टाचार और दलाली के हवाले हो चुकी हैं और अस्पतालों में “ब्लड माफिया मॉडल” संचालित हो रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा
उमंग सिंघार ने सतना में बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने के मामले को लेकर राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह भ्रष्टाचार और दलाली के हवाले हो चुकी हैं और अस्पतालों में “ब्लड माफिया मॉडल” संचालित हो रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कि सतना में सामने आए खुलासे बेहद भयावह और मानवता को शर्मसार करने वाले हैं। जिन अस्पतालों में मरीजों की जिंदगी बचाई जानी चाहिए, वहां संक्रमण और मौत का कारोबार चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिकॉर्ड में हेरफेर कर HIV पॉजिटिव खून तक मरीजों को चढ़ा दिया गया और पैसे लेकर खून बेचने का संगठित नेटवर्क सक्रिय रहा।
उमंग सिंघार ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए
इसे लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार, दलाली और प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अस्पतालों में ही “ब्लड माफिया” सक्रिय हो जाए, तो आम आदमी आखिर भरोसा किस पर करे। उन्होंने कहा कि “सबसे शर्मनाक बा जिन अस्पतालों में जीवन बचना चाहिए, वहीं मौत और संक्रमण का खेल चल रहा है। जब अस्पतालों में ब्लड माफिया सक्रिय हो जाए, तो आम आदमी आखिर भरोसा किस पर करे?”
क्या है मामला
यह मामला जनवरी से मई 2025 के बीच का है। थैलेसीमिया पीड़ित 4 से 6 बच्चों को सरदार वल्लभभाई पटेल जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से संक्रमित खून चढ़ाया गया। मार्च-अप्रैल 2025 में रूटीन टेस्टिंग में पहली HIV पॉजिटिव रिपोर्ट आई, लेकिन मामला 16 दिसंबर 2025 को दैनिक भास्कर की पड़ताल के बाद सार्वजनिक हुआ। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि ब्लड बैंक में पॉजिटिव खून को पेन से ‘नेगेटिव’ दिखाकर चढ़ाया गया, फर्जी डोनर लगाए गए और दलालों के जरिए 5,000 से 7,000 में खून बेचा जा रहा था। मामला सामने आने के बाद ब्लड बैंक प्रभारी समेत दो कर्मचारियों को निलंबित किया गया और जांच शुरू हुई। मामले की जांच में कई फर्जीवाड़े सामने आए हैं। जिन लोगों के नाम रक्तदाताओं के रूप में दर्ज किए गए, उनमें से कुछ ने दावा किया कि उन्होंने कभी रक्तदान ही नहीं किया। कई मोबाइल नंबर बंद मिले और पते भी गलत पाए गए। आरोप है कि बिना उचित जांच के कई लोगों को फिट घोषित कर रक्तदान कराया गया।