US-Iran War: शांति वार्ता के बीच अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई, रातभर बरसे बम, ट्रंप ने खारिज किया ईरान-ओमान डील का दावा
अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर रातभर भीषण हमले किए हैं और कई ड्रोन मार गिराए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े इस तनाव से वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों में उछाल की आशंका है।
Washington: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ एक बार फिर बड़े सैन्य हमलों को अंजाम दिया है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार रातभर चले इन ताबड़तोड़ हमलों में ईरान के उन रणनीतिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिन्हें अमेरिकी सेना अपने सैनिकों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों के लिए बड़ा खतरा मान रही थी।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि इस बेहद गोपनीय सैन्य ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी वायुसेना ने कई ईरानी ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया जो अमेरिकी ठिकानों पर संभावित हमले के लिए उड़ान भर रहे थे।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह ताजा सैन्य कार्रवाई मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरान की बढ़ती संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए की गई है। भौगोलिक और आर्थिक दृष्टिकोण से यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक बाजार में पहुंचने वाले कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
अमेरिका का आरोप है कि इस जलडमरूमध्य में ईरानी नौसेना की आक्रामक गतिविधियां और लगातार हो रहा ड्रोन मूवमेंट अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और अमेरिकी बलों के लिए सीधा खतरा बन गया था, जिसके जवाब में यह एक्शन लेना जरूरी था।
तीन महीने से जारी है भीषण जंग, हजारों लोगों की जा चुकी है जान
आपको बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह सैन्य टकराव पिछले तीन महीनों से लगातार और भयानक रूप अख्तियार करता जा रहा है। इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद हुई थी। पिछले 90 दिनों से जारी इस भीषण संघर्ष में अब तक दोनों पक्षों के हजारों लोगों की मौत हो चुकी है।
इस युद्ध का खामियाजा सिर्फ इन दो देशों को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है। युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल एवं गैस की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
शांति वार्ता के बीच नए हमलों से भड़का ईरान, डोनाल्ड ट्रंप का सख्त रुख
चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिका ने यह नया हमला ऐसे समय पर किया है, जब दोनों देशों के राजनयिक पर्दे के पीछे युद्ध खत्म करने को लेकर शांति वार्ता में जुटे हुए थे। हाल ही में ईरानी सरकारी मीडिया ने यह दावा किया था कि एक संभावित शांति समझौते के तहत ईरान और ओमान मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग संचालन की सुरक्षा संभाल सकते हैं।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने बेहद कड़े शब्दों में साफ कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को किसी भी देश के एकाधिकार में नहीं दिया जाएगा; यह मार्ग पूरी तरह खुला रहेगा और वहां अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही हर हाल में जारी रहेगी।
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‘रक्षात्मक हमले’ के नाम पर जंग तेज, नाजुक युद्धविराम की कगार पर दोनों देश
इस हफ्ते यह दूसरी बार है जब अमेरिका ने ईरान की धरती को दहलाया है। इससे पहले सोमवार को भी अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ एक बड़ी सैन्य कार्रवाई की थी, जिसे पेंटागन ने “रक्षात्मक हमला” (Defensive Strike) करार दिया था। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, उस कार्रवाई में ईरान की उन सशस्त्र नौकाओं और मिसाइल लॉन्च साइट्स को नष्ट कर दिया गया था, जो अमेरिकी सैन्य कैंपों को टारगेट कर रही थीं।
दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका के इन हमलों पर सख्त आपत्ति जताई है। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका की यह हरकतें दोनों देशों के बीच जारी बेहद नाजुक युद्धविराम (Ceasefire) का खुला उल्लंघन हैं और अमेरिका जानबूझकर युद्ध की आग को भड़का रहा है।