हाई कोर्ट ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत की रद्द, गिरफ्तारी का खतरा बढ़ा

ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत और दहेज प्रताड़ना मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। दरअसल बुधवार को करीब पौने तीन घंटे चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसका आदेश गुरुवार देर रात करीब 1 बजे

May 28, 2026 - 12:30
हाई कोर्ट ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत की रद्द, गिरफ्तारी का खतरा बढ़ा

ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत और दहेज प्रताड़ना मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। दरअसल बुधवार को करीब पौने तीन घंटे चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसका आदेश गुरुवार देर रात करीब 1 बजे जारी हुआ। हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने जमानत देते समय कई अहम तथ्यों और सबूतों पर ठीक से विचार नहीं किया था। फैसले के बाद अब गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है।

दरअसल यह मामला भोपाल की रहने वाली ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा है। ट्विशा की शादी 9 दिसंबर 2025 को अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुई थी, जो पूर्व जज गिरिबाला सिंह के बेटे हैं। 12 मई 2026 को ट्विशा अपने घर में फांसी पर लटकी मिली थीं। इसके बाद कटारा हिल्स थाना में दहेज प्रताड़ना और अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया। भोपाल की 10वीं अतिरिक्त सत्र अदालत ने गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दे दी थी, लेकिन इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

पिता की ओर से कोर्ट में कई गंभीर आरोप लगाए गए

वहीं सुनवाई के दौरान मृतका के पिता की ओर से कोर्ट में कई गंभीर आरोप लगाए गए। कहा गया कि व्हाट्सऐप चैट्स में पति और ससुराल पक्ष की ओर से मानसिक प्रताड़ना, गर्भ पर शक और गर्भपात का दबाव बनाने जैसी बातें सामने आई हैं। परिवार का आरोप था कि ट्विशा को लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था और उसके चरित्र पर भी सवाल उठाए जा रहे थे। कोर्ट में यह भी कहा गया कि जमानत मिलने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मृतका की छवि खराब करने की कोशिश की गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और व्हाट्सऐप चैट्स बने केस के अहम सबूत

दरअसल इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जांच को और गंभीर बना दिया है। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि शरीर पर फांसी के निशान के अलावा छह अन्य चोटों के निशान भी मिले हैं। एम्स की रिपोर्ट में कहा गया कि ये चोटें शव नीचे उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगीं। इसी आधार पर जांच एजेंसियों ने कहा कि मामले में गहराई से पूछताछ जरूरी है और आरोपियों का कस्टोडियल इंटरोगेशन होना चाहिए।

वहीं हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि व्हाट्सऐप चैट्स और गवाहों के बयान पहली नजर में गिरिबाला सिंह के खिलाफ गंभीर आरोप दिखाते हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि अग्रिम जमानत मिलने के बाद आरोपित ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया। न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने कहा कि अगर किसी जमानत आदेश में तथ्यों की अनदेखी हुई हो तो उसे निरस्त किया जा सकता है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए यही सिद्धांत लागू किया।

सुनवाई के दौरान सीबीआई और राज्य सरकार दोनों ने कहा कि मामला शुरुआती जांच के दौर में है और आरोपियों से पूछताछ बेहद जरूरी है। इसी के बाद हाई कोर्ट ने 15 मई 2026 को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया। फैसले के बाद अब पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।