कोटद्वार विवाद में मोहम्मद दीपक को सुप्रीम कोर्ट से राहत, FIR की कार्रवाई पर अंतरिम रोक

उत्तराखंड के कोटद्वार में एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान के नाम को लेकर हुए विवाद के बाद चर्चा में आए जिम संचालक दीपक कुमार उर्फ ‘मोहम्मद दीपक’ को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में आगे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने उत्तराखंड सरकार […]

Aug 31, 2026 - 15:30
कोटद्वार विवाद में मोहम्मद दीपक को सुप्रीम कोर्ट से राहत, FIR की कार्रवाई पर अंतरिम रोक

उत्तराखंड के कोटद्वार में एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान के नाम को लेकर हुए विवाद के बाद चर्चा में आए जिम संचालक दीपक कुमार उर्फ ‘मोहम्मद दीपक’ को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में आगे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है।

अदालत ने उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही, उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगाई गई है, जिसके तहत दीपक को मामले से संबंधित बयान या पोस्ट सोशल मीडिया पर करने से रोका गया था।

मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने की। दीपक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए। उन्होंने अदालत के सामने दलील दी कि दीपक ने एक मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में इसलिए हस्तक्षेप किया था क्योंकि कुछ लोग उसकी दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द इस्तेमाल करने पर आपत्ति जता रहे थे।

26 जनवरी को शुरू हुआ था विवाद

मामला इस साल 26 जनवरी को कोटद्वार में सामने आया था। बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद की दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द को लेकर कुछ बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी। दुकान का नाम ‘बाबा स्कूल ड्रेस’ था और प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाया जाए। यह विवाद इसलिए भी संवेदनशील हो गया क्योंकि कोटद्वार में सिद्धबली बाबा का प्रसिद्ध मंदिर है।

इसी दौरान वहां मौजूद जिम संचालक दीपक कुमार ने बीच-बचाव किया। उन्होंने दुकान के नाम का बचाव करते हुए कहा कि दुकान लंबे समय से इसी नाम से चल रही है और सिर्फ धार्मिक पहचान के आधार पर नाम बदलने का दबाव बनाना उचित नहीं है।

‘मेरा नाम मोहम्मद दीपक है’ 

विवाद के दौरान जब कुछ लोगों ने दीपक से उनकी पहचान पूछी तो उन्होंने कहा “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।” इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद दीपक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गए और उन्हें ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से जाना जाने लगा।

इसके बाद विवाद और बढ़ गया। अलग-अलग पक्षों की शिकायतों पर पुलिस ने मामले दर्ज किए। दीपक के खिलाफ दर्ज एफआईआर में उन पर अन्य लोगों के साथ मिलकर विवाद और  शांति भंग करने से जुड़े आरोप लगाए गए थे।

दीपक ने हाईकोर्ट का रुख किया

एफआईआर रद्द कराने और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ राहत पाने के लिए दीपक ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि हाईकोर्ट से उन्हें तत्काल राहत नहीं मिली। कोर्ट ने एफआईआर को रद्द करने से इनकार किया और मामले की जांच में सहयोग करने को कहा।

मार्च 2026 में हाईकोर्ट ने दीपक को मामले से संबंधित बयान सोशल मीडिया पर देने से भी रोक दिया था। अदालत ने माना था कि चूंकि वह मामले में आरोपी हैं और जांच चल रही है, इसलिए सोशल मीडिया पर बयान देने से जांच प्रभावित होने की आशंका हो सकती है।

हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद दीपक ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उनकी याचिका में एफआईआर रद्द करने की मांग के साथ हाईकोर्ट के आदेश को भी चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक मनु सिंघवी ने दीपक का पक्ष रखते हुए कहा कि उनका मुवक्किल एक सामान्य नागरिक के तौर पर विवाद में हस्तक्षेप कर रहा था। उन्होंने कहा कि दीपक ने किसी समुदाय के खिलाफ भड़काऊ भूमिका नहीं निभाई, बल्कि एक दुकानदार पर दुकान का नाम बदलने के लिए बनाए जा रहे दबाव का विरोध किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने दी मोहम्मद दीपक को राहत

आज सुप्रीम कोर्ट ने दीपक की याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी किया गया है। अदालत ने दीपक के खिलाफ दर्ज एफआईआर से आगे होने वाली कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगा दी गई जिसके तहत दीपक को इस मामले से संबंधित सोशल मीडिया पर पोस्ट या बयान देने से रोका गया था।