विश्व बाल श्रम निषेध दिवस: बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता का दिन, सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा “बच्चों के हाथों में कलम-किताब ही देंगे”
दुनिया भर में आज विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन का उद्देश्य बाल श्रम जैसी गंभीर सामाजिक समस्या के प्रति लोगों को जागरूक करना, बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार दिलाना और बाल श्रम के पूर्ण उन्मूलन के लिए वैश्विक प्रयासों को मजबूत करना है। आज के
दुनिया भर में आज विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन का उद्देश्य बाल श्रम जैसी गंभीर सामाजिक समस्या के प्रति लोगों को जागरूक करना, बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार दिलाना और बाल श्रम के पूर्ण उन्मूलन के लिए वैश्विक प्रयासों को मजबूत करना है।
आज के दिन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बच्चों के हितों के लिए अपने संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि “बच्चों के माथे पर बोझ अच्छा नहीं लगता है। खुशहाल बचपन और शिक्षा उनका अधिकार है। ‘विश्व बालश्रम निषेध दिवस’ पर संकल्प लें कि बच्चों के हाथों में कलम-किताब ही देंगे और बाल श्रम से मुक्त समाज बनाएंगे। हमारी सरकार बच्चों के हितों और शिक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है।”
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस
हर वर्ष 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत साल 2002 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा की गई थी। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की स्थापना हुई, तब इसका पहला सम्मेलन बाल श्रम पर ही आधारित था। उस समय औद्योगिक कार्यों के लिए बच्चों की न्यूनतम आयु 14 वर्ष तय करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसका उद्देश्य दुनिया भर में मौजूद बाल श्रम की समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करना और बच्चों को शोषणकारी तथा खतरनाक कार्यों से मुक्त कराने के लिए ठोस कदम उठाने को प्रोत्साहित करना है।
सारे बच्चों को मिले उनके अधिकार
बाल श्रम से आशय ऐसे कार्यों से है जो बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं तथा उन्हें शिक्षा से वंचित कर देते हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार आज भी दुनिया के कई देशों में लाखों बच्चे कृषि, निर्माण, घरेलू कार्य, खनन, छोटे उद्योगों और अन्य असंगठित क्षेत्रों में कार्य करने को मजबूर हैं। गरीबी, अशिक्षा, सामाजिक असमानता, बेरोजगारी और संसाधनों की कमी को बाल श्रम के प्रमुख कारणों में शामिल किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाल श्रम न सिर्फ बच्चों के बचपन को छीनता है, बल्कि उनके भविष्य और समाज के समग्र विकास को भी प्रभावित करता है।
साझा प्रयासों की ज़रूरत
भारत में बाल श्रम पर रोक लगाने के लिए कानूनी प्रावधान लागू किए गए हैं। बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को अधिकांश व्यवसायों और प्रक्रियाओं में रोजगार देना प्रतिबंधित है। वहीं बच्चों को विद्यालयों तक पहुंच सुनिश्चित करने और शिक्षा से जोड़ने के लिए भी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाल श्रम उन्मूलन सिर्फ सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। परिवार, विद्यालय, उद्योग जगत, सामाजिक संस्थाएं और आम नागरिक यदि बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में सहयोग करें तो बाल श्रम की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस इस बात की याद दिलाता है कि हर बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य का अधिकार है।